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लड़की से अभद्रता के मामले में लापरवाही बरतने पर पुलिस की अंतिम रिपोर्ट निरस्त

हिन्दुस्तान टीम,लखनऊPublished By: Deep Pandey
Sat, 18 Sep 2021 07:24 AM
लड़की से अभद्रता के मामले में लापरवाही बरतने पर पुलिस की अंतिम रिपोर्ट निरस्त

अनुसूचित जाति की लड़की का गलत नीयत से हाथ पकड़ कर उसके साथ अश्लील हरकतें करने एवं विरोध पर उसके कपड़े फाड़ देने के एक मामले में अदालत ने सख्त नाराजगी दिखाई है। इस मामले में पुलिस उपाधीक्षक स्तर के तीन विवेचना अधिकारियों द्वारा लापरवाही बरतने एवं मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाने को लेकर पाक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अरविन्द मिश्रा ने विवेचकों द्वारा लगाई गई अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया है।

अदालत ने प्रकरण में गंभीर रुख अपनाते हुए पुनः मामले में अग्रिम विवेचना कराए जाने के निर्देश दिए हैं। इसमें न केवल अधिकृत पुलिस अधिकारी को निर्देश दिया है बल्कि पूर्व विवेचक  तनु उपाध्याय, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी कैंट, डॉ. वीनू सिंह तत्कालीन क्षेत्र अधिकारी कैंट व पर्यवेक्षण अधिकारी श्री सुकीर्ति माधव तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नगर उत्तरी लखनऊ को उनके द्वारा की गई लापरवाही के संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई किए जाने हेतु पुलिस कमिश्नर को पत्र के साथ आदेश की प्रति भेजने का आदेश दिया है। अदालत  ने यह भी कहा है कि इस आदेश की एक प्रति अलग से पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश शासन को भेजी जाए।

इस मामले की रिपोर्ट पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराई गई थी। इसमें कहा गया था कि 15 वर्षीय उसकी पुत्री एल्डिको में चौका बर्तन करने जा रही थी। तभी शीतल खेड़ा गांव के अंकित यादव ने उसकी बेटी का गलत नीयत से हाथ पकड़ लिया और घसीटा तथा गंदी गंदी हरकतें की और बेटी के कपड़े फाड़ दिए। यह भी कहा गया है कि जब मामले की रिपोर्ट लिखाने के लिए वह पुलिस चौकी गई तो थोड़ी देर बाद अंकित यादव ने घर आकर गंदी गंदी गालियां जानमाल की धमकी दी। अदालत ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस मामले में धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता का बयान कराना बाध्यकारी था। इसके बावजूद हर बार अंतिम रिपोर्ट लगाई गई। जिसे आपत्ति के साथ निरस्त कर पुनः विवेचना कराए जाने का आदेश दिया गया परंतु किसी भी पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा धारा 164 का बयान नहीं कराया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा विवेचना किए जाने के उपरांत भी पीड़िता का बयान अंतर्गत धारा 164 दंड  प्रक्रिया संहिता कराएं बिना अंतिम आख्या अदालत के समक्ष पेश किया जाना एक गंभीर लापरवाही है ।

अदालत ने कहा कि पीड़िता का बयान न कराकर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा सरसरी तौर पर पर्यवेक्षण किया जाना प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की है कि सभी पुलिस कर्मियों ने विवेचना में यह कृत्य भूलवश नहीं किया है बल्कि उनके द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया है। तीन- तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के द्वारा एक महत्वपूर्ण बिंदु को नजरअंदाज किया जाना भूल नहीं है बल्कि उनके द्वारा की जा रही लापरवाही प्रदर्शित करता है। ऐसी स्थिति में अंतिम रिपोर्ट खारिज कर मामले की  अग्रिम विवेचना कराया जाना उचित है ।लिहाजा परीक्षण अधिकारी आदेश में उठाए गए बिंदुओं के संदर्भ में अग्रिम विवेचना कराया जाना सुनिश्चित करें
 

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