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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशकाशी में आज मनेगी दूसरी देव दीपावली, तमिल उत्सव अनुसार ये है मान्यता

काशी में आज मनेगी दूसरी देव दीपावली, तमिल उत्सव अनुसार ये है मान्यता

वाराणसी में तल रहे काशी-तमिल संगमम् में मंगलवार को काशी की दूसरी देव दीपावली मनाई जाएगी। यह दीपावली उत्तर के चंद्र पंचांग नहीं बल्कि दक्षिण के सौर पंचांग के अनुसार तमिल कार्तिक पूर्णिमा को होगी।

काशी में आज मनेगी दूसरी देव दीपावली, तमिल उत्सव अनुसार ये है मान्यता
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,वाराणसीTue, 06 Dec 2022 09:07 AM

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वाराणसी में तल रहे काशी-तमिल संगमम् में मंगलवार को काशी की दूसरी देव दीपावली मनाई जाएगी। यह दीपावली उत्तर के चंद्र पंचांग नहीं बल्कि दक्षिण के सौर पंचांग के अनुसार तमिल कार्तिक पूर्णिमा को होगी। दक्षिण में धूमधाम से मनाए जाने वाले इस उत्सव को ‘कार्तिगई दीपम उत्सव’ कहा जाता है।

कार्तिक मास परंपराओं के हिसाब से उत्तर और दक्षिण में ज्यादा दूरी नहीं है। उत्तर भारत में कार्तिक में पूरे महीने दीप जलाए जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली के रूप में दीपोत्सव मनाया जाता है। चंद्र पंचांग के आधार पर दक्षिण में भी यही रिवाज है। यहां कार्तिक मास उत्तर के कार्तिक के बाद पड़ता है। पूरे महीने सूर्यास्त तक व्रत, मंदिरों में दीप जलाने और पूर्णिमा की रात दीपों से सजावट का रिवाज है। काशी-तमिल संगमम् के संयोजक पद्मश्री चमूकृष्ण शास्त्री ने बताया कि इस बार कार्तिगई दीपम उत्सव काशी में आयोजित हो रहा है।

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काशी के परिवार भी होंगे शामिल उत्सव के लिए संगमम् में आए तमिल मेहमानों के साथ काशीवासी तमिल परिवारों को भी आमंत्रित किया गया है। बीएचयू के छात्र और तमिल कलाकार भी यहां पहुंचेंगे। एम्फी थिएटर स्थित आयोजन स्थल को हजारों दीपों से जगमग किया जाएगा। साथ ही दक्षिण की परंपरा के अनुसार पूजन और अतिशबाजी भी होगी।

उत्सव के पीछे यह है मान्यता
खुद को सर्वोच्च मानने वाले ब्रह्मा और विष्णु के सामने देवाधिदेव महादेव ज्वाला के रूप में प्रकट हुए थे। उन्होंने दोनों को इस ज्वाला का ओर-छोर बताने को कहा और पहले लौटने वाले को सर्वश्रेष्ठ घोषित करने का ऐलान किया। भगवान विष्णु वाराह रूप में नीचे की ओर गए जबकि ब्रह्मा ने हंस रूप धरकर ऊपर की तरफ उड़ान भरी। विष्णु छोर न ढूंढ सके मगर ब्रह्मा थजम्पु नामक पुष्प लेकर लौटे और ज्वाला का ऊपरी छोर खोज लेने का दावा किया। महादेव ने झूठ पकड़ लिया और ब्रह्मा को कभी न पूजे जाने का श्राप दिया। तमिल मान्यता है कि ज्वाला स्वरूप में महादेव कार्तिगई के दिन ही प्रकट हुए थे।