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इनसे सीखेंः विधायक से मंत्री तक रहे पर 94 साल के बोस बाबू के पास अपना घर नहीं

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उत्तर प्रदेश में चार बार विधायक और दो बार मंत्री रहने के बावजूद 94 वर्षीय जमुना प्रसाद बोस के पास खुद का घर नहीं है। बांदा में वह किराए के मकान में रहते हैं। कहते हैं कि पहले चुनाव पैसों के बल पर नहीं लड़े जाते थे, लेकिन नीति व सिद्वांतों के साथ होते थे। विरोधी भी नीतियों को कोसते थे। व्यक्तिगत हमला नहीं होता था। लंच पैकेट की परंपरा थी ही नहीं। साइकिल और पैदल ही बड़े-बड़े नेता चलते थे। आज की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप पर दुखी बोस बाबू कहते हैं राजनीति में सिद्धांतवादी नेताओं में कमी आना घातक है। 
 
बांदा के खिन्नी नाका मोहल्ला निवासी जमुना प्रसाद बोस ने 1939 में छात्र कांग्रेस का गठन बांदा में किया। उस समय कक्षा नौ के छात्र ने हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट में संगठन खड़ा किया। 1962 में बोस ने पहला चुनाव सोशलिस्ट पार्टी से लड़ा जिसमें वह कांग्रेस की उम्मीदवार सवित्री निगम से मात्र 11 हजार वोटों से हार गए। इसके बाद उन्होंने 1974 में सोशलिस्ट पार्टी से पहली बार बांदा सदर से विधायक बने। फिर 1977 में यूपी के ग्राम विकास व पंचायती राज मंत्री बने। 1985 में फिर विधायक बने। 1989 में मुलायम सरकार में पशुपालन व मत्स्य मंत्री रहे। जमुना आज भी खादी का कपड़ा पहनते हैं और समय के इतने पाबंद कि आमंत्रण पर निर्धारित समय से पांच मिनट पहले पहुंच जाते हैं।
 
मकान के ऑफर को दिया ठुकरा
शहर के खिन्नी नाका मोहल्ले में 1925 में जन्मे जमुना प्रसाद के पिता ब्रिटिश शासनकाल में बांदा नगरपालिका में मुंशी थे।1945 में बहन की शादी के लिए पैतृक मकान 500 रुपये में बिक गया। उसके बाद पूरा परिवार आज तक किराए के मकान में रह रहा है। उनके दो कमरों के इस घर में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चन्द्रशेखर, पूर्व सीएम मुलायम सिंह आदि दिग्गज हस्तियां आ चुकी हैं। पांच साल पहले पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह बांदा आए और उनको मकान देने का प्रस्ताव दिया जिसे बोस ने शुक्रिया कहकर ठुकरा दिया। 

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  • Web Title:MLA from minister but 94 years Bose Babu does not have his own house