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Hindi News उत्तर प्रदेशआखिर किस बात है डर? क्यों इस सीट पर एक ही पिच पर बैटिंग कर रहे सपा-कांग्रेस और बीजेपी

आखिर किस बात है डर? क्यों इस सीट पर एक ही पिच पर बैटिंग कर रहे सपा-कांग्रेस और बीजेपी

इमरान मसूद 9 बार के सांसद रशीद मसूद के भतीजे हैं, जो 5 बार लोकसभा और 4 बार राज्यसभा के सदस्य रहे। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में हिंदुओं का भी समर्थन हासिल किया।

आखिर किस बात है डर? क्यों इस सीट पर एक ही पिच पर बैटिंग कर रहे सपा-कांग्रेस और बीजेपी
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 12 Apr 2024 09:48 AM
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर लोकसभा सीट पर चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। यहां समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन और भाजपा दोनों के प्रत्याशी मतदाताओं के ध्रुवीकरण से डरे हुए हैं। मालूम हो कि कांग्रेस-सपा गठबंधन ने सहारनपुर से इमरान मसूद को टिकट दिया है। इन दिनों वह मुख्य रूप से हिंदू बहुल गांवों पर फोकस कर रहे हैं और प्रचार अभियान चला रहे हैं। इमरान मसूद 9 बार के सांसद रशीद मसूद के भतीजे हैं, जो 5 बार लोकसभा और 4 बार राज्यसभा के सदस्य रहे। कहा जाता है कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में हिंदुओं का भी समर्थन हासिल किया। रशीद मसूद की राजनीतिक सफलता के पीछे इसे ही बड़ी वजह मानी जाती है। मौजूदा चुनाव को देखें तो यहां सपा-कांग्रेस गठबंधन और भाजपा एक ही पिच पर बैटिंग करते नजर आ रहे हैं। 

इमरान मसूद अब अपने चाचा की लीक पर चलने की कोशिश करते दिख रहे हैं। वह गैर-मुसलमानों के बीच पुराने समर्थन आधार को सामने लाने में लगे हुए हैं। इमरान खेमा फिलहाल बड़ी रैलियां या सार्वजनिक बैठकें आयोजित करने से बच रहा है। एक समर्थक ने इसकी वजह बताई। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक रैलियों या सार्वजनिक बैठकों में मुसलमानों को बड़ी संख्या में आकर्षित करने से दूसरे समुदायों में ध्रुवीकरण का डर है। इसलिए चुनाव प्रचार के दौरान संतुलन बनाया गया है।' कांग्रेस-सपा गठबंधन का पूरा प्रयास है कि सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या हिंदुओं को समर्थन हासिल किया जाए। 

बसपा ने माजिद अली को दिया टिकट, भाजपा को फायदा?
अगर भाजपा की बात करें तो उसने सहारनपुर से राघव लखनपाल शर्मा को मैदान में उतारा है, जो 2019 में यहां से हार गए थे। मगर, भगवा दल को इस बार जीत की उम्मीद है। दरअसल, बसपा ने माजिद अली को यहां से टिकट दिया है। ऐसे में मसूद के पक्ष में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना कम दिख रही है। एक भाजपा समर्थक ने कहा, 'अगर बसपा उम्मीदवार या सपा-कांग्रेस उम्मीदवार को ढाई लाख से अधिक वोट मिले तो शर्मा आसानी से जीत जाएंगे।' 2019 की हार से शर्मा कुछ सबक लेते भी दिखे हैं। वह इस बार ओबीसी वोटों को मजबूत करने की रणनीति पर जोर दे रहे हैं और भाजपा आलाकमान का भी इसी पर फोकस है। बीजेपी के प्रमुख चेहरे सैनी, कश्यप और गुर्जर समुदायों के मतदाताओं को लुभाने के लिए सहारनपुर में डेरा डाले हुए हैं। वे हर दिन अनुसूचित जाति मतदाताओं के प्रभुत्व वाले 6-7 गांवों का दौरा कर रहे हैं। ऐसे में सहारनपुर में इस बार कांटे की टक्कर होती दिख रही है।