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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशयूपी में ATS की छापेमारी, 19 साल से भारतीय बनकर रह रहा म्यांमार का रोहिंग्या अजीजुल्लाह गिरफ्तार

यूपी में ATS की छापेमारी, 19 साल से भारतीय बनकर रह रहा म्यांमार का रोहिंग्या अजीजुल्लाह गिरफ्तार

प्रमुख संवाददाता,लखनऊDinesh Rathour
Wed, 06 Jan 2021 09:21 PM
यूपी में ATS की छापेमारी, 19 साल से भारतीय बनकर रह रहा म्यांमार का रोहिंग्या अजीजुल्लाह गिरफ्तार

प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे प्रदेश में रह रहे म्यांमार निवासी रोहिंग्या को गिरफ्तार किया है। वह संतकबीनगर जिले के बखिरा थाना क्षेत्र में रह रहा था। फर्जी दस्तावेजों के सहारे उसने दो भारतीय पासपोर्ट बनवा रखे हैं। इनके सहारे वह सऊदी अरब व बांग्लादेश की यात्रा भी कर चुका है। उसके बैंक खातों में भी संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। इससे उसके टेरर फंडिंग नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है। उसके सहयोगियों की तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी चल रही है। जानकारी जुटाने के लिए मुंबई, गोरखपुर, वाराणसी, दिल्ली और बंगलुरु समेत अन्य प्रांतों से भी संपर्क किया गया है। 

एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय में बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि गिरफ्तार रोहिंग्या अजीजुल हक पुत्र मो. शरीफ ने संतकबीनगर जिले में आकर अजीजुल्लाह पुत्र बदरे आलम के नाम से दस्तावेज बनवा लिए। बदरे आलम संत कबीनगर जिले के बखिरा थाना क्षेत्र स्थित नौरो गांव का रहने वाला है। अजीजुल हक वास्तव में म्यांमार के अक्याब रखाइन जिले बुतिडंग थाना क्षेत्र स्थित नयाफारा का रहने वाला है। उसके कब्जे से दो भारतीय पासपोर्ट, तीन आधार कार्ड (एक स्वयं का और दो अन्य के), एक पैन कार्ड, तीन डेबिट कार्ड, पांच बैंक पासबुक और एक म्यांमार का राशन कार्ड मिला है। अजीजुलहक के विरुद्ध एटीएस के लखनऊ थाने में आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468 व 471 के अलावा 14 विदेशी अधिनियम तथा 12 पासपोर्ट अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उसे कोर्ट में पेश करके पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि भारत में इसके अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी मिल सके। 

वर्ष 2017 में मां, बहन व भाई को भी ले आया भारत 
एडीजी ने बताया कि अजीजुलहक के सहयोगियों की तलाश में कई जिलों में एटीएस की टीमें दबिश दे रही हैं। कुछ संदिग्धों से पूछताछ भी चल रही है। इसके अलावा अन्य प्रांतों से भी जांच पड़ताल की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि अजीजुलहक वर्ष 2001 में बांग्लादेश के रास्ते भारत में आया था। वर्ष 2017 में उसने वह अपनी मां, बहन तथा दो भाइयों को भी अवैध रूप से भारत ले आया। उनके भी फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हैं। यह भी पता चला है कि अजीजुलहक के बैंक खातों में विभिन्न व्यक्तियों, फर्मों और विदेशों से भी काफी मात्रा में पैसा आया है। इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। प्रेस कांफ्रेंस में एटीएस के आईजी डॉ. जीके गोस्वामी भी मौजूद रहे। 

बदरे आलम ने अपने राशन कार्ड में जुड़वा दिया था नाम 
संतकबीरनगर जिले के नौरो गांव निवासी बदरे आलम ने एटीएस के सामने अपनी गलती मानी। उसने कहा कि अजीजुलहक मेरा बेटा नहीं है और न ही मेरा रिश्तेदार है। वह मुबंई में मेरे बेटे इनायत उल्ला से मिला था। अजीजुलहक ने खुद को अनाथ बताया था, जिस पर मुझे दया आ गई और मैं उसे अपने घर ले आया। बदरे आलम ने यह भी बताया कि मैंने ही अजीजुलहक का अजीजुल्लाह के नाम से राशन कार्ड में नाम दर्ज करवा दिया, जिसके आधार पर बाद में उसने भारतीय पासपोर्ट और अन्य कागजात बनवा लिए। वर्ष 2017 से उसकी मां आबिता खातून, बहन फातिमा खातून तथा दो भाई जिया उल हक और मो. नूर भी आ गए। उसका भाई जिया उल हक नासिक में रहता है, जबकि बहनोई नूर आलम और भाई मो. नूर खलीलाबाद आने के बाद से कहीं चले गए। 

 

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