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Hindi News उत्तर प्रदेशराहुल के रायबरेली रखने ओर वायनाड छोड़ने से ताजा हुई इंदिरा गांधी की याद, 1980 में भी ऐसा हुआ था

राहुल के रायबरेली रखने ओर वायनाड छोड़ने से ताजा हुई इंदिरा गांधी की याद, 1980 में भी ऐसा हुआ था

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रायबरेली लोकसभा सीट रखने और वायनाड छोड़ने के फैसले ने 1980 के लोकसभा चुनाव की यादें ताजा कर दी हैं। राहुल गांधी की तरह तब इंदिरा गांधी दो सीटों से जीत दर्ज की थी।

राहुल के रायबरेली रखने ओर वायनाड छोड़ने से ताजा हुई इंदिरा गांधी की याद, 1980 में भी ऐसा हुआ था
Yogesh Yadavहिन्दुस्तान,रायबरेलीTue, 18 Jun 2024 09:47 PM
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रायबरेली लोकसभा सीट अपने पास रखने और वायनाड छोड़ने के फैसले ने 1980 के लोकसभा चुनाव की यादें ताजा कर दी हैं। राहुल गांधी की तरह तब इंदिरा गांधी दो सीटों से जीत दर्ज की थी। इंदिरा गांधी ने रायबरेली और आंध्र की मेंडक सीट से जीत हासिल की थी। तब इंदिरा गांधी ने रायबरेली सीट छोड़ दी थी। लेकिन राहुल गांधी ने रायबरेली को ही चुना है। जनता भी इसी फैसले के इंतजार में थी। राजनीतिक विश्लेषक 1980 के इंदिरा गांधी के फैसले से राहुल के निर्णय को बड़ा मान रहे हैं।  हालांकि वायनाड से अब गांधी परिवार की ही प्रियंका गांधी उतरने जा रही हैं। ऐसे में वायनाड में भी राहुल के फैसले को लेकर कोई नाराजगी की संभावना कांग्रेस नहीं मानती है।

राहुल गांधी संसद में रायबरेली का प्रतिनिधित्व करेंगे। राहुल गांधी के इस फैसले ने 1980 के आम चुनाव की राहुल की तरह ही उनकी दादी इंदिरा गांधी ने रायबरेली के साथ आंध्र प्रदेश की मेंडक सीट से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में इंदिरा गांधी ने दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी। जैसे राहुल अमेठी से पिछली बार हारे थे उसी तरह इंदिरा गांधी भी तब 1980 में मिली जीत से पहले रायबरेली से हार भी गई थीं। इंदिरा गांधी को हराने के बाद रायबरेली की जनता ने फिर सुधार किया और 80 में उन्हें बड़ी जीत दिलाई। हालांकि इंदिरा ने रायबरेली सीट छोड़ दी थी।

गांधी परिवार के लिए सबसे मुफीद सीट
राहुल गांधी को भी इस बार वायनाड और रायबरेली में किसी एक को चुनना था। उन्होंने रायबरेली को ही चुना और वायनाड को छोड़ दिया है। राहुल गांधी के इस फैसले पर राजनीतिक विश्लेषक डॉ राम बहादुर वर्मा कहते हैं कि यह फैसला इंदिरा से अधिक बड़ा है। रायबरेली ऐसी सीट है जो गांधी परिवार के लिए सबसे मुफीद है। इस सीट से गांधी परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव जीत सकता है। यह यहां की जनता और गांधी परिवार के रिश्तो का गढ़ है। वह बताते हैं कि भाजपा की टिकट पर अशोक सिंह दो बार यहां से सांसद चुने गए। दोनों बार गांधी परिवार से कोई सदस्य यहां चुनाव मैदान में नहीं था।