ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तर प्रदेशलंदन से पढ़ाई, योगी के मंत्री को हराकर बसपा से बने MP, कौन हैं भाजपा में पहुंचे रितेश पांडेय?

लंदन से पढ़ाई, योगी के मंत्री को हराकर बसपा से बने MP, कौन हैं भाजपा में पहुंचे रितेश पांडेय?

रितेश पांडेय ने 2019 में योगी सरकार में मंत्री रहे मुकुट बिहारी वर्मा को हराकर अंबेडकरनगर लोकसभा सीट बसपा के टिकट पर जीती थी। तब सपा-बसपा गठबंधन था। रविवार को वह बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।

लंदन से पढ़ाई, योगी के मंत्री को हराकर बसपा से बने MP, कौन हैं भाजपा में पहुंचे रितेश पांडेय?
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊSun, 25 Feb 2024 04:35 PM
ऐप पर पढ़ें

लोकसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बसपा सांसद रितेश पांडेय रविवार को भाजपा में शामिल हो गए। रितेश पांडेय ने 2019 में योगी सरकार में मंत्री रहे मुकुट बिहारी वर्मा को हराकर अंबेडकरनगर लोकसभा सीट जीती थी। रितेश का महत्व इस बात से ही समझा जा सकता है कि उनके बसपा छोड़ते ही मायावती की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। बसपा प्रमुख ने रितेश पांडेय को लोकसभा संसदीय दल का नेता भी बनाया था। 42 वर्षीय रितेश पांडेय ने यूरोपियन स्कूल, लंदन से अन्‍तरराष्‍ट्रीय व्‍यापार प्रबंधन में स्नातक की डिग्री हासिल की है। रितेश राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता राकेश पांडेय उत्‍तर प्रदेश विधानसभा के 2022 के चुनाव में आंबेडकरनगर जिले के जलालपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुने गये। इसके पहले राकेश पांडेय 2009 से 2014 तक आंबेडकर नगर के सांसद रहे थे।

रितेश पांडेय ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उस समय योगी की पहली सरकार में मंत्री रहे मुकुट बिहारी वर्मा को हराया था। इसके पहले रितेश पांडेय 2017 के विधानसभा चुनाव में जलालपुर से ही बसपा के विधायक चुने गये थे। उत्‍तर प्रदेश में वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और अंबेडकरनगर समेत राज्य की 80 सीट में 10 सीट पर जीत हासिल की थी। 

पहले बसपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा फिर भाजपा में शामिल
बसपा के टिकट पर लोकसभा के लिए चुने गये रितेश पांडेय ने रविवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर दिल्ली में भाजपा का दामन थामा। बसपा प्रमुख को संबोधित पत्र में रितेश पांडेय ने पार्टी से विधायक और फिर सांसद चुने जाने की अपनी राजनीतिक उपलब्धियों की चर्चा करते हुए यह शिकायत की कि मुझे लंबे समय से न तो पार्टी की बैठकों में बुलाया जा रहा है और न ही नेतृत्व के स्‍तर पर संवाद किया जा रहा है। मैंने आप (मायावती) से और शीर्ष पदाधिकारियों से संपर्क के अनगिनत प्रयास किये, लेकिन उनका कोई परिणाम नहीं निकला। 

पांडेय ने कहा कि मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि पार्टी को मेरी सेवा और उपस्थिति की अब कोई आवश्यकता नहीं रही, इसलिए प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देने के अलावा मेरे समक्ष कोई विकल्प नहीं है। पार्टी से नाता तोड़ने का यह निर्णय भावनात्मक रूप से एक कठिन निर्णय है।

उन्‍होंने कहा कि मैं इस पत्र के माध्यम से बहुजन समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देता हूं और आपसे आग्रह है कि मेरे इस त्यागपत्र को अविलंब स्वीकार किया जाए। कुछ घंटों बाद ही वह नई दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गए। वह उत्तर प्रदेश प्रभारी बैजयंत जय पांडा, महासचिव तरुण चुघ और उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में भाजपा का दामन थामा। इस दौरान उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे।

मायावती ने रितेश का बिना जिक्र कई पोस्ट किए
बसपा प्रमुख मायावती ने रितेश के बसपा छोड़ते ही रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्‍स पर कई पोस्‍ट में रितेश पांडेय का जिक्र किये बिना पार्टी सांसदों को नसीहत देते हुए कहा लिखा कि बसपा राजनीतिक दल के साथ ही परम पूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान व स्वाभिमान के मिशन को समर्पित मूवमेन्ट भी है, जिस कारण इस पार्टी की नीति व कार्यशैली देश की पूंजीवादी पार्टियों से अलग है, जिसे ध्यान में रखकर ही चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार भी उतारती है।

मायावती ने कहा कि अब बसपा के सांसदों को इस कसौटी पर खरा उतरने के साथ ही स्वयं जांचना है कि क्या उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता का सही ध्यान रखा? क्या अपने क्षेत्र में पूरा समय दिया? साथ ही, क्या उन्होंने पार्टी व इसके प्रयासों के हित में समय-समय पर दिये गये दिशानिर्देशों का सही से पालन किया है?

बसपा प्रमुख ने कहा कि ऐसे में अधिकतर लोकसभा सांसदों का टिकट दिया जाना क्या संभव है, खासकर तब जब वे स्वंय अपने स्वार्थ में इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं एवं निगेटिव चर्चा में हैं। मीडिया द्वारा यह सब कुछ जानने के बावजूद इसे पार्टी की कमजोरी के रूप में प्रचारित करना अनुचित है। बसपा का पार्टी हित सर्वोपरि है।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें