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Hindi News उत्तर प्रदेशश्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद का निपटारा केवल वक्फ ट्रिब्यूनल में संभव, हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष की दलील

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद का निपटारा केवल वक्फ ट्रिब्यूनल में संभव, हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष की दलील

श्रीकृष्ण जन्मभूमि ईदगाह मामले में मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में कहा कि विवादित संपत्ति, वक्फ संपत्ति होने के कारण इस संपत्ति विवाद का निपटारा केवल वक्फ न्यायाधिकरण के समक्ष ही किया जा सकता है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद का निपटारा केवल वक्फ ट्रिब्यूनल में संभव, हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष की दलील
Yogesh Yadavविधि संवाददाता,प्रयागराजMon, 27 May 2024 09:36 PM
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मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद के मामले में सोमवार को भी सुनवाई पूरी नहीं हुई। न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने सुनवाई मंगलवार को जारी रखने को कहा है। सोमवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से एडवोकेट तस्लीमा अजीज अहमदी ने कहा कि विवादित संपत्ति, वक्फ संपत्ति होने के कारण इस संपत्ति विवाद का निपटारा केवल वक्फ न्यायाधिकरण के समक्ष ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोई भी पीड़ित व्यक्ति होने के नाते ट्रिब्यूनल के समक्ष अपनी समस्या उठा सकता है। 

यह मामला मियाद अधिनियम से वर्जित है। उनका कहना था कि पक्षकारों ने 12 अक्टूबर 1968 को समझौता किया था और कहा कि 1974 में तय किए गए एक सिविल मुकदमे में समझौते की पुष्टि की गई है। समझौते को चुनौती देने की सीमा तीन साल है लेकिन मुकदमा 2020 में किया गया है और इस प्रकार वर्तमान मुकदमा मियाद अधिनियम से वर्जित है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बहस में उन्होंने कहा कि मूर्ति एक न्यायिक व्यक्ति होने के नाते समयसीमा अनुबंध के अनुसरण में कब्जे की तारीख से लागू होगी। 

इससे पूर्व हिंदू पक्ष की ओर से यह बात उठाई गई थी कि समझौते में देवता कोई पक्ष नहीं थे और न ही 1974 में पारित अदालती डिक्री में कोई पक्ष था। यह भी कहा गया कि कथित समझौता श्री जन्म सेवा संस्थान द्वारा किया गया था, जिसे किसी भी समझौते को करने का अधिकार नहीं था। संस्थान का उद्देश्य केवल रोजमर्रा की गतिविधियों का प्रबंधन करना था और उसे इस तरह का समझौता करने का कोई अधिकार नहीं था। साथ ही देवता नाबालिग हैं और नाबालिग के हित के खिलाफ किया गया कोई भी समझौता उल्लंघन है।

इससे पहले हिंदू पक्ष की ओर से राणा प्रताप के साथ रीना एन सिंह ने कहा था कि किसी भी संपत्ति पर अतिक्रमण करना, उसकी प्रकृति बदलना और उसे बिना स्वामित्व के वक्फ संपत्ति के रूप में परिवर्तित करना वक्फ की प्रकृति रही है। इस तरह की प्रथा की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस मामले में वक्फ अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे क्योंकि विवादित संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं है।

जिस संपत्ति की बात की जा रही है वह एक मंदिर था और उस पर जबरन कब्जा करने के बाद उन्होंने नमाज अदा करना शुरू कर दिया लेकिन इस तरह जमीन का चरित्र नहीं बदला जा सकता। विचाराधीन संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं है, इसलिए इस न्यायालय को मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र है। इस मामले में मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।