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20 अक्तूबर, 2020|7:12|IST

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राफेल की पहली महिला पायलट शिवांगी बचपन से ही चिड़ियों की तरह उड़ना चाहती थी

देश के सबसे ताकतवर फाइटर विमान राफेल स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो के लिए विशेषज्ञ पायलट चयनित करने के लिए वायु सेना की ओर से प्रशिक्षण में जब बेटी शिवांगी को शामिल किया गया, तभी यकीन हो गया था कि यहां भी बेटी खुद को साबित करेगी।

प्रशिक्षण के बाद जब बेटी के चयन की जानकारी मिली तो खुशी के मारे पूरी रात नींद नहीं आई। बेटी की इतनी बड़ी सफलता पर भाव और जज्बात बयां नहीं किया जा रहा।' ये अलफाज शिवांगी की मां सीमा सिंह के थे। बुधवार दोपहर 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में मां ने कहा, बचपन से ही नटखट बिटिया चीड़ियों की तरह उड़ना चाहती थी।

लगन और अनवरत प्रयास हो तो लक्ष्य पाना मुश्किल नहीं है। शहर के फुलवरिया गांव में रहने वाली शिवांगी सिंह ने इसे कर दिखाया। वायु सेना में फाइटर विमान उड़ाने का सपना पाला और लीक से हटकर इसी के लिए जी-तोड़ मेहनत की। अब एक नया इतिहास भी रच दिया।  फुलवरिया रेलवे क्रासिंग के निकट तीन दशक पुराने मकान में शिवांगी की मां सीमा सिंह, पिता कुमारेश्वर सिंह, भाई मयंक सिंह, शुभांशु, हिमांशी, बड़े पिता राजेश्वर सिंह, बड़ी मां बेटी की उपलब्धि पर खुशियां मनाने में जुटा था।

पिता कुमारेश्वर ने बताया कि मंगलवार शाम को बेटी के चयन की जानकारी मिली। बताया गया कि उनकी बेटी देश की पहली और इकलौती पायलट है जो वायु सेना के बेड़े में शामिल हुए राफेल के गोल्डेन ऐरा की टीम में शामिल हुई है। शिवांगी वायु सेना का फाइटर विमान मिग -21 बाइसन उड़ाती हैं। वह राफेल के लिए अंबाला में तकनीकी प्रशिक्षण ले रही थीं।  

पड़ोसियों के साथ हलवा खाकर मनाई खुशियां
बेटी की सफलता की जानकारी पर पास-पड़ोस के बच्चे और बुजुर्ग भी पहुंचे। घर हलवा बना और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर खुशियां जताई गई। पड़ोस के शुभम सिंह, मल्लिका सिंह, कृष्णकांत सिंह, जाह्नवी सिंह, आदित्य सिंह का कहना था कि दीदी हमारे लिए ही नहीं, हर एक युवा के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं। 

एयरफोर्स म्यूजियम में गई और तय किया जीवन का लक्ष्य
शिवांगी के नाना कर्नल वीएन सिंह सेवानिवृत्ति के बाद नई दिल्ली में रहने लगे। वहां अक्सर शिवांगी अपनी मां व भाई के साथ जाती थीं। मां सीमा सिंह बताती हैं, हाई-स्कूल की पढ़ाई के दौरान पिताजी नई दिल्ली में बच्चों को एयरफोर्स का म्यूजियम दिखाने गये। वहां एयरफोर्स के विमान और वायु सैनिकों की ड्रेस देखकर शिवांगी रोमांचित हो गई। वहीं नाना से बोली कि उसे भी वायु सेना में जाना है। ऐसी ही ड्रेस पहननी है और ये फाइटर विमान भी उड़ाना है। इसके बाद यहीं से जीवन का लक्ष्य तय कर लिया।

