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अयोध्या में होगा सभी भाषाओं की रामायण का पाठ, काशी के प्रस्ताव पर कांची शंकराचार्य की मौजूदगी में बनी सहमति

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लोकार्पण पर अगले वर्ष 17 जनवरी से शुरू होने वाला अनुष्ठान भारत में अब तक के सभी अनुष्ठानों से विशिष्ट होगा। भारत में उपलब्ध सभी भाषाओं की रामायण का एक साथ पारायण होगा।

अयोध्या में होगा सभी भाषाओं की रामायण का पाठ, काशी के प्रस्ताव पर कांची शंकराचार्य की मौजूदगी में बनी सहमति
Ajay Singhअरविन्द मिश्र,वाराणसीWed, 13 Sep 2023 02:45 PM
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Ramayana in all languages: अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लोकार्पण पर अगले वर्ष 17 जनवरी से शुरू होने वाला अनुष्ठान भारत में अब तक के सभी अनुष्ठानों से विशिष्ट होगा। इस दौरान भारत में उपलब्ध सभी भाषाओं की रामायण का एक साथ पारायण होगा। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है।

यह निर्णय गत दिनों काशी में ही हुआ था। कांची कामकोटि पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेंद्र सरस्वती के सानिध्य में हुई बैठक में इसका प्रस्ताव काशी के शुक्ल यजुर्वेद के वयोवृद्ध विद्वान आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित ने दिया था। उस बैठक में मौजूद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने इसपर सहर्ष सहमति दी थी। बैठक में काशी के प्रकांड विद्वान पं. गणेश्वर शास्त्रत्त्ी द्रविड़ भी उपस्थित थे जिन्होंने श्रीराममंदिर के लोकार्पण का मुहूर्त निकाला है। सूत्रों के अनुसार अयोध्या में होने वाला वृहद मंदिर लोकार्पण अनुष्ठान चारों वेदों के 108 विद्वान संपादित कराएंगे।

काशी के 84 वर्षीय आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित अनुष्ठान के मुख्य आचार्य होंगे। इसका संयोजक वेदमूर्ति पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ को बनाया गया है। काशी से 11 वैदिक विद्वान इस अनुष्ठान में सम्मिलित होंगे। विद्वानों का दल 15 जनवरी 2024 को अयोध्या प्रस्थान करेगा।

ये रामायण भी उपलब्ध हैं
आर्ष रामायण, अद्भुत रामायण, कृत्तिवास रामायण, बिलंका रामायण, मैथिल रामायण, रामायण मीमांसा, सर्वार्थ रामायण, तत्वार्थ रामायण, प्रेम रामायण, संजीवनी रामायण, उत्तर रामचरितम् रघुवंशम्, प्रतिमानाटकम्, कम्ब, भुशुण्डि, अध्यात्म, मंत्र, आनंद, योग वाशिष्ठ, श्रीराघवेंद्रचरितम्, अभिषेकनाटकम्, जानकीहरणम्, रामाश्वमेधीयम्, राधेश्याम, श्रीमद्भार्गवराघवीयम्।

सर्वाधिक संस्करण बांग्ला में
रामायण एक हजार तक की संख्या में है। इनमें संस्कृत में वाल्मीकि रामायण सबसे प्राचीन है। अवधी में गोस्वामी तुलसीदास कृत राम चरित मानस ने विशेष स्थान पाया है। हिन्दी में 11, मराठी में आठ, बांग्ला में 25, तमिल में 12, तेलुगु में 12 व उड़िया में रामायण के छह संस्करण हैं। वहीं गुजराती, उर्दू, मलयालम, कन्नड़, असमिया, अरबी, फारसी आदि में भी रामकथा लिखी है।

बौद्ध और जैन रामायण
बौद्ध परंपरा में श्रीराम से संबंधित दशरथ जातक, अनामक जातक तथा दशरथ कथानक नामक कथाएं हैं। जैन साहित्य में विमलसूरि कृत प्राकृत भाषा में ‘पउमचरियं’, संस्कृत में आचार्य रविषेण कृत ‘पद्मपुराण’, रामचंद्र चरित्र पुराण तथा गुणभद्र कृत उत्तर पुराण प्रमुख हैं।

विदेशी भाषाओं में रामायण वदेशों में तिब्बती रामायण, पूर्वी तुर्किस्तान की खोतानी रामायण, इंडोनेशिया की काकाविन रामायण, जावा का सेरतराम, सैरीराम, रामकेलिंग, पातानी रामकथा, इण्डोचायना की रामकेर्ति, खमैर रामायण, बर्मा की यूतोकी रामयागन, थाईलैंड की रामकियेन चर्चित हैं।

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