ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News उत्तर प्रदेशमुंह बोले बेटे का जन्मदिन मनाने सात समंदर पार से आई मां, भंडारे का भी कराया आयोजन

मुंह बोले बेटे का जन्मदिन मनाने सात समंदर पार से आई मां, भंडारे का भी कराया आयोजन

स्कॉटलैंड की रहने वाली जूली बेंटले अपने मुंह बोले बेटे का जन्मदिन मनाने आगरा के एक छोटे से कस्बे रुनकता पहुंची। यहां उन्होंने हनुमान मंदिर पर भंडारे का आयोजन कर बेटे को जन्मदिवस पर आशीर्वाद दिया।

मुंह बोले बेटे का जन्मदिन मनाने सात समंदर पार से आई मां, भंडारे का भी कराया आयोजन
Pawan Kumar Sharmaहिन्दुस्तान,आगराMon, 13 May 2024 03:04 PM
ऐप पर पढ़ें

मां-बेटे का रिश्ता बेहद ही खास होता है। चाहे सगा बेटा हो या मुंहबोला, मां की ममता किसी के लिए कम नहीं होती है। ऐसा ही एक अटटू मां-बेटे का प्रेम आगरा में देखने को मिला। जहां मातृ दिवस पर विदेशी मां जूली बेंटले की ममता उमड़ आई। वह सात समुंदर पार कर स्कॉटलैंड से एक छोटे से कस्बे रुनकता में अपने मुंह बोले बेटे का जन्मदिन मनाने चली आईं। यहां उन्होंने हनुमान मंदिर पर भंडारे का आयोजन कर बेटे को जन्मदिवस पर आशीर्वाद कदिया। जूली बेंटले अभी कुछ दिन रुकनता में अपने मुंहबोले बेटे के पास रुकेंगी।  

स्कॉटलैंड  की रहने वाली 65 साल की जूली बेंटले की भरतपुर के एक होटल में हुए शादी समारोह में एंकरिंग कर रहे रूनकता निवासी भानु से मुलाकात हुई थी। वहां उन्होंने भानु से भारत की संस्कृति के बारे में जानकारी ली। फिर मोबाइल नंबर के आदान-प्रदान के बाद इंस्ट्राग्राम पर परिचय और बढ़ा। दोनों का रिश्ता धीरे-धीरे मां-बेटे में बदल गया। जानकारी के मुताबिक जूली की कोई संतान नहीं है और पति की भी मौत हो चुकी है। इसलिए उन्होंने भानु को ही अपना बेटा मान लिया है। भानू ने भी जूली को मां का दर्जा दिया। जूल इसी साल जनवरी में भानु से मिलने के लिए स्कॉटलैंड से रुनकता आई थीं।

बेटे का मनाया जन्मदिन

अब जूली बेंटले मुंह बोले बेटे भानु का जन्मदिन मनाने आयीं। उनके परिवार से मिलीं। शनिवार को रेणुका धाम मार्ग स्थित विचित्रवीर हनुमान मंदिर पर भव्य भंडारे आयोजन कर बेटा का जन्मदिन मनाया। बेटे को आशीर्वाद दिया। सभी कार्यक्रम भारतीय संस्कृति के अनुसार किए। उन्होंने बताया कि उनके आगे पीछे कोई नहीं हैं। लेकिन अब उनको भानु के रूप में बेटा मिल गया है। बेटा मिलने के बाद उनके जीने की राह आसान हो गई है। जूली बेंटले ने बताया कि वह यहां रुनकता में रुककर भारत की संस्कृति को करीब से जानेंगी।