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6 मार्च, 2021|1:15|IST

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विकास दुबे केस में एक और नया खुलासा : अंधेरे में नहीं हुआ था खून-खराबा, आठ पुलिस वालों को मारी गईं थी 64 गोलियां

अब तक की जानकारी यह कि एनकाउंटर की रात बिकरू गांव अंधेरे में डूबा था। लेकिन सच्चाई यह कि गांव में भरपूर उजाला था। बिजली जल रही थी। सोलर लाइटें भी जगमगा रही थीं। पुलिस दबिश के वक्त इस्तेमाल होने वाली ड्रैगन लाइटों से लैस थी। तमाम सिपाही टॉर्च भी जला रहे थे। यानि एनकाउंटर जब हुआ, भरपूर उजाला था। बाद में बिजली कटी और अंधेरा हो गया।  

एनकाउंटर के वक्त मौजूद जांबाजों ने ऐसे ही बयान दिए हैं, जिन्हें पुलिस ने चार्जशीट का हिस्सा बनाया है। अब तक कहा जा रहा था कि जब बिकरू में पुलिस को घेरकर गोलियां बरसाई जा रही थीं, वहां घुप अंधेरा था। गांव की बिजली कटवा दी गई थी। पुलिस यह देख ही नहीं पा रही थी कि कौन कहां है? गोलियां कहां से चल रही हैं? चार्जशीट से खुलासा हुआ है कि यह सिरे से गलत बात प्रचारित हो गई। एनकाउंटर में शामिल सिपाही पिंटू तोमर ने बयान में कहा, 'घटना वाले दिन पर्याप्त बिजली व सोलर लाइट थीं।' उसके इसी बयान की हेड कांस्टेबल अखिलेश कुमार और सिपाही नवनीत ने भी पुष्टि की। दोनों ने कहा- गांव में पर्याप्त रोशनी थी। सिपाही कुंवरपाल ने बयान में कहा- पुलिस के पास ड्रेगनलाइट और टार्च भी मौजूद थीं। सिपाही अवनीश कुमार ने कहा-जो टीमें दबिश पर गई थीं, उनके पास रोशनी के लिए पर्याप्त उपकरण थे।

खूनखराबे के बाद काटी गई थी बिजली
चार्जशीट में पुलिस ने विद्युत विभाग के अवर अभियंता अवधेश सिंह के पत्र को भी शामिल किया है। जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें 2 जुलाई की रात सवा 2:15 बजे बिकरू में तार टूटने की सूचना मिली थी। जिस पर उन्होंने बिजली बंद करा दी। रात 3:30 बजे तार जोड़ने की रिपोर्ट मिलने के बाद बिजली को वापस चालू कर दिया गया था।

आठ शहादतें, 64 गोलियां : चौकी प्रभारी और एक सिपाही को मारी गई थीं 12-12 गोलियां
आठ आदमी और 64 गोलियां। बिकरू में अपराधियों की गोलियों और शहादतों का बंटवारा कुछ इस तरह था। घायलों को लगी गोलियां और दीवारों, फर्श व हवा में चली गोलियों छोड़ दें तो हत्यारों ने 64 जानलेवा गोलियां दागीं। इसे ही बेहिसाब फायरिंग कहते हैं। चार्जशीट में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि फायरिंग के बीच ही विकास का एक गुर्गा हत्यारों को कारतूस बांट रहा था। चार्जशीट का हिस्सा बनी फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक आठ शहीदों के शरीर पर कुल 64 गोलियां लगीं। शहीद सीओ देवेन्द्र मिश्रा के शरीर पर 5 घाव थे। यह सभी राइफल की क्लोज रेंज की फायरिंग से बने। एसओ शिवराजपुर महेशचन्द्र यादव के शरीर पर नौ गोलियां लगीं। इनमें 2 राइफल की, 2 सेमी आटोमेटिक राइफल की, बाकी पिस्टलों के थे। चौकी प्रभारी मंधना अनूप कुमार को 12 गोलियां मारी गईं। इसमें तीन गोलियां शरीर के आरपार हो गई थीं। एक गोली क्लोज रेंज से मारी गई। चार गोलियां पिस्टल से, 2 गोलियां राइफल से और 1 गोली 12 बोर की बंदूक या तमंचे से मारी गई थी। दरोगा नेबूलाल के शरीर में नौ गोलियां पैबस्त हुईं। जिसमें सात चोटें राइफल के क्लोज फायर से, दो पिस्टल के फायर से लगीं।

सिपाही सुल्तान को चार गोलियां लगीं। सभी राइफल से मारी गईं। सिपाही बबलू कुमार को भी चार चोटें लगीं। उनमें से दो राइफल के क्लोज रेंज से फायर की गई थीं। बाकी दो चोटंे धारदार हथियार से लगने की पुष्टि हुई। सिपाही राहुल कुमार के शरीर पर नौ घाव थे। जिसमें एक चोट धारदार हथियार से, 6 पिस्टल से और 2 रायफल की गोलियां शरीर से आरपार होने की पुष्टि हुई थी। सिपाही जितेन्द्र पाल को हत्यारों ने 12 गोलियां मारीं। जिसमें 10 क्लोज रेंज राइफल फायर थे। दो गोलियां पिस्टल सटाकर मारी गईं।

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  • Web Title:new revelation in the Vikas Dubey case there was no bloodshed in the dark Eight policemen were killed by 64 bullets