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देवरिया में निर्णायक होगी दलित मतदाताओं की भूमिका, दावों-प्रतिदावों के बीच दिलचस्‍प हुआ संघर्ष 

यह देवरिया के रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र में आने वाला डुमरी चौराहा है। दोपहर के 3 बजे हैं। बालू शाही, पकौड़ी और चाय के लिए मशहूर चौराहे की एक पुरानी दुकान पर चुनावी चर्चा दिलचस्प मोड़ पर है।

देवरिया में निर्णायक होगी दलित मतदाताओं की भूमिका, दावों-प्रतिदावों के बीच दिलचस्‍प हुआ संघर्ष 
Ajay Singhराजीव ओझा ,देवरियाTue, 28 May 2024 04:11 PM
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Lok Sabha Election 2024: यह देवरिया के रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र में आने वाला डुमरी चौराहा है। दोपहर के तीन बजे हैं। बालू शाही, पकौड़ी और चाय के लिए मशहूर चौराहे की एक पुरानी दुकान पर चुनावी चर्चा दिलचस्प मोड़ पर है। डुमरी गांव के ही नईम, जमशेद व बृजेश यादव इस बार भाजपा को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिलने का दावा करते हैं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा से लौटे राम बालक मौर्य, मनमोहन तिवारी और संदीप बघेल भाजपा की एकतरफा जीत को लेकर आश्वस्त हैं। इन दावों-प्रतिदावों के बीच दुकान के सामने भाजपा का प्रचार वाहन आकर खड़ा हो जाता है तो लाभार्थियों की भूमिका भी बातचीत का मुद्दा बन जाती है। फिर दोनों पक्ष दलित मतदाताओं का समर्थन अपने साथ होने का दावा ठोंकते हुए दलित मतदाताओं की निर्णायक भूमिका को स्वीकार करते हैं, क्योंकि बाकी जातियां पहले से गोलबंद हैं।

नया चेहरा उतारकर हैट्रिक बनाने की कोशिश
यहां चुनाव में कुल सात उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई के माहौल में बसपा भी अपनी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा में है। भाजपा ने पूर्व सांसद एवं अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के पुत्र शशांक मणि त्रिपाठी को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह को प्रत्याशी बनाया है। बसपा के टिकट पर पूर्व विधायक आनंद यादव के पुत्र और ग्राम प्रधान रहे संदेश यादव चुनाव मैदान में हैं। यह दूसरा मौका है, जब भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद को टिकट नहीं दिया। वर्ष 2019 में पार्टी ने अपने तत्कालीन सांसद कलराज मिश्र का टिकट काटकर डॉ. रमापति राम त्रिपाठी को टिकट दिया था। इस बार डॉ. रमापति राम त्रिपाठी का भी टिकट काटकर एक नए चेहरे के सहारे अपनी जीत की हैट्रिक बनाने की कोशिश में है।

सहयोगी दलों की अहम भूमिका 
प्रख्यात देवरहा बाबा की साधना स्थली और स्वतंत्रता सेनानी बाबा राघव दास की कर्मस्थली रहे देवरिया जिले में चुनावी तापमान बढ़ने के साथ ही गोलबंदी तेज हो गई है। भाजपा को अपने तीन प्रमुख सहयोगी दलों अपना दल (एस), सुभासपा व निषाद पार्टी का सहारा है तो कांग्रेस को अपने प्रमुख सहयोगी दल सपा की ताकत का भरोसा है। भाजपा के समर्थक चुनाव प्रचार में अनुप्रिया पटेल, ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद का नाम प्रमुखता से लेते हैं। भाजपा की बड़ी ताकत यह भी है कि देवरिया क्षेत्र में आने वाली पांचों विधानसभा सीटों पर उसका कब्जा है। सिरसिया नंबर एक महादेवा टोला निवासी कृष्णानंद मिश्रा कहते हैं, ‘देवरिया में भाजपा का वोट ज्यादा है। पिछले दो लोकसभा चुनावों में उसके प्रत्याशियों के जीत के अंतर से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। बावजूद जो चुनाव पहले एकतरफा लग रहा था, वह अब संघर्ष में जाता दिख रहा है। कांग्रेस व सपा दोनों मिलकर दलितों को रिझाने में लगे हैं।’

प्रत्याशियों की प्रशंसा और दावों पर संदेह 
देवरिया के गौरी बाजार इलाके में भाजपा व कांग्रेस के प्रत्याशियों की पहले प्रशंसा होती है। बाजार के एक दुकानदार रामजी गुप्ता कहते हैं कि अखिलेश प्रताप सिंह टीवी पर ‘डिबेट’ में दिखते हैं तो शशांक मणि त्रिपाठी आईआईटी से पढ़े हैं और अपनी संस्था के जरिए जिले में युवाओं व महिलाओं के बीच उद्यमिता विकास का कार्य करते रहे हैं। बैतालपुर के राम निहोर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी पर तो भरोसा है, पर उन्हें राहुल गांधी की गारंटी पर संदेह है। वह कहते हैं कि हर महीने पांच की जगह 10 किलो राशन और सभी गरीब महिलाओं को बैंक खाते में हर महीने 8500 रुपये कैसे दे पाएंगे?

जिले के सियासी तापमान पर नजर रखने वाले दलित मतदाताओं के ‘मूवमेंट’ पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि बसपा अपने वोट बैंक को सहेज नहीं पा रही है। इसके विपरीत वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अरुणेश नीरन का मानना है कि इस लोकसभा चुनाव में सामान्य जन और विशिष्ट जन एक ही दिशा में मुड़ रहे हैं। इस बार भी पिछले दोनों चुनावों की तरह ही मतदान की परंपरा कायम रहेगी।

देवरिया की विशेषता
देवरहा बाबा ने यहां वर्षों तक साधना की और उनके आकर्षण में प्रधानमंत्री से लेकर बड़े-बड़े राजनेता तक आते रहे। जिले में 14 अगस्त 1942 को महज 13 वर्ष के छात्र रामचंद्र ने ब्रिटिश कलेक्ट्रेट पर तिरंगा फहरा दिया था और ब्रिटिश शासन की गोली सीने पर खाकर चार दोस्तों के साथ शहीद हो गया था। शहीद रामचंद्र विद्यार्थी स्मारक एक प्रेरणास्थल के तौर पर यहां मौजूद है। धान की शानदार इंद्रासन प्रजाति देने वाले स्व. इंद्रासन सिंह भी देवरिया के ही थे।

चुनावी मुद्दे
- जिले की तीन चीनी मिलों को चालू कराना
-बाढ़ से स्थाई निजात और रिंग रोड का निर्माण
- जाम से निजात के लिए शहर से रेलवे मालगोदाम की शिफ्टिंग
-  राज्य विश्वविद्यालय और इंजीनियिरंग कॉलेज की स्थापना
- नए जिला अस्पताल का निर्माण

विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा

देवरिया में पांच विधानसभा सीटें आती हैं।
- देवरिया सदर
- रामपुर कारखाना
- पथरदेवा
- फाजिलनगर
-तमकुहीराज

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