बच्चों की परवरिश के लिए मां का त्याग, सरकारी नौकरी छोड़ी
मां सीमा सिंह ने बच्चों की परवरिश के लिए त्याग किया। वह नई दिल्ली से स्नातक कीं। शादी के बाद वाराणसी आईं और स्नातकोत्तर के बाद बीएड की पढ़ाई पूरी की। साल 2007 में उनका चयन सरकारी शिक्षिका के रूप में हुआ। बच्चे पढ़ रहे थे, उन्हें लगा कि नौकरी करने पर बच्चों की बेहतर परवरिश और पढ़ाई में अड़चन आयेगी। इसलिए उन्होंने नौकरी नहीं की। पिता कुमारेश्वर सिंह ने बेटी की हर इच्छा पूरी की। पढ़ाई के दौरान कोई कमी नहीं आने दी।

मेधावी रहीं शिवांगी
शिवांगी पढ़ाई और खेल में भी अव्वल रहीं। आठवीं तक की पढ़ाई कैंटोंमेंट स्थित सेंट मेरीज से की। इंटर तक की पढ़ाई शिवपुर स्थित सेंट जोजर्स कॉन्वेंट स्कूल बाईपास से की। विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और 89 फीसदी अंक अर्जित कीं। सनबीम वुमेंस कॉलेज भगवानपुर से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने 68 फीसदी अंक पाये थे। बीएससी की पढ़ाई के दौरान ही एनसीसी ज्वाइन की। 

... तो भारतीय बास्केटबाल टीम की हिस्सा होतीं
मां सीमा सिंह ने बताया कि बेटी खेल में भी आगे रहती थी। स्कूल के लिए उसने नेशनल स्तर तक की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उसका ड्रिल लड़कों से भी बेहतर था। इसलिए हर हर बार टीम में चुनी जाती और उसकी बदौलत टीम जीतती थी। जैवलिन थ्रो में भी उसने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।

आठ साल छोटा भाई बनना चाहता है अफसर
छोटा भाई मयंक शिवांगी से आठ साल छोटा है। बताया कि दीदी की सफलता ने उनके लिए ही नहीं, पड़ोस के लोगों के लिए भी एक प्लेटफार्म तय कर दी है। घर में शिवांगी ही सबसे बड़ी हैं। मयंक ने बताया कि वही भी दीदी की तरह सेना में जाकर देश सेवा करना चाहते हैं। इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे मयंक एनडीए की तैयारी कर रहे हैं।

महज तीन साल में बिटिया ने लगाई एक और छलांग
शिवांगी ने महज तीन साल में लंबी छलांग लगाई। साल 2015 में उन्होंने वायु सेना की परीक्षा पास की। इसके बाद डेढ़ साल तक प्रशिक्षण चला। प्रशिक्षण के बाद दूसरे बैच में साल 2017 में उन्हें देश की पांच महिला फाइटर विमान की पायलटों में चुना गया। अब तीसरे साल ही शिवांगी की काबीलियत देखते हुए उन्हें राफेल की टीम में चुना गया।

रविवार को मां से की थी बात
मां सीमा सिंह ने बताया कि परिवार में सबसे अधिक उन्हीं से बातचीत होती है। सप्ताह में दो से तीन बार बातचीत हो जाती है। पिछली बार रविवार शाम बात हुई। तब बिटिया ने बताया कि अभी प्रशिक्षण चल रहा है। एक अफसर के फेयरवेल पार्टी के बाद खाने से पहले बातचीत की थी। अभी सुरक्षा कारणों और व्यवस्तता से बातचीत नहीं हो सकी है।

शिवांगी की उपलब्धि बेटियों के लिए नजीर है। साथ ही बेटियों के प्रति अलग सोच रखने वाले लोगों के लिए भी एक उदाहरण है। और बड़ी उपलब्धि पाने के लिए बनारस की बेटी शिवांगी को शुभकामनाएं। - अमित पाठक, एसएसपी वाराणसी

बनारस की बेटी शिवांगी ने इतिहास रचा है। खासतौर से सेना में जहां खुद को साबित करना कठिन होता है, वहां शिवांगी राफेल की पायलट टीम में चुनी गईं। उन पर पूरे देश को नाज है। - नरेंद्र पाल सिंह, कमांडेंट, 95 बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल,पहाड़िया मंडी

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  • Web Title:Shivangi Singh first female pilot of Rafale wanted to fly like birds since childhood