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ज्ञानवापी निगरानी अर्जी पर अखिलेश यादव की ओर से कोर्ट में आपत्ति दाखिल, याचिका निरस्त करने की मांग

ज्ञानवापी निगरानी अर्जी पर अखिलेश यादव की ओर से कोर्ट में आपत्ति दाखिल की गई है। अधिवक्ता अनुज यादव के जरिए दाखिल आपत्ति में अर्जी खारिज करने की मांग की गई है।

ज्ञानवापी निगरानी अर्जी पर अखिलेश यादव की ओर से कोर्ट में आपत्ति दाखिल, याचिका निरस्त करने की मांग
Deep Pandeyहिन्दुस्तान,वाराणसीFri, 17 Nov 2023 08:19 AM
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ज्ञानवापी परिसर स्थित वुजूखाने को गंदा करने और परिसर में मिले शिवलिंग जैसी आकृति पर बयानबाजी के खिलाफ दायर निगरानी अर्जी पर गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से अपर जिला जज-नवम की अदालत में आपत्ति दाखिल की गई। अधिवक्ता अनुज यादव के जरिए दाखिल आपत्ति में अर्जी खारिज करने की मांग की गई है। मामले में अगली सुनवाई 20 नवम्बर को होगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने बतौर वादी एमएपी-एमएलए कोर्ट में 156 (3) के तहत वाद दायर कर आरोप लगाया था कि ज्ञानवापी परिसर में नमाजियों की ओर से वजूखाने में गंदगी फैलाई जाती हैं। जबकि यह स्थान अराध्य भगवान शिव का है। यह हिंदू समाज के लिए अपमानजनक है। साथ ही सर्वे में मिली शिवलिंग जैसी आकृति पर आईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बयान देकर हिंदुओं की भावनाओं पर कुठाराघात किया है। उन्होंने ज्ञानवापी परिसर के अंजुमन इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल वाकी, मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी, कमेटी के संयुक्त सचिव सैय्यद मोहम्मद यासीन और बयान देने वाले नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की थी। अदालत ने चौक थाने से रिपोर्ट तलब की और सभी पक्षों को सुनने के बाद अर्जी खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि जिस आकृति को अराध्य देव बताया जा रहा है, अभी उसकी सत्यता जांचने का प्रकरण जिला व सत्र न्यायालय में लम्बित है।

निचली अदालत के आदेश के खिलाफ वादी ने जिला व सत्र न्यायालय में निगरानी अर्जी दाखिल की। जिला जज ने प्रकऱण को सुनने के लिए एडीजे नवम को सौंप दिया। छह अक्तूबर की पिछली सुनवाई पर अदालत ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस भेजकर आपत्ति दाखिल करने का आदेश दिया था। जिसके क्रम में पूर्व सीएम अखिलेश यादव की ओर से आपत्ति दाखिल की गई है।

भाषण का रिकॉर्ड मौजूद नहीं

सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से दाखिल आपत्ति में अधिवक्ता ने सवाल उठाये हैं कि जिस प्रकरण में वादी किसी भी तरह से नहीं जुड़ा है तो वह अलग से अर्जी कैसे दे सकता है। साथ ही यह आरोप भी लगाया है कि वादी ने प्रसिद्धि और राजनीतिक मान्यता के लिए अर्जी दी है। वह केवल अपना व्यक्तिगत एजेंडा सेट करना चाह रहा है। प्रतिवादी पर विवादित बयान देने का आरोप लगाया गया है लेकिन उनके भाषण का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। 
24 बिन्दुओं पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा गया है कि यह मामला काफी हाई-प्रोफाइल हो गया है। इसलिए इसके जरिए कुछ लोग अपना नाम बेवजह उछालने के लिए इस तरह के कार्य कर रहे हैं।

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