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सैफई मेडिकल यूनिविर्सटी में 250 मरीजों को सस्ते पेसमेकर लगाने के आरोपी हार्ट स्पेशलिस्ट अरेस्ट, जांच में दोषी

यूपी के सैफई मेडिकल यूनिविर्सटी में पेसमेकर लगाने के आरोपी हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. समीर सराफ को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। शिकायत के पौने दो साल तक चली जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की गई

सैफई मेडिकल यूनिविर्सटी में 250 मरीजों को सस्ते पेसमेकर लगाने के आरोपी हार्ट स्पेशलिस्ट अरेस्ट, जांच में दोषी
Deep Pandeyहिन्दुस्तान,इटावाFri, 10 Nov 2023 06:52 AM
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सैफई मेडिकल यूनिविर्सटी में मरीजों से ज्यादा पैसे लेकर सस्ते पेसमेकर लगाने के आरोपी हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. समीर सराफ को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। शिकायत के पौने दो साल तक चली जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की गई। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट में पेश करने के लिए पुलिस डॉक्टर को लखनऊ ले गई। 2017 से 2021 के बीच मेडिकल यूनिवर्सिटी में दिल के एक हजार से अधिक मरीज आए। इनमें से 250 मरीजों को पेसमेकर लगाए गए। पेसमेकर लगाने की सलाह ललितपुर के रहने वाले डॉ. समीर ने दी और खुद ही लगाए भी।

इसे लगवाने वाले कई मरीजों को दिक्कतें हुईं तो दूसरी जगह जांच कराई। रोगियों ने शिकायत की तो कुलपति डॉ. राजकुमार ने जांच कराई। प्रारंभिक पड़ताल में पता चला कि जिस क्वालिटी के पेसमेकर का पैसा चार्ज किया गया था वह न लगाकर सस्ते लगाए गए। एक फर्म से साठगांठ कर कम दामों पर खरीदे गए। मामला सही पाए जाने पर कुलपति ने तत्कालीन सीएमएस डॉ. आदेश को रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। जांच अधिकारी सीओ सैफई के निर्देश के बाद पुलिस ने डॉ. समीर को गिरफ्तार कर लिया।

मेडिकल यूनिवर्सिटी सैफई के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ.समीर सराफ को घटिया पेसमेकर लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कमेटी की रिपोर्ट में समीर के सहयोगियों का भी जिक्र है। हालांकि सहयोगी कौन-कौन है और अब तक उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुयी, ये एक सवाल बना हुआ है। डॉ. समीर सराफ घटिया पेसमेकर लगाने का काम कई साल से काम कर रहे थे। इसका मामला तब खुला जब अस्पताल में चिकित्सीय सामग्री होने के बाद एक करोड़ की खरीद का प्रस्ताव भेजा गया। इसकी जांच शुरू हुयी तभी मरीजों से अधिक पैसे लेकर कम पैसे वाला पेसमेकर लगाने की शिकायत आ गई। यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति डॉ. प्रभात कुमार ने दोनों मामले सामने आने के बाद कमेटी बनाकर जांच शुरू करायी। पांच सदस्यीय कमेटी तब के सीएमएस डॉ आदेश कुमार की अध्यक्षता में बनाई।

कमेटी ने जांच रिपोर्ट दी तो कुलपति ने कुलसचिव को रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा लेकिन टालमटोल की जाती रही। बाद में कमेटी के चेयरमेन रहे डॉ. आदेश को ही निर्देश दिए गए कि एफआईआर दर्ज कराएं। इसके बाद कार्रवाई तेज हुई। कमेटी की रिपोर्ट में डॉ. समीर सराफ के सहयोगियों का भी जिक्र है लेकिन सहयोगी कौन कौन हैं और आखिर अब तक उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, ये एक सवाल बना हुआ है।

बता दें कि जांच कमेटी को पता चला था कि मरीजों से पैसे एमआरआई पेसमेकर के लिये गये और मरीजों को लगा दिये नान एमआरआई पेसमेकर। इससे मरीजों को दिक्कतें शुरू हुईं तब मरीजों ने दिल्ली कानपुर में दूसरे डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने पेसमेकर का स्तर खराब होने की बात कही। मरीजों को बुलाकर बयान भी लिए गये। जांच के दौरान जिस कंपनी के पेसमेकर लगाये गये थे उस कंपनी के अधिकारियों ने भी स्पष्ट कर दिया कि स्टीकर भले ही उनकी कंपनी का लगा हो लेकिन ये पेसमेकर उनकी कंपनी का नहीं है। डॉ.समीर सराफ ने अपने परिवार के साथ विदेश यात्राएं कीं। बिना विभाग को जानकारी दिये और अनुमति लिये विदेश यात्राएं किए जाने की पुष्टि भी जांच में हुई।
 

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