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22 नवंबर, 2020|2:58|IST

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खुलासा : कानपुर में विकास दुबे चलाता था चौबेपुर थाना, पुलिस करती थी ‘पार्टी’

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कानपुर में चौबेपुर थाने के ज्यादातर दरोगा-सिपाही पार्टियां करते रहते थे, बदले में थाना विकास दुबे चलाता था। पुलिस के लिए मटन-चिकन और शराब के इंतजाम के लिए विकास ने बाकायदा मैंनेजर नियुक्त कर रखे थे। वही पुलिसवालों की पसंद के मुताबिक तैयारी और व्यवस्था करते थे। बदले में विकास दुबे थाने में बैठ कर इलाके के मामले निपटाता था। वहीं तय करता था कौन सी तहरीर दर्ज होगी। किस तहरीर की भाषा बदली जाएगी। कौन सी तहरीर फाड़ कर डस्टबिन में डाली जानी है। यह खुलासा एसआईटी की जांच रिपोर्ट में हुआ है। 

एसआईटी रिपोर्ट में दोषी पाए गए पुलिसवालों में ज्ययादातर कभी न कभी चौबेपुर में तैनात रहे हैं। विकास गैंग के ढेर होने के बाद ऐसे पुलिस वालों के कारनामे अब चर्चा में हैं। ऐसे ही एक दरोगा की विकास से गजब की यारी थी। यह दरोगा पहले चौबेपुर में ही हेड मुर्हिरर था। जब दरोगा बना तब दो माह के लिए ट्रांसफर हुआ, मगर फिर अपना ट्रांसफर चौबेपुर करा लिया। उसके बाद वह एक साल तक बिकरू हल्का इंचार्ज रहा। वह विकास दुबे के मैनेजर की तरह काम करता रहा। उसके लिए होली-दीवाली के कपड़े तक विकास खरीदता था। सूत्रों के मुताबिक 2 जुलाई की रात जब बिकरूकांड हुआ, यह दरोगा भी दबिश टीम में शामिल था। मगर जैसे ही गोलियां चलनी शुरू हुईं, वह निकल भागा।

इलाके के इंचार्ज पर खास मेहरबानी
बिकरू इलाके के हल्का इंचार्जों पर विकास दुबे की खास मेहरबानी रहती थी। घटना के समय यहां हल्का इंचार्ज केके शर्मा था। जो वर्तमान में जेल में बंद है। उससे पहले दूसरा दरोगा इस इलाके का इंचार्ज था। दोनों ही मटन के शौकीन थे। विकास को करीब से जानने वाले सूत्रों के मुताबिक ऐसे पुलिसवालों के लिए विकास दुबे ने अपने गुर्गे रार्म ंसह को व्यवस्था सौंप रखी थी। शराब का मैनेजर अमर दुबे था। शिवली के शराब ठेकों से उसे भरपूर सप्लाई मिलती थी। यह दुकानें भी विकास के रसूख से ही तृप्त रहती थीं। उन्हें शराब के बदले रुपए नहीं दिए जाते थे।

होली-दिवाली पर दो लोडर शराब
होली दिवाली पर विकास दुबे के गांव में दो लोडर देशी और एक लोडर अंग्रेजी शराब आती थी। बिकरू, भीटी, कंजती, बाचीपुर, देवकली, कांशीराम निवादा, डिब्बा निवादा, सुज्जा निवादा, मदारीपुरवा, जोगिन डेरा आदि गांवों के लफंगों को यह विकास का तोहफा था। अंग्रेजी शराब ज्यादातर पुलिस वाले और कुछ खास गैंग सदस्य पीते थे। विकास के गुर्गों की तरह काम करने वाले पुलिसवालों को होली-दिवाली पर बड़े तोहफे दिए जाते थे। यह काम विकास खुद मैनेज करता था।

सिपाहियों पर भी खास मेहरबान
बीट सिपाहियों की जरूरतों का ख्याल रखने का जिम्मा विकास ने लकड़ी और खनन के धंधेबाजों को सौंप रखा था। विकास के खिलाफ गुमनाम रहकर शिकायतें करने वाले एक सूत्र ने बताया कि यह सूचना उसने कई बार अफसरों तक पहुंचाई पर कुछ न हुआ। बिकरू बीट के ज्यादातर सिपाही लकड़ी ठेकेदारों के जरिए विकास से बख्शीशें लेते रहे। यह भुगतान करने जिम्मा विकास ने इलाके के खनन ठेकेदारों को सौंप रखा था।

थाने में लगती थी सभा
एसआईटी की जांच में चौबेपुर थाने के तीन पूर्व थानेदार दोषी पाए गए हैं। यह तीनों 2003 से लेकर 2007 के बीच में थानेदार रहे हैं। यह तीनों कुख्यात बदमाश विकास दुबे के इसक कदर भक्त थे कि जब तक यह थाने में रहे, विकास वहीं बैठकर पंचायत करता था। वहीं पर लोगों को बुलाकर उसी के अनुसार पुलिस कार्रवाई करती थी। 

फर्जी आईडी पर सिम लेने में फंसा विकास का करीबी
बिकरू कांड में एसआईटी ने विकास के एक और करीबी पर एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की। जिसके बाद नवाबगंज थाने में उसके खिलाफ फर्जी आईडी पर सिम इस्तेमाल करने की एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस  के मुताबिक आरोपित को बिकरू कांड में शामिल नहीं किया जाएगा।
एसआईटी की सिफारिश पर नवाबगंज इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी ने एमआईजी सूर्य विहार ख्यौरा नवाबगंज निवासी राजू बाजपेई के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा में एफआईआर दर्ज कराई है। इस मामले में एसआईटी ने जांच के दौरान आरोपितों की कॉल डीटेल रिपोर्ट देखी तो उसमें राजू बाजपेई का मोबाइल नम्बर संदिग्ध मिला। बिकरू कांड के पहले और बाद में विकास गैंग ने इस नम्बर पर बात की थी। एसपी ग्रामीण बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि उसी के आधार पर एसआईटी ने एफआईआर की सिफारिश की है। एसपी का कहना था कि राजू बाजपेई का बिकरू कांड से फिलहाल कोई लेना देना नहीं निकल रहा है। इस कारण उसे उस मामले में आरोपित नहीं बनाया जाएगा। जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसी पर जांच की जाएगी। एसपी पश्चिमी डा. अनिल कुमार ने बताया कि जो प्रपत्र सिम लेने में लगे हैं वह किसी दीपक बाजपेई की आईडी पर है।  

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  • Web Title:Revealed kanpur chaubeypur Police daroga sipahi organised party Vikas Dubey run police station