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Hindi News उत्तर प्रदेशपुलिस ने गूगल मैप से खोजा भटकते युवक का घर, जीएसटी कमिश्नर के भाई ने 18 साल पहले डिप्रेशन में छोड़ा था गांव

पुलिस ने गूगल मैप से खोजा भटकते युवक का घर, जीएसटी कमिश्नर के भाई ने 18 साल पहले डिप्रेशन में छोड़ा था गांव

आगरा में रामबाग (एत्मादुद्दौला) के पास रह रहे एक युवक का घर पुलिस ने गूगल मैप से खोज निकाला। उसके परिजनों से संपर्क किया। युवक मध्य प्रदेश के जीएसटी कमिश्नर का भाई निकला। 18 साल पहले गांव छोड़ा था।

पुलिस ने गूगल मैप से खोजा भटकते युवक का घर, जीएसटी कमिश्नर के भाई ने 18 साल पहले डिप्रेशन में छोड़ा था गांव
Yogesh Yadavहिन्दुस्तान,आगराFri, 14 Jun 2024 04:16 PM
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आगरा में रामबाग (एत्मादुद्दौला) के पास रह रहे एक युवक का घर पुलिस ने गूगल मैप से खोज निकाला। उसके परिजनों से संपर्क किया। युवक मध्य प्रदेश के रिटायर जीएसटी कमिश्नर का भाई निकला। 18 साल पहले अवसाद के चलते घर छोड़ा था। परिजन उसके मिलने की उम्मीद छोड़ चुके थे। फिल्मी अंदाज में पुलिस ने उसके परिजनों से संपर्क किया। गूगल मैप पर गांव देखा। एक जनसेवा केंद्र का नंबर मिला। उस पर संपर्क किया। गांव के सरपंच से बात की तब परिजनों का पता चला।

जिला सीधी (मध्य प्रदेश) निवासी राघवेंद्र प्रसाद द्विवेदी रिटायर जीएसटी कमिश्नर हैं। उनका भाई बालेंद्र कुमार 18 साल पहले लापता हुआ था। बालेंद्र कुमार रामबाग पर भटक रहे थे। गश्ती पुलिस ने उन्हें रोका। पूछा कि कहां रहते हो। क्यों भटक रहे हो। नाम पता पूछने पर बालेंद्र कुमार ने पुलिस को सही जानकारी दी। रामबाग चौकी प्रभारी राहुल कटियार ने गूगल मैप पर गांव कपूरी पवाई थाना रामपुर जिला सीधी को खोजा। गांव मिल गया। वहां के एक जनसेवा केंद्र का नंबर ऑनलाइन मिला। उस पर संपर्क किया। गांव के सरपंच से बात कराने को कहा। सरपंच को पुलिस ने युवक के भटकते हुए मिलने की जानकारी दी।

यह बताया कि युवक अपना नाम बालेंद्र कुमार बता रहा है। सरपंच ने उसके परिजनों से संपर्क किया। पुलिस से बात कराई। पुलिस से संपर्क पर घरवालों की खुशी का ठिकाना नहीं था। यह कवायद करीब दो दिन चली। पुलिस ने दो दिन तक बालेंद्र कुमार को अपने पास रखा। ताकि वह दोबारा कहीं नहीं चला जाए।

गुरुवार को सुरेंद्र द्विवेदी एत्मादुद्दौला थाने आए। पुलिस को बताया कि पांच भाई हैं। बालेंद्र कुमार सबसे छोटा है। सबसे बड़े भाई राघवेंद्र प्रसाद रिटायर जीएसटी कमिश्नर हैं। बालेंद्र ने वर्ष 2006 में अवसाद के चलते घर छोड़ दिया था। कई साल उन्होंने उसे तलाशा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। आगरा पुलिस के प्रयास से 18 साल बाद खोया हुआ भाई उन्हें मिला है।