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मुलायम के कुर्सी संभालने तक खड़ी रहीं मायावती, 24 साल बाद एक मंच पर साथ दिखे

mayawati and mulayam singh  ht   file photo   ht   file photo

मैनपुरी के क्रिश्चियन मैदान में शुक्रवार को इतिहास रचा गया। सपा और बसपा का मिलन तो पहले ही हो गया था, लेकिन शनिवार को सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक-दूसरे के लिए सम्मान में कसीदे पढ़कर दोनों दलों के रिश्ते और मजबूत कर दिए। बीती कड़वाहट मिट गई। इस दौरान मुलायम के कुर्सी संभालने तक मायावती मंच पर खड़ी रहीं। मायावती के भाषण के दौरान मुलायम तालियां बजाते रहे। वहीं, मुलायम के तारीफ करने पर मायावती मुस्कराती रहीं।

महाबंधन की इबारत लिखने वाले अखिलेश यादव ने सबसे पहले तीन कुर्सियों वाला मंच संभाला। कुछ ही मिनट बाद बसपा प्रमुख मायावती अपने भतीजे आकाश आनंद और महासचिव सतीश कुमार मिश्र के साथ मंच पर पहुंची, तो भीड़ ने जोरदार नारेबाजी से उनका स्वागत किया। बाईं ओर रखी कुर्सी पर माया बैठ गईं। इसी बीच सपा संरक्षक मुलायम सिंह के आगमन की घोषणा हुई तो अखिलेश उन्हें लेने के लिए आगे बढ़े। सीढ़ियों पर सहारा दिया और मंच पर लेकर आए। इस दौरान मायावती उनके सम्मान में खड़ी रहीं। दाईं कुर्सी पर मुलायम के बैठते ही माया बीच में बैठी और अखिलेश बाईं ओर। 

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दो और कुर्सियां लगवाईं

सांसद तेजप्रताप सिंह ने सबसे पहले मायावती का बुके-स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया और पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। इसके बाद मुलायम व अखिलेश यादव का स्वागत किया। इस बीच, सपा प्रमुख के कहने पर आकाश व सतीश मिश्र के लिए भी मंच पर दो कुर्सियां लगवाई गईं।

अहसान जिंदगीभर नहीं भूलेंगे

नामांकन के समय बसपा का नाम लेने भी कतरा रहे मुलायम ने आज माइक संभालते ही बसपा के सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा, आदरणीय मायावती जी, हम आपका सम्मान करते हैं। आपने हमेशा सपा का साथ दिया है। आप हमारे क्षेत्र में आई हैं। यह अहसान हम जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे। कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वह मायावती का आदर-सम्मान करें। भाषण समाप्त हुआ तो माया कुर्सी संभालने तक मुलायम सिंह के सम्मान में खड़ी रहीं।

अखिलेश ने खड़े होकर सम्मान दिया

माइक पर जब बारी माया की आई तो मुलायम सिंह ने बार-बार हाथ उठाया, तालियां बजाईं और अखिलेश ने खड़े होकर सम्मान दिया। बसपा प्रमुख ने भी मुलायम के लिए खूब कसीदे पढ़े। सात बार मुलायम का उल्लेख किया और कहा- मुलायम सिंह जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह नकली रूप से पिछले वर्ग के नहीं हैं, बल्कि वे जन्मजात और असली पिछड़े वर्ग के हैं। 

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लेने पड़ते हैं कठिन फैसले

दो जून 1995 के लखनऊ गेस्टहाउस कांड को भी माया ने मंच से रखा। उन्होंने कहा, देशहित में हमें कठिन फैसले लेने पड़ते हैं और इसके चलते ही हमने महाबंधन बनाया है। मुलायम को लाखों मतों से जिताने का वादा भी जनता से लिया। अखिलेश ने मुखिया की जिम्मेदारी निभाते हुए सभा के अंत में मायावती के भतीजे आकाश आनंद को मुलायम सिंह का आशीर्वाद दिलवाया।
 

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  • Web Title:Mayawati remain standing while Mulayam was adjusting his chair in the joint rally in mainpuri