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दादी यहां, पोता वहां; कांग्रेस और भाजपा में बंटा नौ लोकसभा चुनाव जीत चुका रामपुर नवाब का परिवार

रामपुर लोकसभा सीट से अब तक के 17 चुनाव में 9 बार जीत दर्ज करने वाले नवाब के परिवार में दादी बेगम नूर बानो कांग्रेस के साथ टिकी हैं तो पोता हैदर अली खान अपना दल होते हुए भाजपा में पहुंच गए हैं।

दादी यहां, पोता वहां; कांग्रेस और भाजपा में बंटा नौ लोकसभा चुनाव जीत चुका रामपुर नवाब का परिवार
Ritesh Vermaभाषा,रामपुर, मुहम्मद मजहर सलीमThu, 18 Apr 2024 02:48 PM
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रामपुर की सियासत का पर्याय रहा नवाब खानदान इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच बंट गया है। अब तक के 17 लोकसभा चुनावों में रामपुर को नौ बार सांसद देने वाले नवाब का परिवार 25 साल से लोकसभा का मुंह देखने के लिए तरस रहा है। वो 9 सांसद भी पहले 13 चुनाव में ही जीते थे। नवाब की बेगम नूर बानो अंतिम बार इस सीट को 1999 में जीती थीं। उनके बेटे नवाब काजिम अली खान 2012 का विधानसभा आखिरी बार जीते। उसके बाद से जब भी लड़े, हार रहे हैं। काजिम के बेटे हैदर अली खान ने 2022 में एनडीए कैंडिडेट बनकर लड़ा लेकिन वो भी हार गए। राजनीति में प्रासंगिक बने रहने को संघर्ष कर रहे नवाब के परिवार में दादी अब कांग्रेस के साथ हैं तो पोता भाजपा के साथ। बेटे ने चुप्पी साध ली है।

रामपुर नवाब खानदान का सियासत में वर्चस्व 1957 के लोकसभा चुनाव में परिवार के दामाद एस. अहमद मेहंदी की जीत के साथ शुरू हुआ। रामपुर खानदान के नवाब, स्वार सीट से कई बार विधायक और मंत्री रहे नवाब काजिम अली ने बताया कि मेहंदी लखनऊ के पास पीरपुर तालुके के राजा थे। वह उनकी सगी फूफी के शौहर थे। वर्ष 1962 में वह लगातार दूसरी बार रामपुर से कांग्रेस के सांसद चुने गए थे। उसके बाद नवाब काजिम अली के पिता जुल्फिकार अली खां 1967, 1971, 1980, 1984 और 1989 के लोकसभा चुनाव में रामपुर से कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए। फिर उनकी पत्नी बेगम नूर बानो 1996 और 1999 में रामपुर से कांग्रेस की सांसद रहीं। कुल मिलाकर 17 लोकसभा चुनाव में नौ बार रामपुर सीट पर नवाब खानदान जीता।

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लंबे अरसे तक रामपुर की सियासत में दबदबा रखने वाला नवाब खानदान हमेशा कांग्रेस के साथ रहा लेकिन इस बार परिवार अलग-अलग पार्टियों के साथ बंट गया है। पूर्व सांसद बेगम नूर बानो कांग्रेस-सपा गठबंधन के उम्मीदवार मोहिबुल्लाह नदवी का समर्थन कर रही हैं। उनके पोते हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां चार दिन पहले भाजपा में शामिल हो गए हैं। 2022 के चुनाव में हैदर को एनडीए गठबंधन में शामिल अनुप्रिया पटेल की अपना दल ने कैंडिडेट बनाया था लेकिन आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम ने उनको हरा दिया। अब्दुल्ला आजम की विधायकी खत्म होने के बाद 2023 में उप-चुनाव हुआ तो अपना दल ने हैदर अली खान को दोबारा टिकट नहीं दिया।

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नवाब खानदान द्वारा अलग-अलग दलों की हिमायत पर नवाब काजिम अली ने कहा, "मेरी मां बेगम नूर बानो कांग्रेस में हैं। जाहिर है कि वह गठबंधन प्रत्याशी का समर्थन करेंगी। मेरे बेटे नवाब हैदर अली खां भाजपा में हैं तो वह भाजपा उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं।" नवाब काजिम अली खान कहा कि फिलहाल वह किसी का समर्थन नहीं कर रहे हैं। काजिम इस समय औरंगाबाद में है और वोट डालने रामपुर नहीं आएंगे।

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खानदान की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने का जिम्मा अब मुख्य रूप से नवाब काजिम अली के बेटे हैदर अली खां पर है जिन्होंने पिछले दिनों अपना दल (सोनेलाल) से निकलने के बाद भाजपा का दामन थामा है। हैदर का कहना है कि खानदान की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। हैदर ने माना कि पिछले चुनाव में उनका प्रदर्शन ठीक नहीं रहा लेकिन वह मैदान नहीं छोड़ेंगे और अपने खानदान की पुरानी सियासी पहचान को फिर से कायम करेंगे। लोकसभा चुनाव में कम सक्रियता पर हैदर ने कहा कि कुछ पारिवारिक मसलों की वजह से ऐसा हुआ है लेकिन अब दो-तीन दिनों से भाजपा का प्रचार कर रहे हैं।

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रामपुर लोकसभा क्षेत्र एक मुस्लिम बहुत इलाका है। यहां तकरीबन 17 लाख 31 हजार मतदाता हैं। इनमें से करीब 50.10 प्रतिशत मुस्लिम और 49.90 प्रतिशत गैर मुस्लिम हैं। मुसलमान मतदाताओं में शेख, अंसारी और पसमांदा 27 प्रतिशत हैं। इसके अलावा तुर्क 9.5 प्रतिशत, पठान 9 प्रतिशत और अन्य 4.5 प्रतिशत हैं। हिंदू मतदाताओं में दलित और सैनी मतदाता 9-9 प्रतिशत, लोध 8 प्रतिशत, ठाकुर 5 प्रतिशत, यादव और ब्राह्मण 4-4 प्रतिशत, सिख 3 प्रतिशत और जैन तथा ईसाई कुल 0.5 प्रतिशत हैं। 

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रामपुर लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं। बिलासपुर, रामपुर सदर और मिलक सीटों पर भाजपा और स्वार टांडा सीट भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) का कब्जा है। जिले की चमरौवा सीट सपा के पास है।

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