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Moradabad Riot Report: मुस्लिम लीग के दो नेताओं के चलते हुआ था दंगा, 40 साल से दबी रिपोर्ट योगी ने पेश कर दी

मुरादाबाद दंगे की रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा में पेश हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुस्लिम लीग के दो नेताओं के कारण यह दंगा हुआ था। अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए इन लोगों ने दंगा कराया था।

Moradabad Riot Report: मुस्लिम लीग के दो नेताओं के चलते हुआ था दंगा, 40 साल से दबी रिपोर्ट योगी ने पेश कर दी
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊTue, 08 Aug 2023 07:42 PM
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मुरादाबाद दंगों की रिपोर्ट 40 साल बाद मंगलवार को विधानसभा में पेश हो गई। 1980 में ईद की नमाज के दौरान दंगा भड़का था। इसमें 83 लोगों की मौत हो गई थी और सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इसमें ज्यादातर मुसलमान थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि दंगे के लिए न तो हिन्दू जिम्मेदार थे और न ही आम मुसलमान दोषी थे। संघ या किसी हिन्दूवादी संगठन को भी इसके लिए दोषी नहीं बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुस्लिम लीग के दो नेताओं के कारण यह दंगा हुआ था। अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए इन लोगों ने सुनियोजित साजिश के तहत दंगा कराया था। आयोग ने दंगे रोकने के लिये कई सुझाव दिए हैं। खास तौर यह कहा गया कि मुसलमानों को वोट बैंक समझने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।

मुरादाबाद में 13 अगस्त 1980 की सुबह ईद की नमाज के दौरान दंगे भड़क गए थे। इसमें 83 लोग मारे गए और 112 व्यक्ति घायल हुए थे। उस वक्त 70 हजार नमाजी ईद-उल-फितर की नमाज पढ़ने पहुंचे थे। ईदगाह के पास कुछ सुअरों के आने के बाद विरोध शुरू हुआ था और पुलिस व अधिकारियों पर हमले शुरू कर दिए गए थे। हिन्दुओं के मकानों पर भी पथराव हुए थे। इसी के बाद पुलिस ने पहले लाठी, फिर आंसू गैस और फिर गोलियां चलाईं। हिन्दू भी भड़क गए थे और दंगे ने खौफनाक रूप ले लिया था।

तत्कालीन वीपी सिंह की सरकार ने दंगे की जांच के लिए न्यायमूर्ति एमपी सक्सेना को जिम्मेदारी सौपते हुए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग की समिति बनाई थी। न्यायमूर्ति एमपी सक्सेना ने 496 पेज की रिपोर्ट 29 नवम्बर 1983 को सरकार को सौंपी थी। तभी से यह रिपोर्ट दबी हुई थी।

जांच आयोग के निष्कर्ष
- आयोग ने माना कि ईद वाले दिन पुलिस अधिकारियों ने पूरी तरह सावधानी बरती थी।
-ईदगाह पर गोली तभी चलाई गई जब वहां रहने वालों के जीवन पर संकट आ  गया। केवल आत्मरक्षा के लिए गोली चलाई गई। इस तथ्य के बावजूद दंगाइयों ने हिंदुओं व अधिकारियों और पुलिस बल पर अविवेकपूर्ण ढंग से हमला करके हथियार तथा गोली बारूद छीन कर उत्तेजना फैलाई। 
-जरूरत के हिसाब से पर्याप्त बल प्रयोग किया गया। यदि उन्होंने इस प्रकार की कार्यवाही न की होती तो शहर में पूर्णतया अव्यवस्था फैल जाती और जनजीवन और संपत्ति की आपार संपत्ति होती। बल प्रयोग न अत्याधिक था और न अपर्याप्त। ईदखाना, बरफखाना और भूरा का चौराहा पर अधिकतर लोगों की मृत्यु भगदड़ के कारण हुई थी जिसके लिए अधिकारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। 
-पुलिस पीएसी ने अपने अधिकारियों के निर्देश पर काम किया। ऐसी कोई बात नहीं है जिससे यह पता चले कि उन्होंने स्वयं मुसलमानों की दुकानें लूटीं या लुटवाईं। 

यह कारण था
ईद के दिन जब नगर में यह अफवाह फैली कि नमाजियों के बीच सुअर धकेल दिए गए और ईदगाह में बच्चों के साथ बड़ी संख्या में मुसलमान मार दिए गए तो मुसलमान क्रोध में आपे से बाहर हो गए और उन्होंने थानों, पुलिस चौकियों और हिंदुओं पर अंधाधुंध हमला कर दिया। इस पर हिंदुओं ने भी बदला लिया। रिपोर्ट में कहा गया कि हर समाज में कुछ समाज विरोधी तत्व होते हैं और अपना पुराना द्वैष मिटाने और स्थिति को बिगाड़ने के लिए तुरंत आ जाते हैं। हालांकि मरने वालों में कई भगदड़ में मरे थे। 

सुझाव 
-सांप्रदायिक रूप से संवदेनशील क्षेत्रों में गड़बड़ी पैदा करने वाले लोगों और पेशेवर अपराधियों 
की गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए।
-सरकार को दोनों समुदायों के संशय के कारणों को दूर करना चाहिए ताकि कोई गलतफहमी न रहे
-जब दंगा हो तो लाउडस्पीकर के जरिए सही तथ्यों की घोषणा कर अफवाह का खंडन किया जाए क्योंकि प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा करने वाले भयावह वर्णन करते हैं। 
-अवैध हथियार बनाने व रखने वालों की नियमित जांच हो
-दंगे के कारण उत्पन्न होने वाले मामलों का निर्णय न्यायालय में होना चाहिए
-पाकिस्तानी नागरिकों को उनके वीसा की अवधि समाप्त होने के बाद नहीं ठहरने देना चाहिए 
रिपोर्ट की खास बातें 
-मुरादाबाद में 13 अगस्त 1980 को मुरादाबाद में ईदगाह समेत 20 स्थानों पर दंगे हुए थे  
-इसमें हिंदु मुसलमान मिला कर 84 की मृत्यु हुई थी और 112 लोग घायल हुए 
 -मुरादाबाद के ईदगाह , बरफखाना, पुलिस चौकी गलशहीद, पुलिस चौकी फैजगंज, चौराहा तसहीली स्कूल, चौराहा नागकनी, मोहल्ला नवावपुरा, मोहल्ला किसरौल, कोतवाली, गंजबाजार, मोहल्ला वरवालां, दौलत बाग, , कंबल का ताजिया
-दंगों के वक्त मुरादाबाद के डीएम एसपी आर्य, एसएसपी वीएन सिंह,अपर पुलिस अधीक्षक बी बी दास, सीओ प्रथम एके मिश्रा, अपर जिला मजिस्ट्रेट डीएसएस यादव थे।