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सावन का दूसरा सोमवारः काशी विश्वनाथ दरबार से गंगा घाट तक आस्था का सैलाब, दिव्यांग और वृद्धों के लिए इस बार खास इंतजाम

वाराणसी लाइव हिन्दुस्तानPublished By: Yogesh Yadav
Mon, 02 Aug 2021 05:11 PM
सावन का दूसरा सोमवारः काशी विश्वनाथ दरबार से गंगा घाट तक आस्था का सैलाब, दिव्यांग और वृद्धों के लिए इस बार खास इंतजाम

काशी में सावन के दूसरे सोमवार को भक्तों का सैलाब उमड़ा। पहले सोमवार की तुलना में दूसरे सोमवार को बाबा विश्वनाथ के भक्तों का सैलाब उमड़ा। बाबा दरबार से लेकर गंगा घाट तक भक्तों का सैलाब दिखाई दिया। मंगला आरती से पहले ही रविवार की रात सभी गेटों पर लग गई कतार सोमवार की दोपहर बाद तक जारी रही। मैदागिन से बांसफाटक और वहां से गोदौलिया और दशाश्वमेध घाट तक का इलाका हर हर महादेव के जयकारे से गूंजता रहा।

रविवार की रात से ही बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन के लिए देर रात तक तैयारियां चलती रहीं। सवेरे गंगा में स्नान के लिए लोग उमड़ पड़े। इस बार काशी के बाहर के श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा नजर आई। रविवार शाम से ही बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का रेला बनारस पहुंचने लगा था। आधी रात के बाद से ही शिवभक्त बैरिकेडिंग में कतारबद्ध होने लगे थे। श्री काशी विश्वनाथ का सावन के दूसरे सोमवार को शिवशक्ति स्वरूप में विग्रह श्रृंगार किया गया है। बाबा दरबार की भी आकर्षक साजसज्जा की गई है। 

इस बार भी भक्तों को काशी विश्वनाथ का झांकी दर्शन ही मिला। जलाभिषेक के लिए बाहर लगाए गए पात्रों के जरिये शिवलिंग पर दूध-जल आदि गिरता रहा। मंदिर में गर्भगृह के पहले ही काशी विश्वनाथ का दर्शन एलईडी स्क्रीन पर श्रद्धालु करते रहे। सभी रास्तों पर पेयजल की व्यवस्था भी की गई। स्टील की रेलिंग के बीच बिछे कारपेट से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश करते रहे। इस दौरान पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ धाम का स्वरूप भी भक्तों ने देखा। मंदिर प्रशासन ने सभी प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर और थर्मल स्कैनिंग करने की व्यवस्था की है। कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए सभी श्रद्धालुओं को मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। 

इस बार दिव्यांग और वृद्धों के लिए विशेष इंतजाम

सावन के दूसरे सोमवार पर दिव्यांगों और वृद्धजनों के लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। दिव्यांग और वृद्धजन आसानी से बाबा दरबार तक आ सके इसके लिए मंदिर प्रशासन ने फ्री ई रिक्शा की सेवा दे रखी है। गोदौलिया और मैदागिन चौराहे पर मंदिर प्रशासन ने 3-3 ई रिक्शा चालकों की ड्यूटी लगाई है। यह ई रिक्शा दिव्यांग और वृद्ध भक्तों को मंदिर तक पहुंचा रहे हैं।
ई रिक्शा चलाने वाले रविश श्रीवास्तव ने बताया कि भोर में ढाई बजे से शाम तक मंदिर प्रशासन की ओर से फ्री ई रिक्शा चलाई जा रही है। इस ई रिक्शा के जरिए सिर्फ दिव्यांग और अशक्त लोगों को बाबा दरबार तक पहुंचाया जा रहा है। ई रिक्शा चालक करण शर्मा ने बताया कि बाबा विश्वनाथ ने सावन में उन्हें अपने भक्तों की सेवा का अवसर दिया है। जब हम अपने ई रिक्शा पर दिव्यांग और वृद्ध भक्तों को मंदिर तक पहुंचाते हैं तो भक्त भी आशीर्वाद देते हैं। भक्तों की सेवा कर हमें भी सुकून मिकता है।

चार गेटों से प्रवेश और निकासी

विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश के लिए ए, बी, सी, डी नाम से चार गेट बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं को गेट नंबर चार छत्ताद्वार होते हुए मंदिर चौक भेजा जाता रहा। गेट-ए से प्रवेश करने के बाद गर्भगृह के पूर्वी प्रवेश द्वार पर जल चढ़ाने की व्यवस्था रही। बांसफाटक से ढुंढिराज गली होकर आने वाले श्रद्धालु मंदिर परिसर के गेट-डी से प्रवेश करते रहे और गर्भगृह के पश्चिमी द्वार से दर्शन व जलाभिषेक किया। सरस्वती फाटक की ओर से आने वाले श्रद्धालु गर्भगृह के दक्षिणी द्वार और वीआईपी, वीवीआईपी व सुगम दर्शन के टिकटधारी गेट-सी से प्रवेश कर गर्भगृह के उत्तरी द्वार से दर्शन कर लौटे।

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