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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशनाराज शिवपाल सपा गठबंधन की बैठक छोड़ पहुंचे दिल्ली, मुलायम सिंह से मिल बताया अपना 'दर्द'

नाराज शिवपाल सपा गठबंधन की बैठक छोड़ पहुंचे दिल्ली, मुलायम सिंह से मिल बताया अपना 'दर्द'

यूपी विधानसभा चुनाव-2022 के नतीजों में मिली निराशा के बाद अब एक बार फिर मुलायम परिवार में दूरियां नज़र आने लगी हैं। परिणाम के बाद अखिलेश यादव ने पार्टी विधायकों की बैठक में शिवपाल को न्‍योता नहीं

नाराज शिवपाल सपा गठबंधन की बैठक छोड़ पहुंचे दिल्ली, मुलायम सिंह से मिल बताया अपना 'दर्द'
Ajay Singhलाइव हिन्‍दुस्‍तान,लखनऊMon, 28 Mar 2022 10:12 AM

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यूपी विधानसभा चुनाव-2022 के नतीजों में मिली निराशा के बाद अब एक बार फिर मुलायम परिवार में दूरियां नज़र आने लगी हैं। परिणाम के बाद अखिलेश यादव ने पार्टी विधायकों की बैठक में शिवपाल को न्‍योता नहीं दिया तो आज समाजवादी पार्टी गठबंधन में शामिल सहयोगी पार्टियों की मीटिंग में जाने की बजाए शिवपाल दिल्‍ली चले गए। वहां उन्‍होंने अपने बड़े भाई और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव से मिलकर अपना दर्द साझा किया। 

गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने आज लखनऊ पार्टी मुख्‍यालय पर सहयोगी दलों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में वह विधानसभा चुनाव में मनमुताबिक नतीजे न आने के सवाल पर मंथन करेंगे। बैठक में नाराज चाचा शिवपाल शामिल होंगे या नहीं इस पर सबकी नज़रें थीं लेकिन अब साफ हो गया है कि शिवपाल इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। वह दिल्‍ली पहुंच गए हैं। राजधानी में उन्‍होंने मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में शिवपाल ने मुलायम से अपना दर्द साझा किया।

बैठक में होगी हार के कारणों की पड़ताल 

सहयोगी दलों की बैठक में हार के कारणों की पड़ताल होगी। सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बातचीत में गठबंधन की मजबूती पर भी चर्चा होगी। अगला लोकसभा चुनाव मिल कर लड़ने पर भी चर्चा होगी। विधानसभा में सपा गठबंधन के 125 विधायक हैं। इसमें गठबंधन के 14 विधायक शामिल हैं। 

बैठक में रालोद, सुभासपा, जनवादी पार्टी, महान दल, अपना दल कमेरावादी को भी बुलाया गया है। अब सवाल है कि इस बैठक में प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव  शामिल होते हैं या नहीं।  शिवपाल यादव सपा विधायकों की बैठक में न बुलाए जाने से नाराज हैं। वह सपा विधायक के तौर पर आना चाहते थे जबकि सपा उन्हें सपा विधायक के बजाए प्रसपा अध्यक्ष के तौर पर ज्यादा अहमियत दे रही है। इसलिए उन्हें सहयोगी दल में रखा हुआ  है। लेकिन शिवपाल के तेवर बता रहे हैं कि अब वह बड़ा निर्णय कर सकते हैं।

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