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मंत्रियों का जमावड़ा, मोदी-योगी की बधाई, बेटे की शादी पर ओपी राजभर का भाव हाई 

सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर के बेटे अरुण राजभर की शादी और रिसेप्शन पर पीएम मोदी और सीएम योगी की तरफ से बधाई आई। मंत्रियों का जिस तरह जमावड़ा लगा। कहना गलत नहीं होगा कि ओपी राजभर का भाव अब भी हाई है।

मंत्रियों का जमावड़ा, मोदी-योगी की बधाई, बेटे की शादी पर ओपी राजभर का भाव हाई 
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,वाराणसीThu, 15 Jun 2023 06:38 PM
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सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर के बेटे अरुण राजभर की शादी और रिसेप्शन पर पीएम मोदी और सीएम योगी की तरफ से बधाई आई। मंत्रियों का जमावड़ा लगा। सपा-रालोद के भी कद्दावर नेता पहुंचे। बाहुबलियों की कतार दिखाई दी। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ओपी राजभर का भाव इस समय हाई है। भले ही वह भाजपा और सपा दोनों से अलग हैं लेकिन लोकसभा चुनाव में फिर उनके साथ गठबंधन को दोनों दल लालायित दिखाई देते हैं। यही कारण है कि राजभर की तरफ से मिले न्योते जैसे मौके को कोई भी जाने नहीं देना चाहता था। 

ओपी राजभर के छोटे बेटे और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अरुण राजभर की शादी और रिसेप्शन में उपस्थित हुए राजनेताओं और अधिकारियों की लिस्ट ने अगले लोकसभा चुनाव को लेकर काफी कुछ साफ कर दिया है। उनका भाजपा के साथ गठबंधन करना अब मात्र एक औपचारिता ही लगता है। वैसे भी राष्ट्रपति चुनाव से लेकर एमएलसी चुनाव तक सुभासपा ने भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में वोट किया और खुलकर इसे स्वीकार भी किया है।

सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर के बेटे अरुण राजभर की शादी और रिसेप्शन पर पीएम मोदी और सीएम योगी की तरफ से बधाई आई। मंत्रियों का जमावड़ा लगा। सपा-रालोद के भी कद्दावर नेता पहुंचे। बाहुबलियों की कतार दिखाई दी। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ओपी राजभर का भाव इस समय हाई है। भले ही वह भाजपा और सपा दोनों से अलग हैं लेकिन लोकसभा चुनाव में फिर उनके साथ गठबंधन को दोनों दल लालायित दिखाई देते हैं। यही कारण है कि राजभर की तरफ से मिले न्योते जैसे मौके को कोई भी जाने नहीं देना चाहता था। 

ओपी राजभर के छोटे बेटे और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अरुण राजभर की शादी और रिसेप्शन में उपस्थित हुए राजनेताओं और अधिकारियों की लिस्ट ने अगले लोकसभा चुनाव को लेकर काफी कुछ साफ कर दिया है। उनका भाजपा के साथ गठबंधन करना अब मात्र एक औपचारिता ही लगता है। वैसे भी राष्ट्रपति चुनाव से लेकर एमएलसी चुनाव तक सुभासपा ने भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में वोट किया और खुलकर इसे स्वीकार भी किया है।

अपने बयानों के साथ ही आक्रामक तेवर और फैसलों को लेकर ओपी राजभर हमेशा चर्चा में रहते हैं। उनके पास मौजूद बड़ा वोट बैंक बड़ी पार्टियों को उनकी ओर आकर्षित करता ही रहता है। यही कारण है कि 2017 में भाजपा और 2022 में सपा ने उन्हें हाथों-हाथ लिया था। दोनों पार्टियों को इसका फायदा भी हुआ था। 2017 के विधानसभा चुनाव में भले ही राजभर की पार्टी खुद केवल चार सीटें जीत सकी लेकिन भाजपा ने पूर्वी यूपी में एक तरह से दूसरे दलों का सफाया कर दिया था। भाजपा को पूर्वी यूपी में 72 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। जिस सपा को 2012 में यहां 52 सीटें मिली थीं, उसके पास केवल सात सीटें रह गईं। 

2019 के लोकसभा चुनाव के ठीक बाद उनकी सीएम योगी से नहीं बनी और उन्होंने गठबंधन से किनारा कर लिया। 2022 के चुनाव में सुभासपा ने सपा के साथ गठबंधन किया तो दोनों दलों को फायदा हुआ। सपा गठबंधन की सीटें यूपी में 47 से बढ़कर 111 हो गईं। सुभासपा ने भी छह सीटों पर जीत हासिल कर ली। यह अब तक उसकी सबसे बड़ी जीत थी। 

अपने बयानों के साथ ही आक्रामक तेवर और फैसलों को लेकर ओपी राजभर हमेशा चर्चा में रहते हैं। उनके पास मौजूद बड़ा वोट बैंक बड़ी पार्टियों को उनकी ओर आकर्षित करता ही रहता है। यही कारण है कि 2017 में भाजपा और 2022 में सपा ने उन्हें हाथों-हाथ लिया था। दोनों पार्टियों को इसका फायदा भी हुआ था। 2017 के विधानसभा चुनाव में भले ही राजभर की पार्टी खुद केवल चार सीटें जीत सकी लेकिन भाजपा ने पूर्वी यूपी में एक तरह से दूसरे दलों का सफाया कर दिया था। भाजपा को पूर्वी यूपी में 72 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। जिस सपा को 2012 में यहां 52 सीटें मिली थीं, उसके पास केवल सात सीटें रह गईं। 

2019 के लोकसभा चुनाव के ठीक बाद उनकी सीएम योगी से नहीं बनी और उन्होंने गठबंधन से किनारा कर लिया। 2022 के चुनाव में सुभासपा ने सपा के साथ गठबंधन किया तो दोनों दलों को फायदा हुआ। सपा गठबंधन की सीटें यूपी में 47 से बढ़कर 111 हो गईं। सुभासपा ने भी छह सीटों पर जीत हासिल कर ली। यह अब तक उसकी सबसे बड़ी जीत थी। 

कहा जाता है कि 2022 के चुनाव से ठीक पहले भाजपा नेता के तत्कालीन प्रदेश उपाध्यक्ष और मौजूदा परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और तत्कालीन यूपी भाजपा प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह ने राजभर के साथ बैठक की थी। सपा के साथ उनके गठबंधन को तोड़ने की कोशिश हुई थी लेकिन यह चाल विफल हो गई थी। हालांकि 2022 के चुनाव के बाद ओपी राजभर की सपा से दूरियां बढ़ गईं।

राष्ट्रपति चुनाव और एमएलसी चुनाव में राजभर ने सपा की जगह भाजपा प्रत्याशियों को वोट दिया। इसका उन्हें इनाम भी मिला। योगी सरकार ने उन्हें 'वाई' श्रेणी का सुरक्षा कवच दे दिया। इससे साफ हो गया कि बीजेपी के साथ उनका जाना तय हो गया है।

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