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विधायकों के झटकों के बीच अखिलेश यादव को भी मिला खुश होने का मौका, NDA के MLA ने सपा को दिया वोट

यूपी में राज्यसभा के लिए हो रही वोटिंग में उम्मीद के अनुसार क्रास वोटिंग हुई है। सबसे ज्यादा सपा के विधायकों ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया है। अभी तक एक एनडीए विधायक ने सपा को वोट दिया है।

विधायकों के झटकों के बीच अखिलेश यादव को भी मिला खुश होने का मौका, NDA के MLA ने सपा को दिया वोट
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊTue, 27 Feb 2024 03:37 PM
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यूपी में राज्यसभा चुनाव में बड़ी संख्या में सपा के विधायकों ने क्रास वोटिंग करते हुए भाजपा प्रत्याशी को वोट दिए हैं। इसे समाजवादी पार्टी के साथ ही अखिलेश यादव के लिए लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा झटका माना जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार सपा से कम से कम पांच विधायकों ने अब तक भाजपा को वोट दे दिया है। इस बीच अखिलेश यादव को भी खुश होने का मौका मिला है। एनडीए में शामिल ओपी राजभर की पार्टी सुभासपा के विधायक ने समाजवादी पार्टी को वोट दिया है। राजभर की पार्टी के विधायक जगदीश नारायण राय का वोट सपा प्रत्याशी को मिला है।

जगदीश नारायण राय ने चुनाव से पहले इसकी भनक ओपी राजभर समेत किसी को नहीं लगने दी थी। विधायकों की एकजुटता दिखाने के लिए एक दिन पहले ही ओपी राजभर सभी एमएलए के साथ सीएम योगी से मिले थे। तब भी जगदीश नारायण मौजूद थे। यहीं नहीं योगी के डिनर में भी जगदीश नारायण शामिल हुए थे।

जगदीश नारायण राय जौनपुर के जफराबाद विधानसभा से विधायक हैं। हालांकि विधायक ने क्रॉस वोटिंग की खबर को नकारा है। सुभासपा विधायक ने कहा कि क्रॉस वोटिंग की खबर पूरी तरह से अफवाह है। वोट डालने के दौरान सुभासपा के पोलिंग एजेंट ने वोट को लेकर पर्चा छीनने का प्रयास किया था। विधायक ने कहा कि वह पोलिंग एजेंट को पहचान नहीं रहे थे।

यूपी में दस सीटों के लिए हो रहे चुनाव में 11 प्रत्याशी मैदान में हैं। भाजपा ने आठ और सपा ने तीन प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। वोटों की गणित के अनुसार सपा को अपने तीसरे विधायक को जिताने के लिए तीन वोटों की जरूरत है। भाजपा को अपने आठवें प्रत्याशी के लिए नौ वोटों की कमी है। माना जा रहा है कि सपा की तरफ से हो रही क्रास वोटिंग के कारण पहली वरीयता में ही भाजपा का आठवां प्रत्याशी जीत हासिल कर लेगा। अगर ऐसा नहीं हो पाता तो दूसरी वरीयता में भाजपा प्रत्याशी की जीत तय ही है। भाजपा पहले से मान कर चल रही है कि पहली वरीयता के वोटों का जुगाड़ नहीं हो सका तो दूसरे वरीयता से उसके सभी प्रत्याशी जीत हासिल कर लेंगे।

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