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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशपुलिस के हत्थे चढ़ा बच्चों का सौदा करने वाला गिरोह, 11 लोग गिरफ्तार

पुलिस के हत्थे चढ़ा बच्चों का सौदा करने वाला गिरोह, 11 लोग गिरफ्तार

गाजियाबाद के डाबर तालाब कॉलोनी से 15 दिन पहले बच्चा चोरी की सूचना के बाद गाजियाबाद पुलिस ने बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने लखनऊ से बच्चे को बरामद करते हुए गिरोह के...

पुलिस के हत्थे चढ़ा बच्चों का सौदा करने वाला गिरोह, 11 लोग गिरफ्तार
Shivendra Singh संवाददाता, लोनी गाजियाबादSun, 23 May 2021 10:50 AM
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गाजियाबाद के डाबर तालाब कॉलोनी से 15 दिन पहले बच्चा चोरी की सूचना के बाद गाजियाबाद पुलिस ने बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने लखनऊ से बच्चे को बरामद करते हुए गिरोह के 11 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि बच्चा चोरी नहीं हुआ था, बल्कि बच्चे की मां ने आरोपियों के साथ दो लाख 80 हजार रुपये में सौदा किया था। लेकिन आरोपी मां को धोखा देकर बिना पैसा दिए बच्चा लेकर फरार हो गए। इसके बाद  बच्चे की मां ने पुलिस में चोरी की रिपोर्ट लिखाई थी।

पुलिस अधीक्षक ग्रामीण डॉ. ईरज राजा ने बताया कि पकड़े गए 11 आरोपियों में आठ महिलाएं हैं। पुलिस ने इन आरोपियों की निशानदेही पर पांच लाख रुपये भी बरामद किए हैं। यह रुपये लखनऊ के रहने वाले आरोपी को बच्चा सौंपने के बाद इन्हें मिले थे। पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि इस गिरोह ने अब तक एक दर्जन से अधिक बच्चों की खरीद फरोख्त की है। इस गिरोह के लोग भिखारी या गरीब परिवारों के बच्चे चुराकर या उन्हें कुछ पैसे देकर खरीद लेते थे। इसके बाद नि:संतान दंपतियों से मोटी कीमत लेकर बेच देते थे। आरोपी बच्चों की कीमत खरीदने वाले की हैसियत देखकर लगाते थे।

इस गिरोह में आरोपी असमीम कौर व गुरमीम वेब साइट के जरिए ग्राहकों की तलाश करते थे। बल्कि कई जगह बच्चा गोद दिलाने वाली संस्थाओं की वेबसाइट पर भी इन आरोपियों के मोबाइल नंबर दर्ज कराए गए हैं। पुलिस अब इन आरोपियों द्वारा पूर्व में अंजाम दिए गए खरीद फरोख्त के मामलों को भी ट्रैस करने का प्रयास कर रही है।

12 मई की दोपहर 12 बजे लोनी थाने की डाबर तालाब कॉलोनी निवासी फरियाद का 15 दिन का बेटा रमजानी घर से चोरी हो गया था। फरियाद ने अपने घर आए एक महिला व पुरुष के विरुद्ध चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बच्चा चोरी की सूचना मिलते ही पुलिस में हड़कंप मच गया। खुद पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जांच पड़ताल में जुट गए। इसी दौरान पुलिस को कुछ इनपुट मिले। पता चला कि बच्चा चोरी नही हुआ है, बल्कि आरोपी मां को धोखा देकर बिना रुपये दिए ही बच्चा लेकर भाग गए। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए बच्चे को लखनऊ के एक दंपति से बरामद कर लिया। पूछताछ में दंपति ने बताया कि उसने पांच लाख रुपये में आरोपियों बच्चा खरीदा है।  

दो लाख 80 हजार रुपये में हुआ  था सौदा
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण ने बताया कि बच्चे की मां फातमा से विजयनगर में रहने वाले वाहिद व डासना निवासी उसकी रिश्तेदार तरमीम ने दो लाख 80 हजार रुपये में सौदा किया। इसके तहत यह दोनों आरोपी उसके घर पहुंचे और दो घंटे तक रुके भी। इसी बीच फातमा को शरबत में नशीला पदार्थ पिलाकर बेहोश कर दिया तथा बच्चे को एक बैग में रखकर गाजियाबाद ले गए। यहां इन्होंने करीब 50 हजार रुपये लेकर बच्चा रुबिना और मोनी उर्फ मोनिका को सौंप दिया। इन दलालों ने बच्चे को बेचने के लिए दूसरे दलाल प्रीति पत्नी सुमित निवासी वजीराबाद दिल्ली व ज्योति पत्नी राहुल निवासी द्वारका दिल्ली एवं सरोज निवासी दिल्ली को सौंप दिया। इन लोगों ने बच्चे को दिल्ली की ही प्रभा, इंदू व उनके दोस्त शिवा को सौंप दिया। इन दलालों ने बच्चे को महंगी कीमत पर बेचने के लिए असमीत कौर व उसके पति गुरमीत निवासी तिलकनगर दिल्ली से संपर्क किया। दंपति ने बच्चों की खरीद फरोख्त के लिए वेबसाइट डेली हंट पर अपना मोबाइल नंबर आदि डाला हुआ है। इन्होंने ही बच्चे को साढ़े पांच लाख रुपये में मधुबन नगर आलमबाग लखनऊ निवासी आलोक अग्निहोत्री को बेच दिया। आलोक ने यह बच्चा अपनी नि:संतान बहन के लिए खरीदा था। 

तीन आरोपी फरार
एसपी देहात ने बताया कि बच्चे को आलोक अग्निहोत्री के लखनऊ स्थित आवास से सकुशल बरामद कर लिया गया है। जबकि असमीत कौर उसके पति गुरमीत को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से बच्चे को बेचकर प्राप्त पांच लाख रुपये बरामद किए गए हैं। जबकि बच्चा चुराने वाले वाहिद व तरमीम तथा बच्चा बिकवाने में दलाल की भूमिका निभाने वाले सरोज, प्रीति, ज्योति, सरोज, रुबिना, मोनिका को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस गिरोह के प्रतिभा, इंदू व शिवा आदि आरोपी अभी फरार हैं।

पीड़ित भी है गिरोह का हिस्सा 
पुलिस के मुताबिक फातमा ने तीन साल पहले भी अपना बच्चा बेच दिया था। फातमा ही नहीं, कई ऐसे लोग ऐसे हैं जो बच्चे को बेचकर अपना गुजारा करते हैं। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण ने बताया कि ये लोग एक बार बच्चा बेचने के बाद दो तीन साल के लिए जगह बदल देते हैं और फिर वहां भी इस धंधे को अंजाम देते हैं।

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