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वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर ही नहीं, रेलवे स्टेशन पर रखे रोप-वे के मॉडल पर भी बरस रहा पैसा

वाराणसी रेलवे स्टेशन पर इन दिनों गजब की आस्था दिखाई दे रही है। यहां रखे रोप-वे के मॉडल पर भी चढ़ावा आ रहा है। मॉडल में बने छेद से यात्री इसके अंदर एक, दो, पांच, दस के सिक्कों के साथ नोट डाल रहे हैं।

वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर ही नहीं, रेलवे स्टेशन पर रखे रोप-वे के मॉडल पर भी बरस रहा पैसा
Yogesh Yadavहिन्दुस्तान,वाराणसीWed, 21 Feb 2024 03:29 PM
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भगवत गीता में कहा गया है कि सृष्टि के कण-कण में ईश्वर का वास है। यही कारण है कि सनातन धर्म में पत्थरों, नदियों, वृक्षों, पशु-पक्षियों को भी ईश्वर का अंश मानकर उनकी पूजा की जाती है। आस्था कहीं भी और किन्हीं भी रूपों में उमड़ती है। ऐसी ही श्रद्धा वाराणसी के रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रही है। यहां यात्री हाल में रखे गए रोप-वे मॉडल पर पैसा बरस रहा है। आते-जाते यात्री यहां चढ़ावा चढ़ा रहे हैं। लोगों की आस्था को देखकर अधिकारी भी हैरान हैं। उनका मानना है कि मॉडल में बनारस शहर की पुण्य भूमि के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा भी प्रदर्शित की गई हैं। मंदिर और गंगा के कारण ही यात्री यहां चढ़ावा चढ़ा रहे हैं। यह चढ़ावा एक रुपये से 100 रुपये तक है। 

प्रधानमंत्री मोदी की काशी में विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर बनने के बाद से हर रोज लाखों लोग आ रहे हैं। इससे न सिर्फ काशी विश्वनाथ मंदिर में पैसा बरस रहा है बल्कि हर तरह के कारोबारी गदगद हैं। इस बीच यहां अपनी तरह का देश का पहला रोप-वे बन रहा है। रोप-वे का पिछले दिनों पीएम मोदी ने शिलान्यास किया था। रोप-वे की मदद से यहां आने वाले लोगों को रेलवे स्टेशन से काशी विश्वनाथ मंदिर जाने में काफी सुविधा होगी। स्थानीय लोगों को भी वाराणसी रेलवे स्टेशन से कैंट, रथयात्रा और यहां के हृदय स्थल गोदौलिया आने जाने में आसानी हो जाएगी। इसी रोप-वे का मॉडल वाराणसी रेलवे स्टेशन के यात्री हाल में रखा है।

कैंट स्टेशन से चलने व गुजरने वाली 112 जोड़ी ट्रेनों से आने-जाने वाले 70000 से एक लाख यात्रियों में बहुतेरे ऐसे होते हैं, जो मॉडल देखने के दौरान विश्वनाथ मंदिर और गंगा को देखकर श्रद्धा से सिर झुकाते हैं और बॉक्स में बनी खाली जगह में चढ़ावा चढ़ाते हैं। आकर्षण का केन्द्र बने रोप-वे मॉडल को लोग हजारों रेलयात्री निहारते हैं। उसके साथ सेल्फी लेते हैं। रोप-वे से जुड़ी जानकारी हासिल करते हैं।

दरअसल, प्राचीन काल से है नदियों में पैसे डालने व पूजन में चढ़ावा की परम्परा नदियों में सिक्के डालने की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है। लोग के समय भी नदी पार करने के दौरान खिड़कियों से सिक्के फेंकते हैं। इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व हैं। ज्योतिषाचार्य पं. अभय प्रकाश द्विवेदी बताते हैं कि सनातन धर्म में दक्षिणा चढ़ाना पूजन-अर्चन का एक अंग है।

उन्होंने बताया कि नदी, तालाब या अन्य जलस्रोत का पानी पीने के लिए उपयोगी और पवित्र माने गए हैं। जल शुद्धीकरण के लिए पहले सोने, चांदी, तांबे के सिक्के नदियों में डाले जाते थे। हालांकि अब सोने, चांदी की जगह लोहे, एल्यूमीनियम आदि के सिक्कों ने ले ली है, पानी को शुद्ध नहीं करते।

रोप-वे मार्ग और स्टेशनों का नजारा
मॉडल में रोप-वे के प्रस्तावित मार्ग, चारों स्टेशनों, चौराहों, उसके आसपास के भवनों, ऐतिहासिक स्थल, मंदिर समेत अन्य प्रमुख जगहों मोक्षदायिनी को भी दर्शाया गया है। कैंट स्टेशन परिसर में बन रहे पहले स्टेशन, काशी विद्यापीठ के दूसरे, रथयात्रा के तीसरे और गोदौलिया पर बन रहे चौथे स्टेशन का पूरा खाका खींचा गया है।

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