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रिसर्च में खुलासा, कानपुर में हर दो साल में कहर ढा रहा डेंगू

प्रमुख संवाददाता, कानपुरPublished By: Shivendra Singh
Thu, 16 Sep 2021 09:56 PM
रिसर्च में खुलासा, कानपुर में हर दो साल में कहर ढा रहा डेंगू

स्वास्थ्य विभाग भले ही डेंगू संक्रमण की बढ़ रही रफ्तार पर पर्दा डाल रहा है लेकिन कानपुर में हर दो साल के बाद डेंगू कहर बरपाता है। डेंगू का कहर इतना भयावह होता है कि मरीज जबतक समझ पाता है, तब तक प्लेटलेट्स में भारी गिरावट के चलते मौत की दहलीज पर पहुंच जाता है। कानपुर में हर दो साल के अंतराल पर डेंगू का कहर होता है। साथ ही कानपुर में डेंगू के डेनवी -1 से 4 तक के स्ट्रेन ही म्यूटेट कर इंसानी जिन्दगी के आफत बनते हैं। 

यह खुलासा जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की रिसर्च में हुआ है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने प्रो.विकास मिश्र की देखरेख में पांच साल तक डेंगू के 10183 पॉजिटिव मरीजों और उनके साइकिल पर अध्ययन किया। स्डटी में डेंगू केसों को सांख्यिकीय आधार पर भी आकलन किया गया। 

बारिश में बूम पर होता 
स्टडी के परिणामों के अनुसार, कानपुर में डेंगू वायरस का वाहक एडीज मच्छर का एजिपटाई और एल्बोपिक्टस है। डेंगू को मौसमी बदलाव से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। डेंगू हर बार बारिश के मौसम में फैलता है। सितम्बर और अक्तूबर में डेंगू पीक पर होता है लेकिन दिसम्बर तक कहर जारी रखता है। कानपुर में डेंगू का प्रकोप मलेशिया की तर्ज पर फैलता है क्योंकि जीएसवीएम और मलेशिया की स्टडी के रिजल्ट एक जैसे मिले हैं।

कानपुर में 4 स्ट्रेन 
स्टडी की मानें तो कानपुर में डेंगू के चार स्ट्रेन ही हर बार म्यूटेट होकर प्रभावी होते हैं। इनमें फ्लाविवीरडी फैमिली वायरस के डेनवी-1 से 4 स्ट्रेन हमला करते हैं। 

इसलिए मौतें 
स्टडी के परिणामों के अनुसार, कानपुर में कहर वाले साल में डेंगू मरीजों में आर्गन फेल्योर, प्लाज्मा लीकेज के साथ रक्तस्राव के कारण हालत बिगड़ती है। 

डब्ल्यू एचओ की रिपोर्ट 
स्टडी में विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि 128 देशों में ही डेंगू फैल रहा है। इसमें 70 फीसदी एशिया के देशों में डेंगू फैलता है। 

कोरोना काल के चलते अब शोध इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिसर्च में प्रकाशित किया गया है। इस रिसर्च ने कानपुर को एक गाइड का रोल दिया है। दो साल के अंतराल में पहले से ही डेंगू के प्रकोप की आशंका में तैयारी कर ली जाए तो इसके कहर को रोका जा सकता है। साथ ही लोगों को भी जागरूक होकर आगे आना होगा। जनता को मच्छरों की ब्रीडिंग पर वार करना होगा। विभाग की लैब में आए पॉजिटिव केसों के आधार पर डॉटा बेस स्टडी को अंजाम दिया गया। - डॉ.विकास मिश्र, प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

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