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लोकसभा चुनाव: राजनीति का ककहरा रायबरेली-अमेठी से ही सीखा : प्रियंका

priyanka gandhi

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी अमेठी-रायबरेली आकर काफी भावुक हो गईं। भाई राहुल गांधी की अमेठी और मां सोनिया गांधी की रायबरेली में चुनावी सभाओं में  कई बार भावुक हुईं। उन्होंने लोगों को  रिश्तो की याद भी दिलाई और चुनाव में अच्छी नीतियों और नीयत वालों को वोट देने का फर्ज भी।  प्रियंका ने भाई के खिलाफ फैलाए जा रहे झूठ को बेनकाब किया और रायबरेली वालों के सामने मां सोनिया गांधी के काम गिनाए।

प्रियंका ने कहा, रायबरेली-अमेठी हमारे घर की तरह है।  यहां आप लोगों के बीच में परिवार की तरह आती हूं।  दिल से कहती हूं की राजनीति का ककहरा और देश सेवा का पाठ हमने रायबरेली और अमेठी से ही सीखा।  मैं यहां बचपन से आ रही हूं। हमें नेता तो आप लोगों ने ही बनाया।  मैं जो भी हूं आप लोगों की ही बदौलत हूं। रायबरेली-अमेठी में गांधी परिवार को सेवा का अवसर आप ही देते हैं।

एक और खास बात हमने सीखी है वह जनता के सामने सच बोलना। जो कर सके वही बोलें। यह बात हमने अपने दादा और परनाना पंडित नेहरू जी, इंदिरा जी, राजीव जी और भाई से सीखी। 

आजकल अमेठी में एक झूठ फैलाया जा रहा है कि राहुल गांधी अमेठी आते नहीं। क्या यह सही है? पूरी अमेठी जानती है राहुल अमेठी में गांव-गांव घूमते हैं, राजीव जी भी गांव-गांव घूमते थे, अपने घर के बुजुर्गों से पूछिए, सब बताएंगे।  

भावुक प्रियंका ने महिलाओं से पूछा- क्या आप झूठ बोलने वाले और अमेठी का अपमान करने वालों को जिताएंगे।  इस पर सभी एक स्वर में बोल उठे-नहीं, कभी नहीं। फुरसतगंज नहर कोठी की सभा मे प्रियंका ने महिलाओं से हंसकर पूछा- तो मैं रायबरेली चलूं। इस पर महिलाओं ने मुस्कुरा कर जवाब दिया- ‘दीदी, आप जाइए, हम लोग हैं ना’। 

रायबरेली में अमावा बाजार में सभा करते हुए प्रियंका ने बेटी के रूप में सोनिया गांधी द्वारा 15 वर्षों में रायबरेली की सेवा को भी लोगों के बीच में रखा। कहा-  सोनिया  ने रायबरेली को रेल कोच फैक्टरी दी, एम्स दिया।  55 राष्ट्रीय-राजमार्ग बनवाए, रेलवे लाइनें दी।  इसका यह मतलब नहीं कि उन्होंने कोई एहसान किया। सेवा उन्हें विरासत में मिली है, सेवा को वह अपना धर्म मानती हैं जब से आपने उन्हें रायबरेली की सांसद चुना है वह यहां की चिंता में भी रहती हैं और जब तक वह जिंदा हैं, रायबरेली की सेवा करती ही रहेंगी। 

प्रियंका ने याद दिलाया, आप वोट देते समय अपने गांव, क्षेत्र, मोहल्ले के विकास की बात जरूर सोचिए। लेकिन एक बात उससे आगे जाकर सोचने की है, वह है देश में इस समय संविधान भी खतरे में है और लोकतंत्र भी। लोकतंत्र नहीं रहेगा तो आपके पास वह शक्ति भी नहीं रहेगी। इसलिए गांव से ऊपर उठकर भी सोचने का समय आ गया है। 

प्रियंका के इन भाषणों पर जनता भी कई बार जोश में आई। भीड़ से आवाज आनी शुरू हो गई थी रायबरेली-अमेठी आपके साथ है। अमावा की सभा से लौटते हुए कचोरा गांव की बुजुर्ग महिला शिव कला बोली- ‘पंजा का कौउनो भूल सकत है का’। अमेठी क्षेत्र के पूरे चाहा गांव की श्याम कुमारी कहती है- ‘भाजपा चाहे जितना भड़काए अमेठी मां जितिहैं राहुल गांधी’। 

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