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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशअखिलेश यादव से मिले शशि प्रताप सिंह, ओपी राजभर की सुभासपा छोड़कर बनाई है राष्ट्रीय समता पार्टी

अखिलेश यादव से मिले शशि प्रताप सिंह, ओपी राजभर की सुभासपा छोड़कर बनाई है राष्ट्रीय समता पार्टी

सुभासपा और अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को झटका देकर अपनी पार्टी बनाने वाले शशि प्रताप सिंह सोमवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले। लखनऊ में अखिलेश यादव के आवास पर यह मुलाकात हुई।

अखिलेश यादव से मिले शशि प्रताप सिंह, ओपी राजभर की सुभासपा छोड़कर बनाई है राष्ट्रीय समता पार्टी
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,वाराणसीMon, 08 Aug 2022 06:38 PM

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सुभासपा और अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को झटका देकर अपनी पार्टी बनाने वाले शशि प्रताप सिंह सोमवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले। लखनऊ में अखिलेश यादव के आवास पर यह मुलाकात हुई। शशि प्रताप सिंह ने पिछले दिनों राष्ट्रीय समता पार्टी का नाम से अपनी नई पार्टी बना ली थी। बतौर राष्ट्रीय संयोजक शशिप्रताप लगातार पार्टी को मजबूत करने में लगे हैं। अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान राष्ट्रीय समता पार्टी के अध्यक्ष कैप्टन राजकुमार भी साथ रहे।

इस मुलाकात को यूपी में होने वाले नगर निकाय चुनाव की तैयारियों से भी जोड़ा जा रहा है। समाजवादी पार्टी ने निकाय चुनाव पूरे दमदारी से लड़ने की तैयारी कर रखी है। यह निकाय के लिए पिछले ही हफ्ते प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। सपा निकाय चुनाव को कितनी गंभीरता से ले रही है, इसका उदाहरण प्राभरियों की नियुक्तियां भी बता रही हैं। इनमें विधायकों और पूर्व मंत्रियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। 

मुलाकात के बाद शशि प्रताप सिंह ने बताया कि अखिलेश यादव के बुलावे पर उनसे मिलने गए थे। अखिलेश यादव ने कहा कि हम लोग एक साथ आ जाएं। आप भी युवा हैं और हम भी युवा हैं। आगे जितने भी चुनाव होंगे मिलकर लड़ेंगे। आपकी पार्टी नई है, हम लोग मिलकर चलेंगे तो इसका फायदा होगा। 
 सुभासपा छोड़ने को लेकर शशिप्रताप ने एक बार फिर दोहराया कि ओपी राजभर के बयानों के कारण ही पार्टी छोड़नी पड़ी है।

ओपी राजभर पर कई आरोप लगाते हुए शशिप्रताप ने कहा कि वह पुत्र मोह में फंसे हैं। सुभासपा को बर्बाद कर रहे थे। सुभासपा छोड़ने के बाद अखिलेश यादव ने मेरी पार्टी के बारे में सुना। इसके बाद इसके बाद मुझे मिलने के लिए बुलाया था। कहा कि सपा ने ओपी राजभर को विधानसभा चुनाव में 16 सीटें दी थी। इनमें तीन पर अपने लोगों को लड़ाया। अन्य सीटों को बेच दिया। कहा कि वाराणसी की शिवपुर सीट पर बेटे की जगह किसी राजपूत या ब्राह्मण को लड़ाया जाता तो वह जीत सकते थे। 

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