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'ब्लैक पेपर' और 'श्वेत पत्र' पर मायावती की प्रतिक्रिया, ये खेल चुनावी स्वार्थ

'ब्लैक पेपर' और 'श्वेत पत्र' पर मायावती की प्रतिक्रिया आई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस खेल को चुनावी स्वार्थ बताया है। ऐसी संकीर्ण राजनीति से देश व जनहित एवं जनकल्याण कैसे संभव?

'ब्लैक पेपर' और 'श्वेत पत्र' पर मायावती की प्रतिक्रिया, ये खेल चुनावी स्वार्थ
Deep Pandeyलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊFri, 09 Feb 2024 01:19 PM
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बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती की 'ब्लैक पेपर' और 'श्वेत पत्र' पर प्रतिक्रिया आई है। मायावती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और भाजपा के बीच अगले लोकसभा आमचुनाव से पहले गंभीर आरोपों-प्रत्यारोपों की आपाधापी तथा ’’ब्लैक पेपर’’ (काला पत्र) और ’’वाइट पेपर’’ (श्वेतपत्र) जारी करके एक-दूसरे को गलत, व जनविरोधी आदि साबित करने का खेल चुनावी स्वार्थ के सिवाय कुछ भी नहींतथा ऐसी संकीर्ण राजनीति से देश व जनहित एवं जनकल्याण कैसे संभव? मायावती ने कहा कि ख़ासकर ऐसे समय जबकि कुछ मुट्ठी भर लोगों को छोड़कर देश के करोड़ों लोग जबरदस्त महंगाई, अपार गरीबी, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली तथा ग्रामीण भारत की दुर्दशा आदि के तनावपूर्ण जीवन की मार से लगातार त्रस्त हैं जिससे देशहित भी लगातार प्रभावित है, सभी स्वार्थ व विद्वेष आदि को त्याग कर देश की अति-चिन्तनीय राष्ट्रीय समस्याओं पर संगठित प्रयास बहुत जरूरी।

वैसे तो हर सरकार समय-समय पर ’’वाइट पेपर’’ जारी करके आंकड़ों के माध्यम से अपनी वाहवाही बटोरने के साथ ही पिछली सरकार को कठघरे में खड़ा करके आत्मसंतुष्टि का प्रयास करती है, किन्तु हर सरकार की नीति व उसके कार्यकलापों का सही आकलन जनता की बेहतर रोटी-रोजी व इनकी खुशी एवं खुशहाल जीवन पर निर्भर है और जिस मामले में पहले कांगेस पार्टी की तरह ही वर्तमान में भाजपा सरकार का रिकार्ड भी न तो उल्लेखनीय और न ही सराहनीय माना जायेगा।
इसीलिए वर्तमान भाजपा सरकार के विरुद्ध कांग्रेस पार्टी द्वारा ’’ब्लैक पेपर’’ जारी करके इनके पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल को हर प्रकार का ’’अन्यायकाल’’ बताने से पहले कांग्रेस को यह जरूर सोचना चाहिए कि अगर उनका अपना यूपीए का 10 साल के कार्यकाल का रिकार्ड खासकर देश की गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ापन तथा भ्रष्टाचार दूर करने के मामले में शानदार होता तो फिर भाजपा को देश की सत्ता में आने का मौका ही नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि उसी प्रकार, वर्तमान भाजपा सरकार का पिछले 10 वर्षों का कार्यकाल अगर जनहित, जनकल्याण, देशहित, सामाजिक एवं धार्मिक सौहार्द, शान्ति-व्यवस्था आदि के मामले में बेहतरीन होता तो सर्वसमाज के करोड़ों लोग आज जीवन के हर क्षेत्र में इतने परेशान व बदहाल कभी नहीं होते और न ही महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ापन आदि के तंग जीवन से गुजर रहे 80 करोड़ से अधिक मेहनतकश लोगों को थोड़े से सरकारी अनाज की मजबूर व मोहताज जिन्दगी गुजारने को मजबूर होना पड़ता।
इतना ही नहीं बल्कि देश के लोगों की प्रति व्यक्ति आय में आपेक्षित वृद्धि न होना किन्तु बड़े-बड़े पूंजीपूतियों व धन्नासेठों का दिन दोगुनी व रात चैगुनी धनवान होना, एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण को निष्क्रिय व निष्प्रभावी बनाना, इनके बैकलाग को नहीं भरना, विश्व बाजार में रुपये का अवमूल्यन जारी रहने व आमजनजीवन में भ्रष्टाचार में उल्लेखनीय कमी नहीं आना कुछ जनहित के ऐसे खास मुद्दे हैं जो लोगों को विचलित करते रहते हैं, और जो देश को उसके समतामूलक कल्याणकारी विकास के अति-महत्वकांक्षी उद्देश्य से दूर कर रहे हैं और साथ ही भाजपा को कांग्रेस राज जैसी बुराइयों वाला साबित कर रहे हैं।

इसके विपरीत, भाजपा सरकार द्वारा ’’श्वेतपत्र’’ के जरिए पिछली यूपीए सरकार पर अर्थव्यवस्था को दस साल में बर्बाद करने आदि का आरोप अगर सही भी है तो अब गड़ा मुर्दा उखाड़ने का क्या लाभ? देश व जनहित की असल बात तो तब होती जब देश उन सारी कांग्रेसी सरकार की बुराइयों से पाक-साफ होकर उभर जाता और देश की अर्थव्यवस्था का विकास रोजगारी-रहित न होकर रोजगार-युक्त होता और इस विकास का लाभ यहाँ सर्वसमाज के सभी लोगों को मिल रहा होता।

वास्तव में अगर देखा जाये तो केन्द्र में सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो या फिर वर्तमान में भाजपा की, देश के करोड़ों दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ों, धार्मिक अल्पसंख्यकों में भी खासकर मुस्लिम समाज तथा सर्वसमाज के गरीबों, बेरोजगारों, युवाओं, किसानों, महिलाओं एवं अन्य मेहनतकश समाज का जीवन हर प्रकार से लाचार व मजबूर बना हुआ है और वे लोग अपने थोड़े ’अच्छे दिन’ को लगातार तरस रहे हैं, जिसपर से ध्यान बांटने के लिए ही पार्टियां व इनकी सरकारें लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने आदि का राजनीतिक खेल लगातार खेलती रहती हैं, जो अति-दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण व देशहित के विरुद्ध, इससे जनता जरूर सावधान रहे तो बेहतर क्योंकि देश का संविधान सेक्यूलर है अर्थात् सभी धर्मों को एक समान रूप से आदर-सम्मान व उनके जान-माल व मजहब को सुरक्षा प्रदान करने की गारण्टी देता है।
 

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