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नम आंखों से शहीद देवेन्द्र को विदाई, दो साल के बेटे ने दी मुखाग्नि

Shaheed Devendra Baghel

देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए वीर जवान देवेन्द्र बघेल का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह उनके घर लखनपुर पहुंचा। शव पहुंचते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शहीद का शव देखते ही उनकी पत्नी और मां बेहोश हो गईं। दो साल का बेटा और आठ महीने की बेटी भी अपनी मां और दादी को देखकर रो रहे थे।

सिकंदरा का लखनपुर गांव मंगलवार सुबह से ही शोक में था। जम्मू के कठुआ सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी से देवेन्द्र बघेल शहीद हो गए थे। पोस्टमार्टम के बाद हवाई जहाज से उनके पार्थिव शरीर को दिल्ली लाया गया। बुधवार सुबह दिल्ली से सड़क मार्ग से बीएसएफ के अधिकारी और जवान देवेन्द्र का शव लेकर उनके गांव लखनपुर पहुंचे। शव के पहुंचने से पहले गांव के बाहर हजारों लोग देवेन्द्र को श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठे थे। प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी मौजूद थे। तिरंगे में लिपटा शव जैसे ही गांव पहुंचा तो पूरा गांव रो पड़ा।

देवेन्द्र के पिता नारायण सिंह, मां और पत्नी पिंकी तो शव देकर बेसुध हो गए। गांववालों ने बमुश्किल उन्हें संभाला। देवेन्द्र के अंतिम संस्कार के लिए गांव के बाहर सड़क किनारे की जमीन का चयन किया गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां होने लगीं। परंतु परिजनों और गांववालों का कहना था कि गांव के बाहर जमीन पर शहीद देवेन्द्र का समाधि स्थल बनाने का लिखित आश्वासन मिले तभी अंतिम संस्कार किया जाएगा। लिखित आश्वासन न मिलता देख गांववालों ने शास्त्रीपुरम आरओबी के पास आगरा-दिल्ली हाईवे जाम कर दिया। सुबह 10 बजे करीब शुरू हुआ जाम प्रशासन के आश्वासन के बाद दोपहर 12 बजे खुल गया। प्रशासन से लिखित आश्वासन न मिलते देख गांववालों ने दोपहर एक बजे करीब शहीद देवेन्द्र का शव हाईवे पर रखकर फिर जाम लगा दिया। जाम लगते ही हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। बस, ट्रक और निजी चार पहिया व दो पहिया वाहन खड़े हो गए। मौके पर कई थानों का पुलिस फोर्स पहुंच गया। शाम छह बजे प्रशासन के आश्वासन के बाद जाम खुल सका। 

गांव के बाहर जमीन पर बनेगा स्मारक, लगी मूर्ति 
शहीद देवेन्द्र का अंतिम संस्कार सुबह से शाम तक चली जद्दोजहद के बाद शाम 7 बजे के बाद हुआ। गांववाले जिस जमीन पर शहीद देवेन्द्र की प्रतिमा लगाने व पार्क बनाने की मांग कर रहे थे, वहीं प्रशासन के राजी होने के बाद अंतिम संस्कार किया गया। शहीद देवेन्द्र का गांव लखनपुर हाईवे से शास्त्रीपुरम की तरफ जाने वाले मार्ग पर स्थित है। गांव के बाहर 800 वर्ग से अधिक जमीन पड़ी है। यह जमीन एक व्यवसायी की बताई गई है। उन्होंने वर्षों पहले एडीए से यह जमीन खरीदी थी। गांववाले इसी जमीन के 500 मीटर टुकड़े पर शहीद देवेन्द्र का स्मारक बनाने व उनका अंतिम संस्कार करने की मांग कर रहे थे। पूरे दिन प्रशासन और गांववालों के बीच इस बात को लेकर सहमति नहीं बन सकी। शाम को छह बजे करीब प्रशासन ने गांववालों को अवगत कराया कि व्यवसायी ने शहीद स्मारक के लिए जमीन देने का फैसला कर लिया है। इस बात का लिखित आश्वासन मिलने के बाद गांववाले व परिजन शहीद देवेन्द्र के अंतिम संस्कार को तैयार हुए। शहीद देवेन्द्र को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। बीएसएफ के जवानों की टुकड़ी ने शहीद देवेन्द्र को सलामी दी। अंतिम संस्कार के दौरान शहीद देवेन्द्र अमर रहे के गगनभेदी जयकारे लगे। जिस समय शहीद देवेन्द्र को मुखग्नि दी गई, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंख नम थी। 

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  • Web Title:people last Farewell to Shaheed Devendra by humble eyes in agra