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दिल्ली में किसानों के संघर्ष पर बोलीं मायावती, BSP की बात केन्द्र मानता तो यह नौबत नहीं आती 

लखनऊ। विशेष संवाददाताPublished By: Dinesh Rathour
Tue, 26 Jan 2021 07:08 PM
दिल्ली में किसानों के संघर्ष पर बोलीं मायावती, BSP की बात केन्द्र मानता तो यह नौबत नहीं आती 

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा है कि राजनीति से परे रहते हुए पूर्ण रूप से देशहित में रखी गई कृषि कानूनों को वापस लेने की बीएसपी की बात केन्द्र सरकार अगर मान लेती तो गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड और पुलिस से किसानों के संघर्ष की जो एक नई परम्परा की शुरुआत हो गई है उसकी नौबत ही नहीं आती। यह किसानों के प्रति भी सरकार की असंवेदनशीलता नहीं तो और क्या है? मायावती ने कहा कि देश में करोड़ों गरीब, मजदूर व अन्य मेहनतकश समाज के लोग असंगठित तौर पर बदहाल जीवन जीने को मजबूर हैं किन्तु देश का किसान समाज सरकारी तंत्र के माध्यम से अब और ज्यादा बदहाल जीवन जीने को कतई तैयार नहीं लगता है और इसी लिए आज गणतंत्र दिवस पर ’ट्रैक्टर परेड’ कर रहा है।

मंगलवार को जारी अपने बयान में मायावती ने कहा कि सरकार गणतंत्र दिवस अवश्य मनाएं लेकिन ’गण’ की भी सही चिन्ता जरूर करे तभी देश की गणतंत्र का आपेक्षित मान-सम्मान बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस को रसम अदाएगी के तौर पर मनाने के बजाए देश की आमजनता में से खासकर करोड़ों गरीबों, कमजोर तबकों, मजदूरों, किसानों, छोटे व्यापारियों व अन्य मेहनतकश लोगों ने पिछले वर्षों में वास्तव में अपने जीवन में क्या पाया व क्या खोया इसके आकलन व समीक्षा करने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।

क्योंकि देश इन्हीं लोगों से बनता है व इनके बेहतर जीवन से फिर सजता व संवरता है। देश की जनता ने लाचार, मजबूर व भूखे रहकर भी देश के लिए हमेशा कमरतोड़ मेहनत की है फिर भी उनका जीवन सुख-समृद्धि से रिक्त है जबकि देश की सारी पूंजी कुछ मुट्ठीभर पूंजीपतियों व धन्नासेठों की तिजोरी में ही लगातार सिमट कर रह गई है, जो ईष्र्या की बात नहीं है परन्तु एक प्रकार से गलत व अनुचित मानी जाने वाली बात जरूर होनी चाहिए।

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