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शहीद की मजार के पास नीम के पेड़ से अचानक निकलने लगी दूध की धार, जानें सच

गोरखपुर के छोटे काजीपुर मोहल्‍ला आजादी के समय से ही हिन्‍दू-मुस्लिम एकता की मिसाल रहा है। यहां अंग्रेजों के जमाने से स्थित शहीद की मजार के साथ लगे पेड़ को देखने के लिए इन दिनों भीड़ उमड़ रही है।

शहीद की मजार के पास नीम के पेड़ से अचानक निकलने लगी दूध की धार, जानें सच
Ajay Singhराजीव दत्‍त पांडेय,गोरखपुरFri, 23 Feb 2024 12:48 PM
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गोरखपुर का छोटे काजीपुर मोहल्‍ला आजादी के समय से ही हिन्‍दू-मुस्लिम एकता की मिसाल रहा है। यहां अंग्रेजों के जमाने से स्थित एक शहीद की मजार के साथ लगे 15-20 साल पुराने नीम के पेड़ को देखने के लिए इन दिनों भीड़ उमड़ रही है। करीब आठ दिन से स्थानीय और दूर दराज से आ रहे कई लोग इसे अल्लाह का करम और ईश्वर का चमत्कार बता रहे हैं। उनका दावा है कि 'चमत्कारी’ नीम के पेड़ से पिछले आठ दिन से लगातार ‘दूध’ टपक रहा। इस दूध को लोग दिन भर एकत्र करने में जुटे रहते हैं। हालांकि विशेषज्ञ इसे चमत्‍कार नहीं मानते।

इसके पीछे की वजह बताते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इंड्रस्ट्रियल बायोलॉजी विभाग के डॉ साहिल महफूज इसे पेड़ में जीवाणु का संक्रमण करार देते हैं। फिलहाल नीम पेड़ से जुड़ी चमत्कार की कहानियां और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।

मोहल्ले के बड़े-बुजुर्गो के मुताबिक यह मजारअंग्रेजों के जमाने से पहले की है। मान्यता है कि किसी शहीद की मजार है। आसपास कई और मजार भी रहीं लेकिन वक्‍त के साथ उनका अस्तित्‍व मिट गया। मजार के बगल में सटा हुआ नीम का पेड़ है। मोहल्ले के बुजुर्ग शमशुल आफरीन कहते हैं कि, ‘ पिछले आठ दिन से दूध की धारा बह रही है। वह पहली बार ऐसा देख रहे हैं। यह कुदरत का करिश्मा है, अल्लाह का करम है।’ स्थानीय लोगों के मुताबिक गुजरते दिन के साथ ‘दूध’ की रफ्तार भी तेज हो गई।

आस-पास के मोहल्लों के लोग जुटने लगे तो किसी ने ‘दूध’ का स्वाद चख कर ‘मीठा’ बताया। हालांकि प्राकृतिक रुप से नीम कड़वा होता है, स्वाद में तरल पदार्थ का ‘मीठा’ होना भी चमत्कार है। नीम का पेड़ यूं भी आयुर्वेदिक दृष्टि औषधीय है, लिहाजा ‘दूध’ एकत्र करने की होड़ सी मच गई है। कुछ ने प्रार्थना और इबादत भी शुरू कर दी है। कुछ लोगों ने जर्जर मजार पर नई चादर भी डाल दी है।

क्‍या बोले विशेषज्ञ
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इंड्रस्ट्रियल बायोलॉजी विभाग के डॉ साहिल महफूज इसे जीवाणु का संक्रमण करार देते हैं। उन्होंने बताया कि एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमफेशियन्स नाम के जीवाणु के संक्रमण के कारण नीम के ऊतकों में अतिरिक्त पानी जमा होने लगता है। ऐसे में पेड़ के तने में ट्यूमर बन जाते हैं। जब वायुमंडलीय आर्द्रता अधिक होती है, इन ट्यूमर के ऊतक कमजोर होकर टूट जाते हैं।

इस कारण तरल पदार्थ का स्राव होता है। यह सफेद होता है। यह काफी दिनों तक रिसता रहता है। उन्होंने कहा कि यह कोई असामान्य या दैवीय बात नहीं है। यह आमतौर पर होता रहता है। चूंकि आबादी में है तो लोगों की नजर में आ गया।

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