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25 अक्तूबर, 2020|11:18|IST

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संजीत हत्याकांडः कानपुर पुलिस ताकती रह गई और अपहरणकर्ता 30 लाख रुपये से भरा बैग ले भागे, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

कानपुर में लैब टैक्नीशियन संजीत यादव हत्याकांड से यूपी की सियासत गरमा गई है। इस घटनाक्रम में 13 जुलाई की रात संजीत के पिता चमनलाल ने इंस्पेक्टर रणजीत राय के कहने पर ही अपहरणकर्ताओं को गुजैनी पुल से फिरौती के 30 लाख रुपयों से भरा बैग फेंका। पुलिस अपहरर्ताओं को पकड़ने का प्लान ही बनाती रह गई और अपहर्ता पुलिस की नाक के नीचे से बैग उठाकर चले गए। अगले दिन एएसपी अपर्णा गुप्ता ने कहा था कि बैग में रुपए नहीं बल्कि कपड़े थे। परिजन इतनी बड़ी रकम कहां से लाए वह इस सोर्स का पता लगवा रहीं हैं। जबकि बहन रुचि का कहना कि स्वॉट टीम प्रभारी दिनेश यादव ने कहा था कि भाई संजीत की जान को खतरा हो सकता है उनके कहने पर ही बैग में रुपए रखे थे। 

अपहरणकांड में ये रहीं पुलिस की खामियां 
- अपहरणकर्ताओं  ने परिजनों को करीब 26 बार कॉल किया इस दौरान उनसे करीब आधा-आधा घंटे तक बातचीत हुई फिर भी सर्विलांस टीम उन्हें ट्रेस नहीं कर पाई। 

-अपहरण के बाद से पुलिस ने हॉस्पिटल के कैमरे चेक करने के साथ ही कर्मचारियों से भी पूछताछ की। लेकिन एक महीने तक हॉस्पिटल के आसपास या स्मार्ट सिटी के कैमरों के फुटेज नहीं खंगाले। 

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-परिजनों का कहना है कि वह बर्रा इंस्पेक्टर के कहने पर ही अपहरणकर्ताओं को फिरौती देने गए थे। आरोप है कि पुलिस ने बिना तैयारी के ही बैग तो फिंकवा दिया लेकिन गुजैनी पुल या आसपास टीम को नहीं लगाया। इतना ही नहीं घटनास्थल की जांच पड़ताल करने के बजाय हाईवे के ऊपर से ही लौट गए। 

संजीत की तलाश में यहां-यहां गई पुलिस टीम
अपहृत संजीत की तलाश में पुलिस टीमें सचेंडी, मेहरबान सिंह का पुरवा, उन्नाव, कानपुर देहात, फतेहपुर, हमीरपुर,  सहित शहर के आसपास के इलाकों में भी गई। अपहरणकर्ताओं ने अलग-अलग दस स्थानों से फिरौती के लिए पिता चमनलाल को फोन किया। टॉवर डॉटा फिल्ट्रेशन की मदद से पुलिस ने इन सभी से आने वाले कॉल्स का ब्यौरा जुटा उससे भी पुलिस को कोई खास सफलता नहीं मिली। 

एसटीएफ, स्वॉट, सर्विलांस टीम के साथ मुखबिर तंत्र भी हुआ फेल  
संजीत अपहरणकांड में पुलिस की हर इकाई फेल नजर आई। चाहे वह एसटीएफ हो स्वॉट,सर्विलांस या फिर मुखबिर तंत्र। अपहरणकर्ताओं ने 29 जून से 13 जुलाई तक परिजनों को कुल 26 बार फोन किया इस दौरान न तो उनकी कॉल ट्रेस की जा सकी और न ही उनकी लोकेशन मिली। हालांकि पुलिस ने अपहरणकर्ताओं के मोबाइल रिचार्ज करने वाले दुकानदार को पकड़कर जरूर अपनी पीठ थपथपा ली लेकिन इससे ज्यादा पुलिस कुछ भी नहीं कर सकी। 

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अपहरण की रिपोर्ट लिखाने को चार दिनों तक दौड़े परिजन 
पिता चमनलाल का कहना है कि 22 जून को उनके बेटे संजीत का अपहरण हुआ था। अगले दिन उन्होंने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। वहीं जब राहुल से बेटी रुचि की शादी तोड़ने पर जब विश्व बैंक कॉलोनी के राहुल के खिलाफ उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने उन्हें चार दिनों तक चौकी थाने के चक्कर लगाए। आखिरकार एसएसपी के आदेश पर उनकी रिपोर्ट तो लिख ली गई लेकिन कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई।

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