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चीन सीमा पर शहीद प्रतापगढ़ के सुधाकर सिंह के परिजनों को मिलेंगे 50 लाख, एक सदस्य को नौकरी भी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अरुणाचल प्रदेश में कर्तव्यपालन के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले प्रतापगढ़ निवासी सेना के जवान सुधाकर सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री...

चीन सीमा पर शहीद प्रतापगढ़ के सुधाकर सिंह के परिजनों को मिलेंगे 50 लाख, एक सदस्य को नौकरी भी
लखनऊ विशेष संवाददाताTue, 05 Jan 2021 10:25 PM
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अरुणाचल प्रदेश में कर्तव्यपालन के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले प्रतापगढ़ निवासी सेना के जवान सुधाकर सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री ने स्व. सुधाकर सिंह के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। उन्होंने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा जिले की एक सड़क का नामकरण स्व. सुधाकर सिंह के नाम पर करने की भी घोषणा की है। 

प्रतापगढ़ के सदर ब्लॉक क्षेत्र के गोंड़े गांव निवासी समर बहादुर सिंह के तीन बेटों और तीन बेटियों में सबसे बडे़ सुधाकर सिंह (46) भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर तैनात थे। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग असम में ‘लाइट अर्टिलरी रेजीमेंट की 1851 यूनिट में थी। करीब एक माह से वह अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा पर देश की सुरक्षा में लगे थे। रविवार रात ड्यूटी के दौरान भारी बर्फबारी और ठंड के बीच वह शहीद हो गए।

इसकी सूचना असम में रह रहे पत्नी और बच्चों के साथ गोंड़े में रह रहे भाई को मिली तो सभी अवाक रह गए। ग्रामीण भी गांव के बेटे के देश की सीमा पर शहीद होने की खबर से स्तब्ध रह गए। शहीद सुधाकर सिंह के भाई प्रभाकर सिंह ने बताया कि अभी उनका शव पत्नी और बेटे के पास असम लाया जा रहा है। यहां उनका पार्थिव शरीर आने में दो दिन लग सकते हैं।

तीन भाई और तीन बहनों में सबसे बड़े नायब सूबेदार सुधाकर सिंह के शहीद होने के साथ ही उनके परिवार ने कमाऊ पूत खो दिया। सुधाकर सिंह के भाई दिवाकर और प्रभाकर खेती करते हैं। दो बहनें अभी अविवाहित हैं। सुधाकर पर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। उनके शहीद होने के साथ ही पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

घर की जिम्मेदारी निभाते हुए सुधाकर सिंह अपनी पत्नी और बच्चों को भी साथ नहीं रखते थे। करीब पांच साल पहले उनकी पत्नी सुजाता सिंह, बेटी खुशी और छोटे बेटे मानस उनके साथ गईं और असम में रहने लगीं। बड़ा बेटा उद्देश्य प्रताप सिंह भी गोंड़े में ही रहता था, लेकिन इस बीच अपनी मां के पास असम चला गया था।

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