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हमको इतिहास के दायरे में कोई कैद नहीं कर सकता, ज्ञानवापी की ASI की रिपोर्ट पर बोले सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ज्ञानवापी मामले में आई एएसआई की रिपोर्ट पर रविवार को अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी में एएसआई की रिपोर्ट सामने आई है। एएसआई की रिपोर्ट क्या बताती है।

हमको इतिहास के दायरे में कोई कैद नहीं कर सकता, ज्ञानवापी की ASI की रिपोर्ट पर बोले सीएम योगी
Dinesh Rathourनिज संवाददाता,गोरखपुरSun, 28 Jan 2024 10:20 PM
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ज्ञानवापी मामले में आई एएसआई की रिपोर्ट पर रविवार को अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी में एएसआई की रिपोर्ट सामने आई है। एएसआई की रिपोर्ट क्या बताती है। वह आपके सामने बहुत कुछ उदाहरण प्रस्तुत करती है। मुख्यमंत्री दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित स्मार्टफोन वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस वक्तव्य का वीडियो मुख्यमंत्री के एक्स हैंडल पर अपलोड किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी परंपरा पर गौरव की अनुभूति होनी चाहिए। हम भारतीयों को तो और भी गौरव की अनुभूति होनी चाहिए। जितनी प्राचीन परंपरा व संस्कृति हमारी है, इतिहास से भी परे हम लेाग हैं। हमको इतिहास के दायरे में कोई कैद नहीं कर सकता। हजारों वर्षों का इतिहास है हमारा। राम और कृष्ण हमारे पूर्वज थे। ये आस्था ही नहीं हमारी विरासत भी हैं और हम उस परंपरा पर गौरव की अनुभूति करते हैं।

योगी ने कहा कि अभी पांच सौ वर्षों बाद अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ। अपना भारत उत्साह के साथ जुड़ा है, दुनिया जुड़ी है। लोगों के लिए यह आश्चर्य का विषय है। अभी आप लोगों ने वाराणसी का देखा होगा। वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम में, ज्ञानवापी में एएसआई की रिपोर्ट सामने आई है। एएसआई की रिपोर्ट क्या बताती है। बहुत कुछ आपके सामने उदाहरण प्रस्तुत करती है। लेकिन उस विरासत पर, जो प्रधानमंत्री मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव के समय उपलब्ध कराया, हम आजादी की लड़ाई को अपनी आंखों से नहीं देखे। देश को आजाद होते समय हम नहीं देखे। लेकिन जब देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा था, हर घर तिरंगा के माध्यम से हम इस महोत्सव में सहभागी बने थे।

हमने उस दौरान आजादी के अपने उन राष्ट्रनायकों, स्वतंत्रता सेनानियों, उस समय के क्रांतिकारियों या जिन्होंने आजादी के पहले आंदोलन में सहभागी बनकर नेतृत्व प्रदान किया था, आजादी की लड़ाई में या आजादी के बाद अपनी सेवाओं के माध्यम से बाह्य या आंतरिक सुरक्षा प्रदान की थी, उनके प्रति सम्मान का भाव व्यक्त किया। स्मारकों का सुंदरीकरण हुआ। उन पर शोध और कार्य हुए।

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