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Hindi News उत्तर प्रदेशवायनाड को छोड़ा, रायबरेली को अपनाया, राहुल गांधी ने उत्तर भारत को दिया बड़ा संदेश

वायनाड को छोड़ा, रायबरेली को अपनाया, राहुल गांधी ने उत्तर भारत को दिया बड़ा संदेश

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रायबरेली के अपने रिश्ते को निभा दिया। वह संसद में रायबरेली की नुमाइंदगी करेंगे। राहुल के इस फैसले ने पूरे उत्तर भारत के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।

वायनाड को छोड़ा, रायबरेली को अपनाया, राहुल गांधी ने उत्तर भारत को दिया बड़ा संदेश
Dinesh Rathourसुनील पांडेय,रायबरेलीMon, 17 Jun 2024 08:21 PM
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लोकसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में रायबरेली और वायनाड सीट छोड़ने को लेकर चल रही उलझन अब खत्म हो गई है। राहुल गांधी ने वायनाड सीट छोड़ने का फैसला किया है। इसी के साथ राहुल ने रायबरेली के अपने रिश्ते को निभा दिया। वह संसद में रायबरेली की नुमाइंदगी करेंगे। राहुल के इस फैसले ने पूरे उत्तर भारत के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में पार्टी को खड़ा करने में आसानी होगी।  लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने वायनाड और रायबरेली से चुनाव लड़ा था। दोनों जगह पर राहुल ने बड़ी जीत दर्ज की थी। रायबरेली की जनता ने राहुल गांधी को 3.90 लाख से जिता कर यह बता दिया था कि उनका गांधी परिवार से रिश्ता कितना गहरा है। राहुल को एक सीट छोड़नी थी। रायबरेली के लोगों को उम्मीद थी कि वह वायनाड छोड़ेंगे। राहुल गांधी रायबरेली के लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे और उन्होंने वायनाड सीट छोड़ने का ऐलान कर दिया। अब वायनाड से प्रियंका गांधी चुनाव लड़ेंगी। राहुल गांधी के इस फैसले से रायबरेली के लोग खासे उत्साहित हैं।

उत्तर भारत में नए कलेवर में उतरेगी कांग्रेस

राहुल गांधी ने रायबरेली सीट को अपनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इस चुनाव में कांग्रेस उत्तर प्रदेश में पहले की तुलना में मजबूत हुई है। कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। यही कारण रहा की राहुल ने रायबरेली को चुना है। राहुल की रायबरेली सीट पर रहने से अब पार्टी संगठन उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी। उत्तर भारत में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी पार्टी नए कलेवर और तेवर के साथ आगे बढ़ेगी। इसके अलावा राहुल गांधी पूरे चुनाव में रायबरेली से गांधी परिवार के रिश्ते की याद दिलाते रहे हैं। उनका कहना था कि गांधी परिवार का 100 साल से अधिक पुराना रिश्ता रायबरेली से है। अब राहुल ने इस रिश्ते को भी बखूबी निभाया है। गांधी परिवार की तीसरी पीढ़ी अब रायबरेली का नेतृत्व करेगी। इसके पहले फिरोज गांधी, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी रायबरेली की संसद में नुमाइंदगी कर चुकी हैं। चुनाव के दौरान सोनिया गांधी की अपील भी राहुल के रायबरेली रहने की ओर संकेत दे चुकी थी। 

आम जनमानस की उम्मीदों को पूरा किया

अमेठी के नवनिर्वाचित सांसद केएल बशर्मा कहते हैं कि रायबरेली का आम जनमानस राहुल गांधी को ही चाहता था। राहुल ने भी उनकी उम्मीदों को पूरा किया है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष पंकज तिवारी बताते हैं कि राहुल के रायबरेली रहने के फैसले ने बड़ा संदेश दिया है। इससे कार्यकर्ताओं में और उत्साह बढ़ा है। राजनीतिक विश्लेषक एवं फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज के राजनीति शास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ राम बहादुर वर्मा कहते हैं कि गांधी परिवार का रायबरेली से पुराना नाता रहा है। राहुल को लेकर रायबरेली की जनता ने अपना संदेश दे दिया था। अब राहुल गांधी की बारी थी। राहुल भी इसमें खरे उतरे हैं। यह फैसला रायबरेली का नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए अहम है। कांग्रेस को नए तेवर के साथ आगे बढ़ाने में यह फैसला मददगार साबित होगा।