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23 अक्तूबर, 2020|8:04|IST

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पुलिस का दावा : नौकरी थी नहीं और लॉकडाउन में खत्म हुए पैसे तो कर दिया संजीत का अपहरण और हत्या

कानपुर में संजीत यादव की हत्या करने वाले पेशेवर अपराधी नहीं थे। पुलिस का दावा है कि उनका अब तक कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। अपहर्ताओं में शामिल संजीत के दो दोस्तों ने नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद पैसे के चक्कर में दिल दहलाने वाली घटना कर डाली।

मुख्य आरोपित ज्ञानेन्द्र यादव उर्फ ईशू और कुलदीप गोस्वामी ने पुलिस को बताया कि दोनों ने छह माह पहले ही प्राइवेट अस्पताल की नौकरी छोड़ दी थी। उसके बाद ज्ञानेन्द्र शहर के वरिष्ठ डॉक्टर के यहां काम करने लगा था। कुलदीप संविदा पर कभी-कभी हैलट अस्पताल में काम करता था। कोरोना काल और लॉकडाउन में दोनों को पैसे की दिक्कत हुई। इस पर एक अन्य लैब में काम करने वाले रामजी शुक्ला ने इन्हें किसी बच्चे का अपहरण कर फिरौती वसूलने की योजना बनाने की सलाह दी। ज्ञानेन्द्र के घर के पास एक पार्क में बच्चे खेलते थे। आरोपितों ने मिलकर किसी बच्चे को उठाने की योजना बनाई लेकिन किन्हीं कारणों से विफल रहे।
इस दौरान कुलदीप और ज्ञानेन्द्र को संजीत की बात याद आई जो उनसे अक्सर कहता था कि उसके पास बहुत पैसा है। इन लोगों ने बाकी आरोपितों के साथ मिलकर संजीत का अपहरण करने की योजना बना ली। अपहरण में शामिल ज्ञानेंद्र का दोस्त नीलू कुछ नहीं करता। इन्हीं दोनों ने प्री एक्टिवेट सिम दिलवाए।

ट्रक और कार चलने की बात कहता था संजीत 
आरोपितों ने बताया कि संजीत उनसे कहता था कि उसके 3-4 ट्रक चल रहे हैं और 4-5 गाड़ियां हैं। उसने आरोपितों को यह भी बताया था कि वह शौक के लिए नौकरी करता है। वह मोबाइल पर सट्टा भी खेलता है जिससे उससे सप्ताह भर में 15-20 हजार रुपए की कमाई हो जाती थी। संजीत की बातें सुनकर आरोपित लालच में आ गए थे।  

बहन की शादी टूटने की जानकारी भी दी थी
नौकरी छोड़ने के बाद भी आरोपितों की संजीत से बातचीत होती रहती थी। उसने बहन की शादी टूटने और उसके दहेज के लिए लाखों रुपए और जेवर घर में मौजूद रहने की बात भी आरोपितों को बताई थी। जिससे उन्होंने मन बना लिया था कि 30-35 लाख रुपए इसके अपहरण में मिल ही जाएंगे।

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  • Web Title:Police claim no job and Money out of in lockdown then kidnapped and murdered kanpur Barra lab technician Sanjeet Yadav