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आपको VIDEO में सुना तो लगा मिलना चाहिए, जब प्रेमानंद से मिले संघ प्रमुख मोहन भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद शरण महाराज से मुलाकात की। यहां प्रेमानंद ने भागवत की कई शंकाओं का निवारण किया। भागवत की बातें सुनकर प्रेमानंद हंस भी पड़े।

आपको VIDEO में सुना तो लगा मिलना चाहिए, जब प्रेमानंद से मिले संघ प्रमुख मोहन भागवत
Yogesh Yadavहिन्दुस्तान,मथुराWed, 29 Nov 2023 07:03 PM
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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद शरण महाराज से मुलाकात की। इस दौरान संघ प्रमुख ने राष्ट्र की आगामी स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की तो प्रेमानंद शरण महाराज ने उनको भगवान श्रीकृष्ण पर भरोसा करने और राष्ट्र सेवा को भगवान की सेवा समझकर करने का उपदेश दिया। 
बुधवार को संघ प्रमुख अपने निकट सहयोगियों के साथ राधाकेलि कुंज आश्रम वृंदावन पहुंचे, जहां प्रेमानंद शरण महाराज से मुलाकात में उन्होंने कहा कि आपको वीडियो में सुना तो लगा कि एक बार देख लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाह गई, चिंता गई, मनुआ बेपरवाह, ऐसे लोग कम मिलते हैं। यह सुनकर प्रेमानंद शरण महाराज हंस दिए।

इसके बाद प्रेमानंद शरण महाराज ने कहा कि देखिए, अपने लोगों का जन्म जो भगवान ने दिया है, वह केवल सेवा के लिए है। व्यवहार की सेवा और आध्यात्म की सेवा, ये दोनों सेवाएं अति अनिवार्य हैं। केवल बाहर की सेवा होती रहे, हम अपने भारतवासियों को परम सुखी करना चाहते हैं, तो केवल वस्तु या व्यवस्था से नहीं कर सकते, उनका बौद्धिक स्तर भी सुधरना चाहिए। आज हमारा बौद्धिक स्तर गिरता चला जा रहा है। बहुत चिंता का विषय है।

कहा कि हम सुविधाएं दे देंगे, विविध प्रकार की भोग सामग्री दे देंगे, लेकिन उनके हृदय की जो मलिनता है, अपवित्र बुद्धि है, हिंसात्मक वृत्ति है, हमारा देश धर्म की प्रधानता है। हमारा जो विद्यार्थी है, उन्हीं में कोई एमएलए बनता है, कोई राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री बन जाए, उन्हीं में अपने सब लोग थे। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अपनी शिक्षा केवल आधुनिक रूप लेती जाए और व्यभिचार-व्यसन प्रवृत्ति देखकर बहुत असंतोष होता है। इसलिए शरीर में कितनी भी पीड़ा हो, लेकिन हमारा प्रयास होता है कि जितने भी भगवत स्वरूप आते हैं, उनकी बुद्धि शुद्ध हो। प्रेमानंद ने कहा कि अविनाशी जीव कभी भोग विलास में तृप्त हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि जितने राम कृष्ण हमें प्रिय हैं, वैसे ही देश भी हमें प्रिय है। 

व्यसन, व्यभिचार और हिंसा बढ़ना विपत्तिजनक
प्रेमानंद महाराज ने कहा अब जो परिस्थिति बन रही हैं कि हमारे देश के लिए अच्छी स्थिति नहीं होगी। व्यसन, व्यभिचार और हिंसा का इतना बढ़ता स्वरूप बहुत ही विपत्तिजनक है। यदि ये बढ़ते रहे तो हम अपने देशवासियों को सुविधाएं देने के बाद भी सुखी नहीं कर पाएंगे। क्योंकि सुख का मतलब विचार से होता है। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि उनका उद्देश्य यही है कि देशवासियों का विचार शुद्ध होना चाहिए। राष्ट्रप्रियता, देश सेवा, जन सेवा ये सब स्वाभाविक होने लगेगा। यदि विचार अशुद्ध है तो सुविधाओं का दुरुपयोग होगा। 

