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दारुल उलूम देवबंद के फतवे पर एनसीपीसीआर ने केस दर्ज करने के दिए आदेश, भेजा नोटिस

दारुल उलूम देवबंद के फतवे पर एनसीपीसीआर ने केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। दारुल उलूम को नोटिस भेजा गया है। दारुल उलूम देवबंद को पहले भी एनसीपीसीआर नोटिस दे चुका है। कई फटवे विवादित रहे हैं।

दारुल उलूम देवबंद के फतवे पर एनसीपीसीआर ने केस दर्ज करने के दिए आदेश, भेजा नोटिस
Srishti Kunjमुशर्रफ उस्मानी,देवबंदFri, 23 Feb 2024 09:03 AM
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दीनी तालीम के लिए विश्व में अपनी पहचान रखने वाले दारुल उलूम के फतवे इस्लामिक जगत में काफी अहम माने जाते हैं।  संस्था के 157 साल से ज्यादा के इतिहास में 130 वर्षों के दौरान अब तक 10 लाख से ज्यादा फतवे जारी हो चुके हैं, जिनमें ऑनलाइन सहित कई फतवे खासे चर्चित भी रहे हैं और कुछ विवाद का कारण भी बने हैं। गजवा-ए-हिंद पर नौ साल पहले दिए गए फतवे पर एनसीपीसीआर ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह दूसरा मौका है, जब राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने संस्था को नोटिस दिया है।   

देश के स्वतंत्रता संग्राम में 1857 की क्रांति के असफल होने के बाद देवबंद में दीनी तालीम के मरकज दारुल उलूम की स्थापना 30 मई 1866 को की गई। 157 साल के अपनी दीनी तालीम के सफर में संस्था में फतवों के लिए अलग से एक विभाग दारुल इफ्ता के नाम से 1893 में की गई थी।  फरवरी 2008 में दारुल उलूम ने आतंकवाद को हराम करार देते हुए फतवा जारी करते एक सम्मेलन आयोजित किया।  2013 में जमीयत ने विश्वव्यापी उलेमा का सम्मेलन बुलाकर फतवे पर सर्वसहमति प्राप्त की थी। फतवा विभाग के रिकॉर्ड के अनुसर प्रतिवर्ष नौ से 10 हजार फतवे जारी होते हैं।

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ऑनलाइन फतवे भी होते हैं जारी
विश्व में आधुनिकीकरण की बयार में दारुल उलूम का शिक्षा विभाग ही नहीं दारुल इफ्ता भी इससे अछूता नहीं रहा। वर्ष 2008 में दारुल उलूम के इफ्ता विभाग को कप्यूटराइज्ड कर दिया और देश ही नहीं विदेशों से पूछे जाने वाले सवालों का जवाब ऑनलाइन कर दिया। संस्था के फतवा विभाग के ऑनलाइन के प्रभारी मुफ्ती महमुदुल्लाह कासमी ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में 50 हजार से ज्यादा फतवे ऑनलाइन जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि दस्ती एवं डाक से भेजे जा रहे फतवों को भी अब कप्यूटराइज्ड किया जा रहा है।

यह हैं दारुल उलूम के चर्चित फतवे
दारुल उलूम द्वारा दिए जाने वाले फतवे कुरआन और हदीस की किताबों से दिए जाते हैं। फतवा दिए जाने की संस्था में बाकायदा एक खंडपीठ है। लड़के और लड़कियों की सहशिक्षा की मुखालफत सहित इमराना प्रकरण, कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के फौजी आरिफ और उसकी पत्नी गुड़िया के संबंध में दिया गया फतवा, शेयर मार्केट और प्रोविडेंट फंड सहित फैशनेबल बुर्के हों या ब्यूटी पार्लर में पुरुष कर्मियों की मौजूदगी सहित कई फतवे आज भी गाहे-बगाहे चर्चा का विषय बनते रहते हैं।

पहले मिले नोटिस
राष्ट्रीय बाल संरक्षण (एनसीपीसीआर)आयोग इससे पूर्व भी दो बार दारुल उलूम देवबंद को नोटिस भेज चुका है। जनवरी 2022 दारुल उलूम ने गोद लिए बच्चे का संपत्ति में अधिकार न होना और उसके व्यस्क होने पर उससे पर्दा करने को लेकर फतवा जारी किया था। इसे आयोग ने बाल अधिकार के खिलाफ बताया था। जबकि वर्ष 2023 में भी आयोग ने दारुल उलूम देवबंद को संस्था में दीनी तालीम ले रहे तलबा के अंग्रेजी और अन्य आधुनिक विषयों की कोचिंग लेने पर रोक लगाने दिए जाने पर नोटिस जारी किया था। पिछले दिनों ही एक किताब को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी थी। 

शरई मसअलों पर होता है फतवा: मुफ्ती कासिम नोमानी
दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि फतवा शरई हुक्म होता है जो कि शरई मसअलों पर होता है। यह किसी पर जबरन लागू नहीं किया जाता। लेकिन, फतवे पर अमल करना या न करना उसके लेने वाले पर निर्भर है। सवाल के जवाब में मुफ्ती द्वारा फतवा दिया जाता है।

211 इसवीं में लिखी गई थी सुन्ने नसाई 
इस्लामिक शिक्षण केंद्र दारुल उलूम सहित एशिया के सभी इस्लामिक मदरसों में पढ़ाई जाने वाली हदीस की पुस्तक सुन्ने नसाई 211 ईसवी में अल-इमाम हैजी अबू अब्दुर्रहमान अहमद बिन शुऐब बिन सुन्ने नसाई द्वारा 1813 वर्ष पूर्व लिखी गई थी। इसमें एक चैप्टर (पाठ) गजवा-ए-हिंद भी लिखा गया है। उलेमा के अनुसार इसका भारत से कोई सरोकार नहीं है, न भारत के परिप्रेक्ष्य में यह लिखा गया है।

गजवा-ए-हिंद पर  विवाद
हम अपने वतन से बहुत मोहब्बत करते हैं

उलेमा का कहना है कि गजवा-ए-हिंद शब्द का गलत अनुवाद कर इसे भारत देश से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद का स्पष्ट आदेश है कि जिस देश में रहते हो उसे अपना मुल्क समझो और अपने मुल्क से मोहब्बत करो, देश का मुसलमान अपने मुल्क से अपनी जान की तरह मोहब्बत करता है।

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