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यूपी में बढ़ रहा एनडीए का कुनबा, विपक्षी उठापटक का लाभ उठाने में जुटी बीजेपी

उत्तर प्रदेश में एनडीए का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। यूपी में विपक्षी उठापटक का लाभ उठाने में बीजेपी सरकार और संगगठन दोनों लगी है। प्रदेश में मजबूती से ताकत बढ़ाने में जुटे हैं।

यूपी में बढ़ रहा एनडीए का कुनबा, विपक्षी उठापटक का लाभ उठाने में जुटी बीजेपी
Deep Pandeyहिन्दुस्तान,लखनऊWed, 21 Feb 2024 07:26 AM
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यूपी में विपक्षी दलों की उठापटक के बीच एनडीए का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। मोदी-योगी के नाम के सहारे यह गठबंधन प्रदेश में मजबूती से ताकत बढ़ाने में जुटा है। पूरब में पहले ही भाजपा के साथ अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के रूप में दो पुराने साथी थे। अब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) भी एनडीए का हिस्सा है। वहीं पश्चिम में अब तक एकला चलो की राह पर बढ़ रही भाजपा को रालोद का साथ मिल गया है। अब पश्चिमी यूपी में पार्टी के कमल को हैंडपंप का पानी सींचेगा।

एनडीए गठबंधन आगामी लोकसभा चुनाव में बिखरे विपक्ष को बड़ा झटका देने की तैयारी में है। भाजपा ने इस बार प्रदेश की सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। पार्टी एक ओर अपने गठबंधन का कुनबा बढ़ाने में जुटी है तो दूसरी ओर अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के जरिए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे को भी मजबूती से धार दे दी है। विपक्षी दलों में मची भगदड़ का भी भगवा खेमा लाभ उठाना चाहता है। सो जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक दूसरे दलों से आने वालों के लिए पार्टी ने दरवाजे खोल दिए हैं। 

हारी सीटों पर सबसे ज्यादा फोकस
भाजपा का सबसे ज्यादा जोर उन लोकसभा सीटों पर है, जिन्हें पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में हार गई थी। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा 78 सीटों पर लड़ी थी और 62 सीटों पर उसे जीत हासिल हुई थी जबकि सहयोगी अपना दल (एस) ने अपने हिस्से आई दोनों लोकसभा सीटें जीत ली थीं। हारी हुई 16 सीटों में से आजमगढ़ और रामपुर सीटें भाजपा उपचुनाव में सपा से छीन चुकी है। बाकी बची 14 सीटों पर जहां पार्टी ने तीन केंद्रीय मंत्रियों को बतौर प्रभारी काफी पहले ही लगा दिया था। वहीं लोकसभा विस्तारक और उन निर्वाचन क्षेत्रों के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में भी पार्टी विस्तारक भेज चुकी है। हारी सीटों पर पार्टी इस बार पहले प्रत्याशी उतारने का भी मन बना रही है। भाजपा की नजर अबकी बार खासतौर से रायबरेली और मैनपुरी सीटों पर है।

लाभार्थी-किसान और महिलाओं तक पहुंचने की मुहिम
पार्टी बीते सालों में केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ पाने वालों को भी बड़े वोट बैंक के रूप में देख रही है। लोकसभा चुनाव में इन लाभार्थियों से वोट के रूप में रिटर्न गिफ्ट मांगने की तैयारी है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के तहत मोदी की गारंटी वाली वैन हर गांव-मोहल्ले तक भेजी गई हैं। इसके बाद पार्टी लाभार्थी संपर्क अभियान शुरू करने जा रही है। ग्रामीण आबादी तक पहुंचने के लिए गांव चलो और अपने कोर वोट बैंक आधी आबादी को जोड़ने के लिए भी मुहिम छेड़ रखी है।

सहयोगियों संग सीटों पर भी लगभग सहमति
घोषित तौर पर तो नहीं लेकिन भाजपा ने अंदरखाने सहयोगियों संग सीट बंटवारे पर भी लगभग बात कर ली है। पश्चिम में जाट वोटों में बिखराव रोकने के लिए जयंत चौधरी को साथ लाया गया है। इस नये गठजोड़ के जरिए पश्चिम में सपा की एमवाई फैक्टर के साथ जाट वोटों को जोड़ने की मुहिम को झटका देने की तैयारी है। सामाजिक समीकरणों के चलते पार्टी को सबसे बड़ी शिकस्त पिछले चुनाव में मुरादाबाद मंडल में ही मिली थी। इस बार पार्टी सुभासपा और रालोद दो नये सहयोगियों संग लोकसभा चुनाव में उतरेगी। हारी सीटों में से पूरब की एक सीट सुभासपा तो पश्चिम की एक सीट रालोद के खाते में जाने की संभावना है।

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