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Hindi News उत्तर प्रदेशअयोध्‍या के मंदिरों के फूलों से गमकेगी दुनिया, अवध विश्‍वविद्यालय में बन रहा इत्र; बड़े प्‍लान पर काम शुरू 

अयोध्‍या के मंदिरों के फूलों से गमकेगी दुनिया, अवध विश्‍वविद्यालय में बन रहा इत्र; बड़े प्‍लान पर काम शुरू 

रामनगरी अयोध्या के मंदिरों पर चढ़ाए गए फूलों की खुशबू अब पूरी दुनिया में फैलेगी। इन फूलों से डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय इत्र बनाएगा। विश्वविद्यालय का पर्यावरण विभाग इस पर काम कर रहा है।

अयोध्‍या के मंदिरों के फूलों से गमकेगी दुनिया, अवध विश्‍वविद्यालय में बन रहा इत्र; बड़े प्‍लान पर काम शुरू 
Ajay Singhस्वरमिल चंद्रा,अयोध्याTue, 21 Mar 2023 05:58 AM
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रामनगरी अयोध्या के मंदिरों पर चढ़ाए गए फूलों की खुशबू अब पूरी दुनिया में फैलेगी। इन फूलों से डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय इत्र बनाएगा। विश्वविद्यालय का पर्यावरण विभाग इस पर काम कर रहा है। जल्द ही बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हो जाएगा। अयोध्या में दिन प्रतिदिन श्रद्धालुओं की आमद बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही मंदिरों में फूलों का चढ़ावा भी बढ़ रहा है।

विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के शिक्षकों ने इसके लिए बेहद खूबसूरत रास्ता निकाला है। मंदिरों में चढ़ने वाले गेंदे और गुलाब के फूलों से इत्र बनाने की योजना पर काम शुरू किया। कहने को तो इस पर काम कोविड की पहली लहर से 6 महीने पहले ही हो गया था। लेकिन 80 अस्सी लीटर की दो खेप निकलने के बाद काम आगे नहीं बढ़ सका।

दरअसल इस प्लांट की जमीन ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की जद में आने के चलते विश्वविद्यालय की यह योजना प्रयोगशाला तक सीमित हो गई। लेकिन वर्तमान कुलपति प्रोफेसर प्रतिभा गोयल ने कार्यभार ग्रहण किया तो इसे फिर से संजीवनी मिल गई।

हनुमानगढ़ी समेत कई मंदिरों से एमओयू
पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर जसवंत सिंह कहते हैं कि इसके लिए कन्नौज से प्लांट भी आ गया था। नाका हनुमानगढ़ी समेत कुछ मंदिरों व नगर निगम से एमओयू भी हो गए थे। लेकिन एयरपोर्ट की वजह से सब कुछ बंद हो गया था। नई कुलपति के प्रयासों से हम लोगों को फिर से जमीन आवंटित कर दी गई है। प्लांट की प्रक्रिया दोबारा शुरू हो गई है। पिछले दिनों हम लोगों ने प्रयोगशाला में इसका उत्पादन भी शुरू हो गया। 17 मार्च को 27वें दीक्षांत समारोह में हमारे रिसर्च स्कालरों ने प्रयोगशाला में बने इत्र को कुलाधिपति को भेंट किया जिसकी काफी सराहना की गई।

50 किलो फूलों से बनता है लगभग एक लीटर इत्र
इन मंदिरों से लाए गए फूलों को साफ सुथरा करके एक बार में पचास किलो की खेप को इत्र के लिए प्रोसेस किया जाता है। जिससे काफी मेहनत के बाद लगभग एक लीटर इत्र तैयार किया जाता है।

मंदिर प्रबंधन को मिलेगी ट्रेनिंग
प्रोफेसर जसवंत कहते हैं कि हम लोगों की यह योजना है कि मंदिर प्रबंधन को इसकी ट्रेनिंग दे दें। ताकि सीख कर वो लोग छोटे छोटे इत्र के प्लांट लगाकर इसका खुद ही उत्पादन अपने यहां करने लगें। इससे वहां पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और उनकी आय भी बढ़ेगी। हालाकि यह कुलपति से चर्चाके बाद ही आगे बढ़ेगा।

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