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शाहजहां और मुमताज महल से भी पहले की है पृथ्वीराज-संयोगिता की प्रेम कहानी, पर्दे पर पहली बार देखेगी दुनिया

यशराज बैनर की नई और बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ में कहानी तो दिल्ली के सम्राट पृथ्वीराज चौहान पर केंद्रित है। उनके सम्राट बनने और देश की यशपताका फहराने के साथ ही विदेशी आक्रांताओं से जंग की

शाहजहां और मुमताज महल से भी पहले की है पृथ्वीराज-संयोगिता की प्रेम कहानी, पर्दे पर पहली बार देखेगी दुनिया
Swati Kumariतारिक इकबाल,कन्नौजFri, 03 Jun 2022 01:13 PM

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पर्दे पर आने से पहले ही सुर्खियों में आ चुकी फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ के बहाने दुनिया पहली बार बड़े पर्दे पर कन्नौज की राजकुमारी संयोगिता को देखेगी। शुक्रवार को जब फिल्म रिलीज होगी तो उसमें दिल्ली के आखिरी हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के शौर्य और बलिदान के साथ ही कन्नौज की राजकुमारी संयोगिता के सौंदर्य और प्रेम से भी दुनिया को रूबरू होने का मौका मिलेगा।

यशराज बैनर की नई और बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ में कहानी तो दिल्ली के सम्राट पृथ्वीराज चौहान पर केंद्रित है। उनके सम्राट बनने और देश की यशपताका फहराने के साथ ही विदेशी आक्रांताओं से जंग की कहानी है। इसी के साथ ही फिल्म में कन्नौज का गौरवशली वैभव भी दिखेगा।

कन्नौज के राजा रहे जयचंद की बेटी राजकुमारी संयोगिता से पृथ्वीराज चौहान के प्रेम को भी दुनिया पहली बार बड़े पर्दे पर देखेगी। 12वीं सदी में कन्नौज का विशाल साम्राज्य और यहां का वैभव और सम्पन्नता भी फिल्मके बहाने दुनिया के सामने होगा। रिलीज होने से पहले ही यह फिल्म अपने शानदार ट्रेलर से सुर्खियां बटोर चुकी है। यहां के लोगों को भी इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार है।

जानिए कौन हैं संयोगिता, जिनकी हो रही चर्चा
सम्राट पृथ्वराज फिल्म के बहाने राजकुमारी संयोगिता भी चर्चा में हैं। पृथ्वीराज चौहान के दरबारी कवि चंद्र बरदाई की लिखित पृथ्वीराज रासो नामक किताब में इस बात का जिक्र है कि राजकुमारी संयोगिता यहां के राजा जचयंद की बेटी थीं। उस जमाने में वह दुनिया की सबसे सुंदर महिला के तौर पर उनकी पहचान थी। वह पृथ्वीराज चौहान की बहादुरी से प्रभावित थीं। लेकिन पिता राजा जचयंद को यह मंजूर नहीं था। वह नहीं चाहते थे कि राजकुमारी संयोगिता और पृथ्वीराज चौहान एक-दूसरे के करीब आएं। पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर राजकुमारी संयोगिता ने पृथ्वीराज चौहान का न सिर्फ साथ दिया, बल्कि भरे दरबार में सबके सामने यहां से चली गई थीं।

कन्नौज में शूटिंग न होने की कसक
हालांकि फिल्म में कन्नौज का गौरवशाली इतिहास दिखाया गया है। बावजूद इसके यहां के बाशिंदों को इस बात की कसक है, फिल्म की शूटिंग के लिए कन्नौज की अनदेखी की गई।

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