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मेडिकल कॉलेज में मरीजआते ही माफिया के साथ एक्टिव हो जाते थे पुलिसवाले, खुल गया बड़ा खेल 

बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर में मरीज माफिया सिर्फ कर्मचारियों को ही नहीं, आंख मूंदे रखने के लिए पुलिसवालों को भी पैसा बांटता था। बात तो यहां तक सामने आई कि कई अफसरों के नाम पर भी पैसा वसूला जाता था।

मेडिकल कॉलेज में मरीजआते ही माफिया के साथ एक्टिव हो जाते थे पुलिसवाले, खुल गया बड़ा खेल 
Ajay Singhवरिष्ठ संवाददाता।,गोरखपुरMon, 26 Feb 2024 12:38 PM
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BRD Medical College Gorakhpur: गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कालेज में मरीज माफिया सिर्फ कर्मचारियों को ही नहीं, आंख मूंदने पर पुलिसवालों को भी पैसा बांटता था। बात तो यहां तक सामने आई कि कई अफसरों के नाम पर भी पैसा वसूला जाता था। हालंकि अब तक की जांच में दो पुलिसवालों की भूमिका संदिग्ध मिलने पर एसपी सिटी की रिपोर्ट पर एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं। उधर, मुख्य आरोपित मनोज निगम सहित अन्य की तलाश जारी है।

बीआरडी मेडिकल कालेज से मरीजों को बरगलाकर निजी हास्पिटल में भर्ती कराने और वसूली करने के मामले में रामगढ़ताल और चिलुआताल पुलिस ने पिछले दिनों दो हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई की थी। रामगढ़ताल इलाके के ईशु अस्पताल का मामला सबसे पहले सामने आने के बाद ही पुलिस ने मरीज-एम्बुलेंस माफिया गिरोह में शामिल सात लोगों को यहां से जेल भेजा था। इसके बाद मेडिकल कालेज रोड पर झुंगिया के पास स्थित यूनिवर्सल हॉस्पिटल में मरीज को भर्ती कराने के मामले में 15 पर केस दर्ज हुआ और उसमें सात को पुलिस ने जेल भेजवा दिया। दोनों मामलों में गिरोह के कुछ सदस्य जहां कॉमन पाए गए वहीं मरीज माफिया गिरोह के संचालक के रूप में मनोज निगम का नाम सामने आया था।

दोनों मामलों में आरोपितों से पूछताछ में पैसे के बंटवारे का खेल सामने आया था। ईशु हास्पिटल के प्रकरण में आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि मेडिकल कॉलेज पुलिस चौकी पर तैनात हेड कांस्टेबल तुफानी राम और कांस्टेबल पवन गुप्ता के पास यह जानकारी थी मरीज को यहां से गुमराह कर ले जाया जा रहा है लेकिन आंख मूंदने के बदले उन्हें पैसा मिला था। पता चला है कि ये दोनों भी गिरोह के मददगार थे। हालांकि, इनका मरीज उठाने में सीधा संबंध नहीं था पर उन्हें पूरे प्रकरण की जानकारी रहती थी।

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने इस प्रकरण की खुद जांच की थी और मामला खुलने के बाद आरोपियों को जेल भेजने के साथ ही पुलिसवालों की भूमिका की रिपोर्ट भी तैयार करके एसएसपी को भेजी थी। रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने दोनों को निलंबित कर दिया।

अफसरों के नाम पर भी जाता था पैसा

पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में कई रोचक जानकारी मिलीं तो वहीं पूरा काला चिट्ठा भी खुल गया। पता चला कि मरीज माफिया वसूली का पैसा कहां-कहां बांटते थे। यही नहीं,जो पैसा निकाला जाता था उसमें अफसर के नाम पर भी जाता था। हालांकि एक मरीज को मेडिकल कॉलेज से निकालने के बदले एक हजार रुपये पुलिसवालों को मिलते थे। इसमें पुलिसवालों को कुछ न करने के बदले पैसा मिलता था। माफिया गिरोह यही चाहता था कि पुलिसवाले उनके ऊपर ध्यान न दे। ऐसा नहीं है कि किसी शिकायत पर यह दबाते थे, यह एंबुलेंस को आते-जाते आंख मूंद लेते थे। जब कहीं से शिकायत आती तो यह कहकर बच जाते कि उनके पास किसी मरीज या तीमारदार ने कोई शिकायत नहीं की है।

क्‍या बोले अफसर 
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि मरीज माफिया गिरोह के सभी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अब तक की जांच में इस मामले में दो पुलिस वालों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। एसपी सिटी की रिपोर्ट के आधार पर दोनों को निलंबित कर विभागीय जांच का आदेश दिया गया है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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