DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

घर खरीदारों पर यूपी सरकार की कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, लोगों की राहत के लिए बताए कई विकल्प

Home buyers (Demo Pic)

नोएडा, ग्रेडर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे की परियोजनाओं में फंसे हुए घर खरीदारों को लेकर बनाई गई उत्तर प्रदेश सरकार की कमेटी ने अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप दी हैं। हाई लेवल कमेटी में शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ सभी संबंधित प्राधिकरण के सीईओ और तमाम बैंक के अधिकारी भी शामिल हैं। ये कमेटी शहरी विकास मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में बनी थी।

कमेटी ने अपनी सिफारिशों में इन परियोजनाओं में फंसे लोगों को राहत देने के लिए कई विकल्प बताए हैं। सबसे पहले कमेटी ने सिफारिश की है कि रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक, फंसी परियोजना में अतिरिक्त फंड जारी नहीं करते हैं। रिजर्व बैंक की इन गाइडलाइन में बदलाव किया जाए ताकि ऐसी परियोजनाओं को मुश्किल से निकाल जा सके। इसके अलावा कमेटी ने प्रोजेक्ट सेटेलमेंट पॉलिसी लागू करने की भी सिफारिश की है। इस पॉलिसी के तहत कहा गया है कि जो परियोजनाएं अदालतों में लंबित हो या फिर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के ऑर्डर की वजह से अटकी हों, ऐसी परियोजना की उस अवधि का ब्याज माफ किया जाए।

कमेटी ने कहा कि अगर परियोजना की 30 फीसदी से ज्यादा जमीन ऐसे मामलों में फंस जाए तो उस पर 100 फीसदी ब्याज माफ किया जाए, लेकिन ये छूट सशर्त मिले। अगर बिल्डर इस स्कीम का फायदा लेना चाहता है तो उसे 3 साल के भीतर परियोजना पूरी करनी होगी। परियोजना पूरी न होने की शर्त में ये छूट वापस लेने का प्रावधान हो।

रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी बनाने की सिफारिश
कमेटी अपनी सिफारिशों में ये भी कहा है कि उत्तर प्रदेश के आकार और फंसे प्रोजेक्ट की संख्या को देखते हुए नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लिए एक अलग रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी बनाई जाए। इससे आसपास के इलाकों के लोगों को फायदा होगा। इसके अलावा इन कमेटी ने सरकारी रियल एस्टेट क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी को इन इलाकों में फंसे हुए प्रोजेक्ट का सर्वे करने को भी कहा है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Report submitted by the UP government committee on home buyers many options for people relief