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Hindi News उत्तर प्रदेशपत्नी के दाह संस्कार की चल रही थी तैयारी, पति ने भी छोड़ दी दुनिया, एक ही चिता पर दोनों का कराया अंतिम संस्कार 

पत्नी के दाह संस्कार की चल रही थी तैयारी, पति ने भी छोड़ दी दुनिया, एक ही चिता पर दोनों का कराया अंतिम संस्कार 

जालौन में बीमार बुजुर्ग महिला की मौत के कुछ मिनट बाद ही पति ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। घर वाले महिला के शव को लेकर श्मशान पहुंचे थे कि महिला के बुजुर्ग पति की भी मौत की खबर आ गई।

पत्नी के दाह संस्कार की चल रही थी तैयारी, पति ने भी छोड़ दी दुनिया, एक ही चिता पर दोनों का कराया अंतिम संस्कार 
Dinesh Rathourहिन्दुस्तान,जालौनWed, 19 Jun 2024 02:56 PM
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कहते हैं पति-पत्नी में प्यार अगर सच्चा और अटूट हो तो एक साथी के बिछड़ने के गम में दूसरा भी दुनिया छोड़ देता है। ये कोई फिल्मी डायलॉग नहीं बल्कि हकीकत है। यूपी के जालौन से कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां बीमार बुजुर्ग महिला की मौत के कुछ मिनट बाद ही पति ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। घर वाले बुजुर्ग महिला का शव दाह संस्कार के लिए मोक्ष धाम लेकर पहुंचे ही थे कि घर से बुजुर्ग पति की मौत की खबर ने हर किसी की आंखों में आंसू ला दिए। पति-पत्नी की मौत के बाद दोनों के शवों का दाह संस्कार एक ही चिता पर कराया गया।

जालौन के हिरदेशाह बजरिया के 78 वर्षीय मगन लाल प्रजापति 74 वर्षीय पत्नी पार्वती देवी व बेटे अनूप उर्फ टेकचन्द, अशोक और अरूण व पुत्रवधुओं के साथ रहते थे। पूरा परिवार खुशी से रहता था। तेज गर्मी के कारण रविवार को पार्वती देवी को बुखार आया और उनकी हालत बिगड़ने लगी। परिवार के लोग सोमवार को उन्हें अस्पताल ले गए। हालत गम्भीर होने पर उन्हें उच्च संस्थान के रेफर कर दिया गया। जब परिवार के लोग उन्हें उच्च संस्थान ले जा रहे थे तो उनकी रास्ते में ही मौत हो गई। पत्नी के बीमार होने तथा बाहर रेफर होने की खबर जैसे ही पति को मिली वह भी बेचेन हो गए। सोमवार शाम के समय जैसे ही पत्नी का शव घर पहुंचा तो वह यह देख विचलित हो गए। घर पर अंतिम विदाई देते वक्त ही उनकी भी हालत खराब होने लगी। उधर घरवाले जब वृद्धा के शव को लेकर श्मशानघाट पहुंचे तभी घर से खबर आ गई कि मगन लाल की मौत हो गई है।

मां का कर रहे थे अंतिम संस्कार तभी आई पिता की मौत की सूचना

परिवार के लोग वृद्धा का अंतिम संस्कार को रोक कर घर पहुंचे तो पिता भी मृत अवस्था में मिले। इसके उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई और उन्हें भी अंतिम संस्कार के लिए श्मशानघाट ले जाया गया। दंपति के लिए एक ही चिता बनाई और बड़े बेटे अनूप चन्द्र उर्फ टेकचन्द ने माता-पिता की चिता में अग्नि दी। 

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