व्यभिचारी व्यक्ति गृहस्थी नहीं संभाल सकता, राष्ट्र सेवा क्या करेगा
प्रेमानंद महाराज ने मोहन भागवत से कहा कि हमारे देशवासी आध्यात्म को समझें। बिना आध्यात्म को समझे, सुख-दुख की समता को समझे, परमसुख का अनुभव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि लौकिक सुखों को पूजा सामग्री बनाकर सच्चिदानंद प्रभु को रखा जाए, तो आनंद की उमंग हो जाएगी। मानव देह देव दुर्लभ है। सच्चिदानंद के सुख को भूलते जा रहे हैं। आप अपने धर्म को समझिए, मदिरा, हिंसा, द्युत क्रीड़ा में स्कृली बच्चे भी ब्रह्मचर्य नष्ट करते जा रहे हैं। व्यभिचार प्रवृत्ति में ब्रह्मचर्य नष्ट हो जाए तो अपनी गृहस्थी को भी नहीं पाल सकता, राष्ट्रसेवा क्या करेगा। 

रावण को चरित्रहीन होने के कारण राक्षस कहा
उन्होंने कहा कि इस समय आवश्यकता विचार शुद्ध करने की है, आहार शुद्ध करने की है। हमारे देश में चरित्र की पूजा करने की है। रावण किसी बात में कम नहीं था, आज भी कहीं शिव अभिषेक होता है तो तांडव स्त्रोत रावण का ही गाया जाता है। वो महाबली चरित्र हीन हो गया तो अपने देशवासियों ने राक्षस कह दिया। आज हम चरित्र पर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे चरित्रहीन हो रहे हैं।

हमारा राष्ट्र संकट में पड़ जाएगा, यदि हमारे विचार शुद्ध नहीं हुए, बुद्धि शुद्ध नहीं हुई। चाहे जितना भजन एकांत में कर लो, उसके भजन की सिद्धि समाज सुधार में लगेगी अन्यथा कोई खास बात नहीं। उन्होंने कहा कि व्यसन छोड़ो, व्यभिचार छोड़ो। साथ ही चिंत व्यक्त की कि  हमारे राष्ट्र सेवा में लगे बड़े बुजुर्गों को लोग घर से निकाल रहे हैं।

निराश तो हम होंगे नहीं, चिंता जरूर : भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि नोएडा में भाषण हुआ तो वहां उन्होंने स्व के आधार पर भारत के विकास की यही बातें रखीं। भागवत ने कहा कि आप लोगों से जो सुनते हैं, वही बोलते हैं और करते भी हैं। हम भी कर रहे हैं और आप भी कर रहे हैं, तो ये बातें बढ़ तो रहीं हैं। अब प्रयास यही है कि निराश तो हम होंगे ही नहीं। परंतु क्या होगा इसकी चिंता मन में जरूर आती है। 

हमारे साथ श्री कृष्ण मंगलमय होगा
इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि इसका उत्तर यही है कि क्या सच्चिदानंद त्रिकालदर्शी भगवान श्रीकृष्ण पर भरोसा नहीं करते। हम आध्यात्म बल को जानते हैं, अपने स्वरूप को जानते हैं। तीन प्रकार की लीलाएं हो रही हैं-सृजन, पालन और संहार। जिस प्रकार जैसा आदेश होगा, वैसा ही होगा। जैसा श्रीकृष्ण की आज्ञा होगी, वैसे ही होगा। आपके इन्हीं में से एक तैयार हो जाएगा, जो बहुत जोर का संभालेगा।

हमारे साथ श्रीकृष्ण हैं, अब वही होगा जो परम मंगलमय होगा। किसी तरह का शोक या भय नहीं। जब तक सेवा मिली है, तब तक दहाड़ता रहूंगा। हमारा तिरंगा हमारा राष्ट्र हमारा भगवान है। एक भजनानंदी लाखों का उद्धार कर सकता है। ये राष्ट्र सेवा के लिए प्राण समर्पित, लेकिन योगी होकर, भोगी होकर नहीं। आचरण, संकल्प और वाणी से राष्ट्र और समाज सेवा करनी है।

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