DA Image
5 जून, 2020|9:48|IST

अगली स्टोरी

लॉकडाउन में बाराती कितने भी हो, कम न होगा मामा-फूफा का रुतबा

लॉकडाउन में प्रशासन ने बारातों में सिर्फ 20 लोगों के शामिल होने की छूट दी है। पर कितने भी कम बाराती हों, मामा और फूफा को बुलाए बिना काम नहीं चलेगा। सनातन धर्म की परम्परा के मुताबिक शादी-ब्याह में कुछ रिश्तेदारों की मौजूदगी जरूरी है। देवकली तीर्थ के आचार्य प्रमोद दीक्षित ने बताया कि सनातन धर्म में विवाह किसी दावत समारोह का नहीं, एक संस्कार का नाम है। हर संस्कार के रिश्तेदार तय हैं।

इनकी मौजूदगी है जरूरी
-पंडित जी: वर और वधू दोनों ही पक्षों के लिए पंडित की अहम आवश्यकता होती है। वहीं परम्परानुसार वैवाहिक संस्कार सम्पन्न कराते हैं।

-माता-पिता: बेटी के ब्याह में कन्यादान माता और द्वारा किया जाता है। बेटी के हाथ पीले करने और पैर पूजने में माता-पिता की आश्यकता होती है।

-भाई: बहन की शादी में भाई पर स्वागत सम्मान और बारातियों के खान-पान की जिम्मेदारियों के अलावा भाई मंडप में लाई भूनने की रस्म निभाता है। वहीं वर पक्ष में भी छोटा भाई सहबेला बनता है और बड़ा भाई अनुज वधू का कोंछ भरकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद विवाह प्रारम्भ होने से पहले करता है।

-भाभी: वधू पक्ष की तरफ से भाभी का बड़ा दायित्व होता है। जो फेरों के समय नववधू को सुहाग देकर उसके अखंड सौभाग्य की मंगलकामना करती है। वहीं अटहर के दौरान वर के काजल लगाने की रस्म भी भाभी ही निभाती है।

-फूफा: फूफा सज रहे दूल्हे को पगड़ी पहनाकर दाम्पत्य जीवन की तरफ बढ़ने को प्रेरित करता है।

-बहनें: लग्नमण्डप में सज रहे दूल्हे को बुरी नजरों से बचाने के लिए बहनें नजर उतारकर बलाएं दूर भागती हैं।

-बहनोई: दूल्हा सज रहा हो तो बहनोई का अपना अलग काम है। वह तिलक चंदन कर दूल्हे को आशीर्वाद प्रदान करता है।

-मामा: भांजी को पीली साड़ी देता है। शादी के बाद मामा मंडप हिलाने की रस्म अदा करते हैं।

-माली: शादी ब्याह में दोनों ही पक्षों को माली की जरूरत होती है। मंगलाचरण के लिए फूल-माला लाने और दूल्हे के सिर पर मौर सजाने की जिम्मेदारी माली की होती है।

-लोहार: दूल्हे की अटहर में एक लोहार की जरूरत रहती है। जो धातु निर्मित कंकन बनाकर दूल्हे के हाथ में बांधता है।

-साली: साली के बिना तो बारात की शोभा ही अधूरी है। विदाई से ठीक पहले कलेवा के दौरान दुल्हन की बहन दूल्हे के जूता छिपाती है।

-नाई, कहार, धोबी,कुम्हार: शादी ब्याह में परम्पराओं के लिहाज से नाई, कहार,महरा,धोबी और कुम्हार की अलग-अलग भूमिकाएं हैं।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:marriage-in-corona-lockdown-mama Phupha