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बसपा चार राज्यों के चुनाव में नहीं दिखा पाई चमत्कार, तीनों राज्यों में वोट प्रतिशत 2018 के मुकाबले गिरा

चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम आए हैं। बसपा चार राज्यों के चुनाव में चमत्कार नहीं दिखा पाई। सीटें कम होने के साथ वोटिंग प्रतिशत गिरा। तीनों राज्यों में वोट प्रतिशत 2018 के मुकाबले गिरा है।

बसपा चार राज्यों के चुनाव में नहीं दिखा पाई चमत्कार, तीनों राज्यों में वोट प्रतिशत 2018 के मुकाबले गिरा
Srishti Kunjशैलेंद्र श्रीवास्तव,लखनऊMon, 04 Dec 2023 06:14 AM
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चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम आ चुकें हैं। चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि बसपा मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलांगना में कोई चमत्कार नहीं दिखा पाई। वर्ष 2018 की अपेक्षा सीटें तो कम हुई ही साथ में वोटिंग प्रतिशत भी गिरा है। बसपा राजस्थान में मात्र दो सीटें जीती है, जबकि पिछले चुनाव में वह यहां छह सीटें जीती थी। बस यह संतोष करनी वाली बात है कि यूपी में मूल जनाधार होने के बाद भी विधानसभा चुनाव में एक सीट जीती थी और राजस्थान में दो सीटें मिली हैं।

गिर गया सीटों और वोट प्रतिशत का ग्राफ
बसपा ने इस बार की अपेक्षा वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बेहतर प्रदर्शन किया था। राजस्थान में वह 190 सीटों पर लड़ी थी और छह सीटें जीती। वोटिंग प्रतिशत 4.02 प्रतिशत रहा। कांग्रेस की सरकार बनने पर उसे बाहर से समर्थन दिया, लेकिन बाद में सभी विधायक टूट कर चले गए।

मायावती को यह मलाल पूरे पांच साल रहा कि समर्थन देने के बाद भी कांग्रेस ने उसके विधायकों को तोड़ लिया। मायावती राजस्थान में इस बार अपने दम पर चुनाव लड़ी और 199 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। इस बार उनका इरादा था कि सरकार बनने पर समर्थन देने की बात आई तो वह सत्ता में शामिल होंगी, लेकिन दो सीटें ही जीत पाई। इतना ही नहीं वोटिंग प्रतिशत भी गिरा। इस बार मात्र 1.82 प्रतिशत ही वोट मिले।

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मध्य प्रदेश में भी गिरा वोट प्रतिशत
दूसरे बड़े राज्य मध्य प्रदेश की बात करें तो बसपा को यहां करारा झटका लगा है। बसपा यहां गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन कर 178 सीटों पर चुनाव लड़ी, लेकिन एक सीट भी नहीं जीत पाई। इतना ही नहीं वोट मात्र 3.31 प्रतिशत ही मिला। वर्ष 2018 के चुनाव में दो सीटें मिली थी और वोटिंग प्रतिशत 5.01 था। छत्तीसगढ़ में गठबंधन पर 53 सीटों पर लड़ी और सभी पर हार गई। पिछले चुनाव में दो सीटें जीती थी और वोटिंग प्रतिशत 3.09 था। इस बाद वोट प्रतिशत गिरकर दो फीसदी ही रह गया। बसपा को तेलांगना में भी सफलता नहीं मिली।

फेल हुए गई भतीजे और समधी की रणनीति
मायावती ने इन राज्यों में चुनावी अभियान अपने भतीजे आकाश के साथ ही समधी अशोक सिद्धार्थ को सौंप रखा गया था। इन्होंने महीनों कैंप किया और पद यात्राएं भी निकाली। मायावती ने स्वयं इन सभी राज्यों में कई चुनावी सभाएं की, लेकिन उनका यूपी की तरह सारा फार्मूला इन राज्यों में भी फेल हो गया। देश में अगले साल लोकसभा का चुनाव होना है। बसपा अभी तक यह दावा करती रही है कि अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। इन राज्यों के आए चुनाव परिणाम के बाद अगर वह किसी गठबंधन में चली जाए तो कोई हैरत की बात नहीं।