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Hindi News उत्तर प्रदेशमौसम की मार से आम-लीची के फल छोटे हुए, गवरजीत, दशहरी, चौसा पर पड़ा असर

मौसम की मार से आम-लीची के फल छोटे हुए, गवरजीत, दशहरी, चौसा पर पड़ा असर

यूपी में खराब मौसम की मार से आम-लीची के फल छोटे हो गए हैं। एक तो तपिश, दूसरे पूरे सीजन में अब तक बारिश नहीं होने का असर फलों पर पड़ा। गवरजीत, दशहरी, चौसा, देशी समेत आम की कई प्रजातियां प्रभावित हुईं।

मौसम की मार से आम-लीची के फल छोटे हुए, गवरजीत, दशहरी, चौसा पर पड़ा असर
Srishti Kunjराजीव दत्त पाण्डेय,गोरखपुरSat, 25 May 2024 07:00 AM
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मार्च से ही अप्रत्याशित रूप से बढ़े तापमान और बारिश न होने के चलते इस बार आम और लीची के फल छोटे रह गए हैं। बागीचों में आम और लीची के फलों के फटने और असमय पेड़ से गिरने की शिकायतें बढ़ गई हैं। किसान आम और लीची के उत्पादन व स्वाद प्रभावित होने को लेकर चिंतित हैं। बढ़ते शहरीकरण और संसाधनों के विकास के चलते बागीचे निरंतर सिकुड़ रहे। फलदार पेड़ों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है। रही सही कसर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दुष्प्रभाव और तपिश ने पूरी कर दी है। 

गोरखपुर में 160 हेक्टेयर में गवरजीत, दशहरी, चौसा, कपूरी व अन्य देशी प्रजातियों के साथ 110 हेक्टेयर में लीची की खेती की गई है। लेकिन असमय गर्मी और बारिश न होने से आम और लीची के फल के छिलके झुलस गए। उनकी कोशिकाएं मरने से वे फट गए हैं। वे असमय पेड़ों से गिरने लगे हैं। इस कारण पेड़ों पर फलों की संख्या भी कम नजर आ रही है।  

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फसल अच्छी थी पर गर्मी से उत्पादन प्रभावित
गोरखपुर में बागवानी करने वाले किसान मोहम्मद मतीउल्लाह, मोहम्मद माज, तैय्यब उमर का कहना है कि इस बार बारिश न होने और गर्मी ज्यादा पड़ने के कारण फल का साइज छोटा हो गया। इसके अलावा सनबर्न की समस्या भी है। फल फटकर गिर जा रहे हैं। इन किसानों की चिंता है कि इस बार उत्पादन और स्वाद दोनों प्रभावित हो सकता है। हालांकि कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर वे बागीचों में थाला बनाकर फलों की सिंचाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस बार आम के फल बाजार में 15 जून के बाद ही उपलब्ध होंगे। 

बगीचों का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन जरूरी
जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार तिवारी का कहना है कि लीची और आम की उत्पादकता बढ़ाने के लिए जरूरी है कि बाग का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जाए। जलवायु परिवर्तन के प्रकोप देखते हुए किसानों को मंजर लगने के समय से ही बाग का प्रबंधन करना होगा। ताकि लीची और आम की उन्नत किस्मों का स्वाद ज्यादा दिनों तक मिल सके।

बेलीपार कृषि विज्ञान केंद्र, अध्यक्ष, डॉ एसके तोमर ने कहा कि शुरुआती दिनों में ज्यादा तापमान के चलते आम के मंजर झड़ गए। फलों के छिलके झुलसने से उनका उत्पादन घट गया। तपिश व लू की वजह से पके फलों की उम्र कम हो गई है। ऐसे में किसानों को बगीचे में सिंचाई कर नमी बनाए रखनी चाहिए। फट रहे फलों के लिए बोरोक्स का छिड़काव करना चाहिए।