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लोकसभा चुनावः अधिकारी के तंज ने हठी स्वामी को बना दिया हमीरपुर लोकसभा से सांसद 

गोरक्षा आंदोलन का नेतृत्व कर रहे स्वामी ब्रम्हानंद महाराज ने 7 सितंबर 1966 में करीब पांच सैकड़ा साधुओं के साथ संसद में प्रवेश करने का प्रयास किया। पुलिस ने साधुओं को रोकने में बल प्रयोग किया, जिसमें कई साधू घायल हुए। वहां तैनात एक उच्चाधिकारी ने तंज कसते हुए कहा कि यदि संसद में प्रवेश करना है तो पहले सांसद बनिए। अधिकारी का यह तंज स्वामी ब्रम्हानंद के दिल में घर कर गया। उन्होंने उसी समय प्रतिज्ञा की अब वैधानिक रूप से नर्विाचित होकर संसद पहुंचकर ही दम लेंगे।
गोरक्षा आंदोलन में जनसंघ की भूमिका अहम थी, इसलिए वह जनसंघ के संपर्क में आ चुके थे। धीरे-धीरे उनकी पैठ इतनी मतबूत हो गई कि सन् 1967 के लोकसभा चुनाव में जनसंघ ने उन्हें हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा दिया। चुनाव में  उन्होंने न सिर्फ खुद विजयश्री हासिल की बल्कि इस लोकसभा क्षेत्र की समस्त विधानसभा सीटें जिताकर जनसंघ की झोली में डाल दीं। स्वामी ब्रम्हानंद के प्रभाव से कांग्रेस का यह पुराना किला ध्वस्त हो गया। 
लोधी समाज के पहले सांसद थे स्वामी ब्रम्हानंद
करीब साढ़े तीन करोड़ की आबादी वाले लोधी जाति केंद्रीय राजनीति में कारगर प्रभाव नहीं बना पा रही थी। लोधी समाज में जन्मे स्वामी ब्रम्हानंद को समाज से पहला सांसद बनने का गौरव हासिल हुआ। वह कई वर्षों तक अखिल भारतीय लोधी क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष भी रहे। 
बैंकों के निजीकरण मुद्दे पर छोड़ी जनसंघ
सन् 1969 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण का मामला संसद में आया। स्वामी जी चाहते थे कि बैंकों का राष्ट्रीयकरण हो लेकिन उनकी जनसंघ इसके विरोध में थी। पार्टी के नाम पर कोई बंधन स्वीकार कर पाना स्वामी जी के स्वभाव के विपरीत था। इसिलए उन्होंने जनसंघ से त्यागपत्र दे दिया। सन् 1971 के लोकसभा चुनाव में स्वामी जी कांग्रेस से भारी बहुत से जीतकर दूसरी बार लोकसभा पहुंचे। 

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  • Web Title:Officer ridicule made Hamidpur Lok Sabha MP